झोलाछाप डॉक्टरों पर किसका हैं आशीर्वाद, बिना डिग्री और बिना रजिस्ट्रेशन बेखौफ मरीजों की जान से कर रहे खिलवाड़

मुरैना जिले के अंबाह शहर में झोलाछाप डॉक्टरों की भरमार है। चाय की गुमटियों जैसी दुकानाें में झोलाछाप डॉक्टर मरीजों का इलाज कर रहे हैं। मरीज चाहे उल्टी, दस्त, खांसी, बुखार से पीड़ित हो या फिर अन्य कोई बीमारी से। सभी बीमारियों का इलाज यह झोलाछाप डॉक्टर करने को तैयार हो जाते हैं। खास बात यह है कि अधिकतर झोलाछाप डॉक्टरों की उम्र 18 से 25 साल के बीच है। मरीज की हालत बिगड़ती है तो उससे आनन फानन में अंबाह अथवा जिला अस्पताल मुरैना भेज दिया जाता है। जबकि यह लापरवाही स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों की जानकारी में भी है।
और तो और सभी प्रकार बीमारियों के ईलाज इन डॉक्टरों के द्वारा किए जा रहे है झोलाछाप डॉक्टर मरीजों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं और प्रशासन दूर से ही इन्हें देख रहा है।
आश्चर्य की बात तो यह है की जब जिला स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया तो वे जवाब तक देने में असमर्थ रहे और बीच में कॉल कट कर दिया।
डॉ. राकेश शर्मा, सीएमएचओ, मुरैना
बिना लाइसेंस के दवाओं का भंडारण भी करते हैं डॉक्टर
झोलाछाप चिकित्सकों द्वारा बिना पंजीयन के एलोपैथी चिकित्सा व्यवसाय ही नहीं किया जा रहा है। बल्कि बिना ड्रग लाइसेंस के दवाओं का भंडारण व विक्रय भी अवैध रूप से किया जा रहा है। दुकानों के भीतर कार्टून में दवाओं का अवैध तरीके से भंडारण रहता है। भांडेर अनुभाग में स्वास्थ्य विभाग द्वारा कई सालों से अवैध रूप से चिकित्सा व्यवसाय कर रहे लोगों के खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई नहीं की गई। इन दिनों मौसमी बीमारियों का कहर है। झोलाछाप डॉक्टरों की दुकानें मरीजों से भरी पड़ी हैं। गर्मी व तपन बढ़ने के कारण इन दिनो उल्टी, दस्त, बुखार जैसी बीमारियां ज्यादा पनप रही हैं। झोलाछाप इन मर्जों का इलाज ग्लूकोज की बोतलें लगाने से शुरू करते हैं। एक बोतल चढ़ाने के लिए इनकी फीस 300 से 500 रुपए तक होती है।

Subscribe to my channel
Comments are closed.