पुष्य नक्षत्र में बच्चों को पिलाई स्वर्ण भस्म युक्त दवा, शरीर के विकास सहित बढ़े रोग-प्रतिरोधक क्षमता

शहडोल। स्वर्ण प्राशन आयुर्वेद की एक महत्वपूर्ण विधा है। इसमें तीन महीने से ग्यारह साल तक के बच्चों को पुष्य नक्षत्र के दिन इस दवाई की बूंदे पिलाई जाती हैं।
पुष्य नक्षत्र महोत्सव के योग पर बलपुरवा शहडोल आयुर्वेदिक औषधालय में तीन माह से 11 साल तक की आयुवर्ग के बच्चों को स्वर्ण प्राशन कराया गया। इसमें बच्चों को स्वर्ण भस्म सहित अन्य औषधि युक्त दवाई की बूंदे पिलाई गईं। इससे बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी, शारीरिक विकास होगा।
आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारी डाक्टर किशोर सिंह ने बताया कि स्वर्ण प्राशन आयुर्वेद की एक महत्वपूर्ण विधा है। इसमें तीन महीने से ग्यारह साल तक के बच्चों को पुष्य नक्षत्र के दिन इस दवाई की बूंदे पिलाई जाती हैं।आयुर्वेदिक कॉलेजों सहित प्राइवेट चिकित्सक इस विधा का खूब उपयोग कर रहे हैं। डॉ. किशोर सिंह ने बताया कि क्षेत्र के बच्चे स्वस्थ रहें, इसके लिए दवाई पिलाई गई। अगले पुष्य नक्षत्र पर भी इसी प्रकार का स्वर्ण प्राशन कराया जाएगा।
पुष्य नक्षत्र माना जाता है शुभ
सत्ताइस नक्षत्रों में आठवां नक्षत्र है पुष्य। इस नक्षत्र को बहुत ही शुभ माना जाता है। इस नक्षत्र में किए जाने वाले शुभ कार्यों का अच्छा परिणाम प्राप्त होता है। एसा माना जाता है की इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले व्यक्ति उदार, सहनशील और परोपकारी होते हैं। धर्म-कर्म में इनकी गहरी आस्था होती है। सामाजिक कार्यों में विशेष रुचि होती है।
ये रहे उपस्थित
डाक्टर किशोर सिंह( चिकित्सा अधिकारी),शिवलाल साकेत (कम्पाउन्डर),मीना सिंह (महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता), चांदनी गुप्ता (कार्यकर्ता)।
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