बेखौफ राज: डंके की चोट पर सज रही जुआं महफिल, पुलिस नतमस्तक आखिर क्यों?

भाग्य आजमाने आसपास क्षेत्रों से पहुंच रहे जुआंरी
अखिलेश शर्मा, शहडोल।
मो.- 07999140850
जिले के बढ़ार थाना क्षेत्रांतर्गत जंगलों व इसके आसपास के क्षेत्र में इन दिनों जुएं का ठीहा गुलजार हो रहा है। जिसकी जनचर्चा भी इन दिनों नगर में आम हो चली है। सूत्रों की मानें तो, ग्रामीण क्षेत्रों में चल रहे इस ठीहे में आसपास के जिलों से जुआरी पहुंच रहे हैं और अपने गाढ़े मेहनत की कमाई को इस फड़ के संचालकों के हवाले कर रहे हैं। ऐसा नहीं है कि, पूरे शहर एवं गांव से लेकर इस जुएं की कानाफूसी जोरों पर हो और स्थानीय पुलिस फड़ से अनभिज्ञ हो। लेकिन, इस मामले में पुलिस की चुप्पी कई सवालों को जन्म दे रही है। बहरहाल, चुप्पी की वजह तो पुलिस ही बंया कर सकती है।
नवयुवा पीढ़ी हो रही है बर्बाद
कम समय पर ज्यादा पैसे कमाने की चाहत नवयुवाओं को जुएं के इस फड़ की ओर आकर्षित कर रही है। अच्छे और मध्यमवर्गीय परिवार के युवा भी इस फड़ में अपना भाग्य आजमाने पहुंच रहे हैं। जहां पहुंचकर लालच अनुसार कमाई तो नहीं मिलती बल्कि बर्बादी की कगार हासिल हो रही है। इतना ही नहीं यह पीढ़ी कर्ज सहित भारी-भरकम ब्याज की चपेट में भी फंस रही है।
लाखों में निकल रही नाल
एक ओर जहां जुए के इस ठीहे में कर्मचारी, व्यवसाई और युवा अपनी कमाई को लुटा रहे हैं। तो वहीं दूसरी ओर, फड़ संचालक लाखों रूपए रोज नाल के रूप में निकाल कर अपनी तिजोरियां भर दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की की राह पर हैं। जिन पर पुलिस संरक्षण का खुला आरोप भी लगाया जा रहा है।
कौन है फड़ का संचालक
सूत्रों की माने तो, इस जुएं के फड़ का मुख्य संचालक अनिल केवट, दीपू और अविनाश नामक व्यक्ति बताए गए हैं। जो कि, अपने आप को थाना सेट करने की बात करते हैं। जानकारी में बताया गया है कि, खिलाड़ियों को बकायदे सुरक्षित स्थानों में प्रतिदिन नई-नई जगहों में लेकर जाता है।
उठ रहे सवाल…
बताया गया है कि, बुढ़ार थाना क्षेत्र अंतर्गत संचालित इस जुआं की कानाफूसी जोरों पर है। सूत्रों की मानें तो, जुआ फड़ संचालकों के द्वारा सुरक्षा की दृष्टिकोण से रोजाना ठीहे बदल कर महफिल सजाई जाती है। स्थान परिवर्तन की सूचना जुआरियों को मोबाइल के माध्यम से दी जाती है। सूत्रों की मानें तो छाता रेलवे स्टेशन के पास, पकरिया, मुरधोवा, बरतरा, धनपुरा के आसपास यह महफिल सजती हैं। ऐसे में सवाल यह है कि, क्या स्थानीय पुलिस इस जुएं फड़ से अनभिज्ञ है। अगर नहीं तो फिर, पुलिसिया कार्यशैली सवालों के घेरे में है।
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