अवैध शराब की खपत करने वाले जिले अब राजधानी में शराब खपा रहे!

कही सिंगल शॉप ने चुनौतियां बढ़ाई ,कही चुनौतियों का सामना करने लायक नेतृत्व नहीं।
भोपाल। राजधानी भोपाल में इस बार सर्वाधिक राजस्व बढ़ोतरी के साथ शराब के ठेकों को 4 समूहों में बांटा गया है जिसमें 3 समूह तो मात्र एक शराब निर्माता कंपनी के अधीन ही है वही मात्रा एक समूह शिवहरे कंपनी के पास है। ऐसे में बड़े खिलाड़ियों के बीच जिले में अवैध शराब खपाने का दम दो जिले भर रहे है, जिसने पहला देवास जहां सिंगल शॉप पॉलिसी ने जिले में काफी हलचल मचा रखी है और छोटे-छोटे ठेकेदारों के बीच बड़े खलीफा भी अपना सिक्का चला रहे है इसमें इंदौर का एक बड़ा समूह सक्रिय है। माना जा रहा है देवास जहां अवैध शराब को सीधे राजनीतिक संरक्षण मिला हुआ है वहीं जिले की तेज तर्रार आबकारी मुखिया मंदाकिनी दीक्षित के लिए यह वर्ष काफी चुनौतीपूर्ण रहने वाला है। क्योंकि अवैध शराब और तस्कर सभी राजनीतिक की छांव में बैठे है।वही दूसरी और राजगढ़ में लखनलाल ठाकुर के रूप में कमजोर और अक्षम आबकारी नेतृत्व के कारण जिले में अवैध शराब पर किसी तरह की रोकधाम संभव नहीं है। स्थानीय प्रशासन की नाराजगी के बाद भी उक्त अधिकारी को यहां क्यों पदस्थ रखा गया है यह समझ से परे है।
हाल ही में राजधानी भोपाल में लगभग तीन दिन में नए आबकारी एसी विरेन्द्रसिंह धाकड़ की टीम ने (34) 2 के ऐसे कई प्रकरण दर्ज किए है जिसमें जिले के बाहर की ड्यूटी पैड शराब भोपाल में खपाई जा रही थी। जिसमें देवास और राजगढ़ मुख्य है। इसके पूर्व भी बैरसिया की लाइसेंसी दुकानों के निरीक्षण में अत्यधिक मात्रा में अवैध माल बरामद किया गया था, जिस पर कार्यवाही करते हुए 50000-50000 का जुर्माना लगाया गया है। इस वित्तीय वर्ष की आबकारी पॉलिसी बुफे में परोसे गए उस भोजन की तरह हो गई है जिसे चख तो सभी रहे है मगर पेट किसी का नहीं भर रहा। वैसे आबकारी में कुछ उदाहरण ऐसे भी है जहां ढाई ढाई साल से जमे अधिकारियों के पेट भी नहीं भर पाते।

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