गांव की प्रगति में महिलाएं निभा रही अहम भूमिका

विकास सचदेवा की ब्यूरो रिपोर्ट
खुषियों की दास्तॉ
– गांव की प्रगति में अब महिलाएं अहम भूमिका निभा रही हैं। महिला जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी ने यह सिद्ध कर दिया है कि वे किसी भी मायने में पुरुषों से कम नहीं हैं। पंचायत स्तर पर महिलाओं को 50 प्रतिषत का आरक्षण मिलने के बाद से उन्होंने नेतृत्व क्षमता, संगठन कुशलता और विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का परिचय दिया है। आज की महिला सरपंच केवल विकास योजनाओं का क्रियान्वयन ही नहीं कर रही, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता और महिला सशक्तिकरण जैसे अहम मुद्दों पर भी काम कर रही है। कई गांवों में महिला प्रधानों की अगुवाई में स्वच्छ भारत मिशन, जल संरक्षण और डिजिटल साक्षरता जैसे अभियान सफलतापूर्वक चलाए जा रहे हैं। शहडोल जिले के जनपद पंचायत बुढार के ग्राम पंचायत पकरिया की महिलाओं ने कार्यषैली का उदाहरण पेष किया है। ग्राम पंचायत पकरिया गांव जहां पर अधिकांश जनप्रतिनिधि महिलाएं हैं। यहां की सरपंच और उप सरपंच के साथ ही 13 महिलाएं भी पंच हैं। गांव की सारी व्यवस्थाएं इन महिला जनप्रतिनिधियों के हाथों में लेकर बेहतर ढंग से संचालन किया है। शासकीय योजनाओं से समाज सेवा के कार्य और कुप्रथाओं को रोकने की बात करें तो हर तरह से इन महिला प्रतिनिधियों ने अपनी छाप छोड़ी है। गेंद बाई बैगा जो महिला सरपंच हैं और वे उप सरपंच रेखा चौधरी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रही हैं। पंचायत में 13 अन्य महिलाएं हैं जो पंच की भूमिका निभा रही हैं। जल संरक्षण की बात हो या फिर स्वच्छता की, हर तरह से ये महिलाएं गांव में सार्थक पहल कर रही हैं। बाल विवाह और दागना जैसी कुप्रथाओं को दूर करने में इन्होंने काफी प्रयास किए हैं। वे गांव की महिलाओं से ही गौशाला का संचालन करना रही हैं। मध्याह्न भोजन जैसी व्यवस्था भी महिलाओं के हाथ में ही है। नल-जल योजना का काम भी महिलाएं ही कर रही। साथ ही 10 ग्राम पंचायत को मिलाकर एक सेक्टर तैयार किया गया है और सेक्टर का केंद्र पकरिया को बनाया गया है जहां विकास कार्याें को लेकर बैठके आयोजित की जाती है।

Subscribe to my channel
Comments are closed.