आंदोलनकारियों व भाजपा जिलाध्यक्ष की मांग एक मामला खसरा नंबर 72 का

शहडोल। किरन टाकीज के पास खसरा नंबर 72 में उपजा विवाद समाप्त होने का नाम ही नहीं ले रहा है लगातार लगभग 40 दिनों से अनशन की प्रक्रिया भी अनवरत जारी है। इसी बात को मद्देनजर रखते हुये अनुविभागीय अधिकारी सोहागपुर अरविंद शाह ने 9 अप्रैल 2025 को एक आदेश जारी किया जिसमें भुईबांध स्थित आराजी खसरा नं. 72 की पूर्ण जाँच एवं सीमांकन तथा वैध एवं अवैध कब्जा धारियों की स्थिति स्पष्ट किये जाने हेतु एसएलआर के नेतृत्व में टीम का गठन किया गया। जिसमें अधीक्षक भू-अभिलेख, राजस्व निरीक्षक नजूल राजेश वर्मा, राजस्व निरीक्षक सोहागपुर नं.2 सुजीत श्रीवास्तव, पटवारी हल्का नबलपुर पुष्पेंद्र मिश्रा, पटवारी हल्का चुनिया मयंक पटेल, पटवारी हल्का शहडोल विजय विश्वकर्मा को नियुक्त किया गया था। गौरतलब है कि कलेक्टर के पत्र क्रं. 05 मार्च 2025 के माध्यम से यह लेख किया गया कि श्रीमती अमिता चपरा भाजपा जिलाध्यक्ष द्वारा प्रस्तुत आवेदन पत्र के साथ सहपत्र संलग्र कर सामाजिक छवि धूमिल करने की साजिश पर यथोचित कार्यवाही किये जाने का उल्लेख किया गया था। साथ ही भुईबांध की भूमि खसरा नं. 72 की पूर्ण जाँच एवं सीमांकन तथा वैध एवं अवैध कब्जाधारियों की स्थिति स्पष्ट करने तथा भाजपा की छवि खराब करने वाले दोषियों के खिलाफ कार्यवाही किये जाने का अनुरोध किया गया था। कलेक्टर द्वारा इस पत्र पर निम्रलिखित बिंदुओं के संदर्भ में दलगठित कर सीमांकन एवं नियमानुसार कार्यवाही किये जाने के निर्देश दिये गये। गौरतलब है कि खसरा नं. 72/1/1 से लेकर 72/13/2 में कुल 2 एकड़ 1853 हेक्टेयर यानि 5.39 एकड़ जमीन का मामला सामने आया। जिसमें 2 एकड़ 65 डिसमिल जमीनें मध्यप्रदेश शासन की रही और 2 एकड़ 74 डिसमिल 18 भूमि स्वामियों के नाम दर्ज है और वो काबिज हैं। उक्त 18 भूमि स्वामियों में शांति चपरा वगैरह तथा मूलचंद्र राय पिता हुकूमत राय, मुंडा पिता गहनू कहार, सिंधी समाज तेज बहादुर सिंह पिता रामनारायण सिंह, बी.एस. बम्हानी, जगजीवन दास पिता मि_ूलाल जायसवाल, अजय कुमार पिता हीरालाल आसवानी, मध्यप्रदेश शासन, कुलदीप निगम पिता सुरेश चंद्र निगम, बीनू उर्फ रीनू पति स्व.दिलीप कुमार निगम, संजीव प्रताप सिंह, शिवेंद्र प्रताप सिंह पिता आर.एस.सिंह, विजय कुमार जसवानी पिता छंगामल जसवानी, अशोक लाहोरानी, यशपाल लाहोरानी, किशोर लाहोरानी पिता परमानंद लाहोरानी, अनिल सनपाल पिता दौलतराम सनपाल, मध्यप्रदेश शासन, राजेंद्र संतोष, अंजना पिता स्व.बोडई केवट, रीना मांझी पति मोहनलाल केवट शामिल हैं। गौरतलब है कि जिस पूरी जमीन में तीन जमीनें म.प्र. शासन के नाम से दर्ज हैं जिसमें मुख्य रूप से सड़क और 21 अवैध कब्जाधारी। ज्ञातव्य हो कि इस 72 नं. जमीन के विवाद में पर्दे के पीछे कुछ भाजपा के नेता ही खेल खेलने का काम कर रहे हैं।
राजनीति से ही राजनीति का हो रहा प्रहार.?
प्राप्त सूत्रों के अनुसार कुछ नेता जिन्होंने शहडोल भाजपाध्यक्ष बनने का प्रयास किया था उन्हीं में से कुछ लोग अपरोक्ष रूप से महिला नेत्री का विरोध कर सड़यंत्र रच समाज व भारतीय जनता पार्टी में छबी धूमिल करने का प्रयास कर रहे है.?
पट्टा एक स्थान का ओर कब्जा दो जगहों पर
महत्वपूर्ण विषय है की खसरा क्रं. 72 में कुछ ऐसे लोग भी काबिज हैं जिन्होने पट्टा तो एक मकान का लिया है, लेकिन दो-दो जगह काबिज हैं तो प्रशासन ने अब तक अवैध कब्जेधारियों को खसरा क्रं. 72 से बाहर कर जमीन को अतिक्रमण मुक्त क्यों नहीं किया.?
आंदोलनकारियों व भाजपा जिलाध्यक्ष की मांगें ओर शिकायत एक
आश्चर्यजनक विषय है कि एक तरफ आंदोलनकारियों की मांग है की खसरा क्रं.72 में गड़बड़ी हुई है जांच कर अतिशीघ्र कार्यवाही होनी चाहिए। अचंभा इस बात का है आंदोलनकारियों के मांग के पक्ष में ही संबंधित विषय पर शिकायत व मांग भाजपा जिलाध्यक्ष अमीता चपरा ने जिला कलेक्टर से की है। आंदोलनकारियों व भाजपा जिलाध्यक्ष दोनों की शिकायते व मांग जब एक ही है तो शहडोल कलेक्टर कार्यवाही क्यों नहीं कर रहे हैं जबकि जांच प्रतिवेदन माननीय कलेक्टर साहब की बैंच में प्रस्तुत किया जा चुका है यह एक महत्वपूर्ण प्रश्न है। वास्तविकता में अगर खसरा क्रं. 72 पर प्रशासन की कार्यवाही हुई तो उक्त भूमि पर जो लोग अवैध कब्जाधारी हैं उन पर निस्संदेह कार्यवाही होगी।
बेबाक शक्ति न्यूज में आगे देखें खास खबर “खसरा नंबर 72 बना 72 हूरें“

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