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शहडोल को रेलवे का मंडल कार्यालय (DRM Office) बनाकर ट्रेनों के कोच बनाए जाने की फैक्ट्री स्थापित की जाए:मनीष श्रीवास्तव

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शहडोल। मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी विधि विभाग के प्रदेश उपाध्यक्ष- मनीष श्रीवास्तव में बताया कि शहडोल रेलवे स्टेशन 1891 में बनाया गया था और विगत 40 वर्षों से रेलवे का उपमंडल (सबडिवीजन) है, शहडोल रेलवे का प्रमुख कोल फील्ड एरिया है, पूरे जोन में सर्वाधिक 100 करोड़ से अधिक का कोयला प्रतिदिन शहडोल संभाग से जिसको रेलवे CIC Area भी कहा जाता है, यहीं से मालगाड़ियों के माध्यम से ट्रांसपोर्ट होता है।

मनीष श्रीवास्तव ने बताया कि,शहडोल उपमंडल (सबडिवीजन) पहले दक्षिण पूर्व रेलवे SER में था जिसका जोन मुख्यालय कोलकाता में था पर अब दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे SECR बनने के बाद इसका जोन मुख्यालय बिलासपुर हो गया है, सबसे आश्चर्यजनक बात तो यह है कि शहडोल और रायपुर दोनों ही उपमंडल (सबडिवीजन) कार्यालय थे लेकिन बिलासपुर से मात्र 115 किलोमीटर दूर स्थित रायपुर को मंड़ल कार्यालय (डिवीजन कार्यालय) DRM Office बना दिया गया जबकि शहडोल बिलासपुर से 211 किलोमीटर की दूरी पर था साथ ही रेलवे CIC Area में सबसे ज्यादा लाभ देने वाला क्षेत्र है उसके बाद भी पक्षपात पूर्ण रवैया अपना कर राजनीतिक लाभ के लिए रायपुर को डिवीजन कार्यालय (DRM office) बना दिया गया।

उन्होंने बताया कि,देश में रेलवे के कुल 19 जोन और 70 मंडल कार्यालय हैं, जबकि शहडोल की आवश्यकता और जरूरत थी मंडल कार्यालय बनने की बिलासपुर जोन के साथ ही शहडोल को भी मंडल कार्यालय बना दिया जाना चाहिए था।


मनीष श्रीवास्तव ने कहा कि इसी तरह शहडोल में आज तक कोई भी रेलवे से संबंधित उद्योग भी नहीं लगाया गया जबकि जोन में बिलासपुर के बाद सबसे बड़ा एरिया (जमीन) शहडोल रेलवे के पास उपलब्ध है शहडोल में ट्रेनों के डिब्बे कोच बनाए जाने की फैक्ट्री लगाया जाना चाहिए, देश में ट्रेनों के डिब्बे (कोच) चेन्नई में इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF), कपूरथला में रेल कोच फैक्ट्री (RCF), और रायबरेली में मॉडर्न कोच फैक्ट्री (MCF) में बनते हैं। भारतीय रेलवे के पास देश भर में कई कारखाने और कार्यशालाएं हैं जो कोच और बोगियां बनाती हैं।

मनीष श्रीवास्तव ने बताया कि शहडोल में रेलवे की जमीन का क्षेत्र बहुत अधिक है साथ ही रेलवे कोच फैक्ट्री के लिए लगने वाले इस्पात (लोहे) की फैक्ट्रियां भी शहडोल से बहुत पास है, भिलाई स्टील प्लांट (BSP)यह स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) की एक प्रमुख इकाई है। भिलाई और शहडोल की दूरी मात्र 327 किलोमीटर है और रायगढ़ में भी दो प्रमुख इस्पात संयंत्र हैं:-जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड (JSPL) का संयंत्र और MSP स्टील एंड पावर लिमिटेड का संयंत्र, रायगढ़ और शहडोल की दूरी मात्र 324 किलोमीटर है। जिससे कि कोच फैक्ट्री के लिए सम्बंधित लोह अयस्क मिल पाना आसान और सुलभ होगा।

मनीष श्रीवास्तव ने कहा कि शहडोल को अवश्य रेलवे का मंडल कार्यालय बनाया जा सकता है और साथ ही ट्रेनों के डब्बा कोच बनाए जाने की फैक्ट्री स्थापित की जा सकती है जिससे संभाग में रोजगार और व्यवसाय की बहुत ही अच्छे अवसर उपलब्ध हो सकेंगे।अब तक ऐसा न हो पाना क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों के कारण है क्योंकि, वास्तविक जनप्रतिनिधि माने जाते हैं विधायक और सांसद लेकिन शहडोल संभाग के विधायकों और सांसद जिनकी अकर्यमन्यता,अकक्षमता और अरुचि के कारण शहडोल जिला और पूरा संभाग आज दूसरे अन्य जिलों और संभागों से बहुत पीछे चल रहा है जबकि यहां असीमित संभावनाएं,उपलब्धता और  साधन हैं।।

मनीष श्रीवास्तव ने विशेष रूप से बताया कि मनमोहन सिंह सरकार में हम सब कांग्रेस जनों ने तत्कालीन केंद्रीय मंत्री और मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ जी के माध्यम से शहडोल संभाग के रेल संबंधी विकास के लिए शहडोल से ब्योहारी रेलवे लाइन शहडोल डीआरएम कार्यालय और रेलवे कोच फैक्ट्री हेतु प्रयास किया था, जिसमें प्रारंभिक तौर पर सर्वे व अन्य संबंधित कार्य भी शुरू हो गए थे, लेकिन बीजेपी मोदी सरकार आते ही जैसे देश के एकमात्र आदिवासी संभाग शहडोल को देश में सबसे पीछे धकेल कर इसके विकास की गति को रोक दिया गया है, जिसके लिए जिम्मेदार शहडोल शहर के भाजपाइयों से लेकर केंद्र की भाजपा सरकार जिम्मेदार है।।

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