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छोटे गांव से बड़े सपने तक, मिनी ब्राजील विचारपुर गांव की बेटियों की उड़ान
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विकास सचदेवा की ब्यूरो रिपोर्ट


मणिपुर के नेशनल गेम्स में दिखेगा शहडोल की बेटियों का जज्बा
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मिनी ब्राजील के नाम से विख्यात जिले का छोटा सा गांव विचारपुर आज अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर फुटबाल खेल की वजह से पहचाना जा रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के द्वारा मन की बात कार्यक्रम मेें मिनी ब्राजील विचारपुर का जिक्र 03 बार किया गया है।
सीमित संसाधन के बावजूद मजबूत इरादों के साथ मिनी ब्राजील बिचारपुर में फुटबाल खेल की नर्सरी तैयार हो रही है। नियमित प्रशिक्षण लगातार अभ्यास और अनुशासन तथा मजबूत हौसलों से खिलाड़ियों को सफलता मिल रही है। विचारपुर गांव की तीन बेटियों ने राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचकर पूरे जिले और प्रदेश को गर्व महसूस कराया है।
सुहानी कोल, सपना गुप्ता और पूनम बैगा का चयन मध्य प्रदेश अंडर-19 गर्ल्स फुटबॉल टीम में हुआ है, जो 23 से 28 जनवरी तक मणिपुर में होने वाले नेशनल गेम्स में राज्य का प्रतिनिधित्व करेंगी।
इन खिलाड़ियों की इस सफलता के पीछे विचारपुर गांव में संचालित सब-फीडर सेंटर और कोच लक्ष्मी सहीस का बड़ा योगदान है। लक्ष्मी सहीस लंबे समय से गांव में रहकर बालिकाओं को फुटबॉल का प्रशिक्षण दे रही हैं और उनके आत्मविश्वास को मजबूत कर रही हैं।
विदिशा से मणिपुर तक का सफर
कोच लक्ष्मी सहीस ने बताया कि 17 से 20 जनवरी तक विदिशा में प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया है। इसके बाद 20 जनवरी को टीम मणिपुर के लिए रवाना होगी, जहां 23 से 28 जनवरी तक अंडर-19 स्कूल नेशनल गेम्स खेले जाएंगे।
अंडर-19 स्कूल नेशनल गेम्स में चयनित खिलाड़ियों की संघर्ष और उपलब्धि
सुहानी कोल (गोलकीपर), उम्र मात्र 16 वर्ष, यह उनका पांचवां नेशनल टूर्नामेंट होगा। सुहानी जर्मनी में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेल चुकी हैं और लगातार नई ऊंचाइयों को छू रही हैं।
कक्षा 11वीं की छात्रा सपना गुप्ता (डिफेंडर) उम्र 18 वर्ष हैं, अब तक तीन नेशनल खेल चुकी हैं।
पूनम बैगा (स्ट्राइकर),17 वर्ष की पूनम का यह पहला नेशनल है, लेकिन आत्मविश्वास और मेहनत के दम पर वह पूरी तरह तैयार हैं।
गांव की बेटियां, प्रदेश की पहचान
विचारपुर की इन बेटियों की सफलता यह साबित करती है कि अगर सही प्रशिक्षण और मार्गदर्शन मिले, तो गांव की बेटियां भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपना नाम रोशन कर सकती हैं।
आज ये बेटियां सिर्फ खिलाड़ी नहीं हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ी के लिए उम्मीद, हौसले और सफलता की कहानी हैं।

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