जन्म मृत्यु पंजीयन एवं विवाह पंजीयन का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के कलेक्टर ने दिए निर्देश
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विकास सचदेवा की ब्यूरो रिपोर्ट
– कलेक्टर डॉ. केदार सिंह ने जिले में जन्म, मृत्यु एवं विवाह पंजीयन का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश जिले के जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों, मुख्य नगरपालिका अधिकारियों, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी तथा खण्ड चिकित्सा अधिकारियों को दिए हैं।
जन्म-मृत्यु एवं विवाह का पंजीयन कराना प्रत्येक नागरिक का कानूनी दायित्व है। जन्म एवं मृत्यु का पंजीयन निर्धारित समय सीमा के भीतर कराया जाना अनिवार्य है, जिससे नागरिकों को शासन की विभिन्न योजनाओं, प्रमाण-पत्रों एवं अन्य सुविधाओं का लाभ मिल सके।
जन्म प्रमाण-पत्र शैक्षणिक प्रवेश, आधार कार्ड, पासपोर्ट, पेंशन, उत्तराधिकार सहित अनेक महत्वपूर्ण कार्यों के लिए आवश्यक दस्तावेज है। वहीं मृत्यु प्रमाण-पत्र संपत्ति हस्तांतरण, बीमा दावा, बैंक संबंधी कार्य एवं अन्य कानूनी प्रक्रियाओं के लिए जरूरी होता है। इसी प्रकार विवाह पंजीयन पति-पत्नी के वैधानिक अधिकारों की सुरक्षा एवं विभिन्न शासकीय कार्यों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
जन्म, मृत्यु एवं विवाह से संबंधित घटनाओं का पंजीयन निर्धारित समयावधि में अनिवार्य रूप से संबंधित पंजीयन कार्यालय, नगर निकाय अथवा ग्राम पंचायत में कराएं। निर्धारित समय सीमा के बाद पंजीयन कराने पर नियमानुसार विलंब शुल्क देय हो सकता है।
उन्होंने निर्देश दिया है कि दीवार लेखन के माध्यम से जन्म पंजीकरण के लिए जन्म आपका हक, पंजीकरण जरूरी है। जन्म प्रमाण पत्र बच्चे का पहला अधिकार सुरक्षित भविष्य की पहली पुकार, जीवन की शुरूआत, पंजीकरण के साथ। इसी तरह मृत्यु पंजीकरण के लिए अंतिम यात्रा का हो सम्मान, मृत्यु का हो सही प्रमाण, जो चले गए उनकी यादें खास, पंजीकरण है परिवार का विश्वास। मृत्यु के बाद भी परिवार का साथ पंजीकरण है कानूनी बात। जन्म और मृत्यु दोनो के लिए जन्म हो या मृत्यु, पहचान जरूरी रिकार्ड हो सही तभी बात बने पूरी। जीवन और मृत्यु दोनों का हो हिसाब यही है हमारा कर्तव्य और जवाब, पंजीकरण है एक जिम्मेदारी देश के विकास की सच्ची तैयारी। प्रेरक और भावनात्मक नारे जन्म का प्रमाण जीवन का आधार, मृत्यु का प्रमाण परिवार का आधार, पंजीकरण कराएं, भविष्य सुरक्षित बनाएं। हर जन्म और मृत्यु का हो लेखा यही है देश की सच्ची रेखा। विवाह पंजीयन के लिए विवाह का आठवां वचन विवाह का हो पंजीयन, नारी का है सम्मान जब हो उसके विवाह का प्रमाण, खुश हो दूल्हा, खुश हो दुल्हन जब हो शादी का हो अनिवार्य पंजीयन।

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