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*चेक अनादरण एन. आई. एक्ट 138 विशेष लोक अदालत का सफल आयोजन कुल  23  प्रकरणों का हुआ निराकरण*

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विकास सचदेव की ब्यूरो रिपोर्ट



– म.प्र. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर के निर्देशानुसार एवं माननीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश/अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण शहडोल श्री काशीनाथ सिंह  के कुशल मार्गदर्शन एवं द्वितीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री के.पी सिंह अध्यक्षता में आज चेक अनादरण एन. आई. एक्ट 138 विशेष लोक अदालत का आयोजन जिला न्यायालय शहडोल एवं सिविल न्यायालय ब्यौहारी, बुढ़ार तथा जयसिंहनगर में किया गया। जिला शहडोल में चेक अनादरण एन. आई. एक्ट 138 विशेष लोक के निराकरण हेतु जिला न्यायालय शहडोल एवं सिविल न्यायालय ब्योहारी बुढ़ार तथा जयसिंहनगर में कुल 7 न्यायिक खण्डपीठों का गठन किया गया जिसमें, जिला न्यायालय शहडोल में 2 खंडपीठ, तहसील न्यायालय ब्यौहारी में 2 खंडपीठ, तहसील न्यायालय बुढ़ार में 2 खंडपीठ एवं तहसील न्यायालय जयसिंहनगर में 1 खंडपीठ गठित किए गए है।
          चेक अनादरण एन. आई. एक्ट 138 विशेष लोक अदालत का एवं  शुभारंभ माननीय द्वितीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री के.पी सिंह महोदय द्वारा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यालय में मां सरस्वती के छायाचित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्जवलन कर किया गया। उपरांत उनके द्वारा चेक अनादरण एन. आई. एक्ट 138 विशेष लोक अदालत से होने वाले लाभ के संबंध में विस्तार से जानकारी देते हुए व्यक्त किया गया कि लोक अदालत में राजीनामा के माध्यम से प्रकरण समाप्त कराये जाने पर दोनों पक्षों की जीत होती है एवं उनका मुकदमा पूर्ण रूप से समाप्त हो जाता है जिसकी अपील भी नहीं होती। इसके अलावा पक्षकारों द्वारा वाद शुल्क की वापसी हो जाती है। इस लोक अदालत में अधिक से अधिक प्रकरणों का राजीनामा के माध्यम से निराकरण कराकर उक्त कार्यक्रम को सफल बनावें।

       इस अवसर पर  न्यायिक मजिस्ट्रेट श्री सीता शरण यादव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव श्रीमती स्वेता परते तिवारी , जिला विधिक सहायता अधिकारी श्री देवेन्द्र सिंह परस्ते, डिप्टी चीफ लीगल एड डिफेंस काउंसिल श्री इमरान खान समस्त लीगल एड डिफेंस काउंसिल्स, न्यायालय के कर्मचारीगण जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के समस्त कर्मचारीगण उपस्थित रहे।
         इस चेक अनादरण एन. आई. एक्ट 138 विशेष लोक  अदालत में कुल 21 लंबित एवं 2 प्रीलिटिगेशन प्रकरण इस प्रकार कुल 23 प्रकरणों  का निराकरण हुआ जिसमें कुल 10317419/- राशि का अवार्ड पारित हुआ।

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