सफलता की कहानी
स्व सहायता समूह से जुड़कर अशोका सिंह बनीं आत्मनिर्भर, स्वरोजगार से संवार रहीं परिवार का भविष्य

विकास सचदेव की ब्यूरो रिपोर्ट
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राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से स्व सहायता समूहों से जुड़कर जिले की अनेक महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव आ रहा है। शहडोल जिले की अशोका सिंह इसकी प्रेरणादायी मिसाल हैं, जिन्होंने समूह से जुड़कर आर्थिक आत्मनिर्भरता हासिल की और आज सफल स्वरोजगार संचालित कर रही हैं।
अनुसूचित जाति परिवार में जन्मी अशोका सिंह ने स्नातक तक शिक्षा प्राप्त की। विवाह के पश्चात परिवार की आजीविका मुख्य रूप से खेती पर निर्भर थी। सीमित आय के कारण परिवार को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। वर्ष 2015 में उन्होंने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत स्व सहायता समूह की सदस्यता ग्रहण की और यहीं से उनके जीवन में परिवर्तन की नई शुरुआत हुई।
समूह से जुड़ने के बाद अशोका सिंह ने ग्राम संगठन, संकुल संगठन, बुक कीपिंग, सोशल मोबिलाइजेशन एवं माइक्रो क्रेडिट प्लान (एमसीपी) सहित विभिन्न विषयों का प्रशिक्षण प्राप्त किया। वर्तमान में वे बैंक सखी के रूप में कार्य करते हुए समूह की महिलाओं को बैंकिंग सेवाओं एवं वित्तीय गतिविधियों में सहयोग प्रदान कर रही हैं।
अशोका सिंह ने समूह से प्राप्त ऋण के माध्यम से उन्नत कृषि कार्य प्रारंभ किया। इसके बाद मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के अंतर्गत सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, बरकोड़ा शाखा से दो लाख रुपये का ऋण प्राप्त कर एमपी ऑनलाइन एवं डीजीपे सेवा केंद्र स्थापित किया। वर्तमान में वे इस व्यवसाय से प्रतिमाह लगभग 26 हजार रुपये की आय अर्जित कर रही हैं। साथ ही उत्पादक समूह के माध्यम से भी अतिरिक्त आय प्राप्त कर रही हैं।
उन्होंने अपने व्यवसाय के विस्तार के लिए स्व सहायता समूह से 50 हजार रुपये का ऋण भी प्राप्त किया, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई तथा बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने में सहायता मिली।
अशोका सिंह का कहना है कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ने के बाद उन्हें आर्थिक आत्मनिर्भरता के साथ समाज में सम्मानजनक पहचान भी मिली है। उनकी सफलता अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत है तथा यह दर्शाती है कि स्व सहायता समूहों के माध्यम से महिलाएं आत्मनिर्भर बनकर परिवार एवं समाज के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं।

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