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“जयसिंहनगर विधायक निधि घोटाला” 61 लाख के ‘आउटडोर जिम’ बने कबाड़, बिना तकनीकी मूल्यांकन के डकार ली पूरी राशि

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प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार की खुली पोल, आरटीआई दस्तावेजों ने बेनकाब किया कारनामा

स्थानीय संपादक अखिलेश कुमार शर्मा मो नंबर 7999140850

शहडोल। जिले के जयसिंहनगर विधानसभा क्षेत्र की विधायक श्रीमती मनीषा सिंह के क्षेत्र में स्वीकृत विकास कार्यों की वास्तविक तस्वीर अब भ्रष्टाचार, घोर लापरवाही और प्रशासनिक मिलीभगत के गहरे गर्त में समा चुकी है। सूचना का अधिकार (RTI) के तहत सामने आए दस्तावेजों ने विधायक निधि से कराए गए कार्यों की निगरानी, गुणवत्ता और भुगतान प्रक्रिया पर बेहद गंभीर और बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।यह पूरा मामला विधानसभा क्षेत्र में स्थापित किए गए आउटडोर व्यायाम शाला (जिम) से जुड़ा है, जिसके लिए विधायक द्वारा अनुशंसा की गई थी, लेकिन मैदानी स्तर पर यह योजना जनता के स्वास्थ्य की बजाय भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती नजर आ रही है।

“61 लाख का खेल”कागजों पर जिम, जमीन पर कबाड़

विधायक श्रीमती मनीषा सिंह द्वारा वर्ष 2025-26 की विधायक क्षेत्र विकास निधि के अंतर्गत जनमानस के स्वास्थ्य सुधार हेतु आउटडोर जिम खोले जाने की अनुशंसा की गई थी। दस्तावेजों के मुताबिक, इसके क्रियान्वयन की एजेंसी जिला प्रबंधक, एम.पी. एग्रो कॉर्पोरेशन लिमिटेड, जिला शहडोल को बनाया गया था।जयसिंहनगर (नगर परिषद) यहाँ 19 नग जिम आइटम स्थापित करने के नाम पर ₹12,31 ,13 3.00 की राशि स्वीकृत की गई। जनपद पंचायत गोहपारू के ग्राम पंचायत खन्नौधी में 19 नग उपकरणों के लिए ₹12,31,133.00 का प्राक्कलन तैयार किया गया।इसी प्रकार जनपद पंचायत गोहपारू के ग्राम पंचायत चुहिरी में 19 नग जिम उपकरणों की स्थापना हेतु ₹12,31,133.00 स्वीकृत हुए। इसके अलावा शहडोल बाण गंगा और वार्ड क्र. 28 समेत कुल 5 स्थानों पर लगभग 61 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि का खेल खेला गया।

घोर लापरवाही और भ्रष्टाचार के मुख्य बिंदु

1.सबसे हैरानी की बात यह है कि इन तमाम स्थानों पर बेहद घटिया और दोयम दर्जे की जिम सामग्री स्थापित कराई गई, और बिना किसी प्रमाणित तकनीकी मूल्यांकन (Technical Valuation) के ही जिला योजना एवं सांख्यिकी कार्यालय द्वारा संबंधित एजेंसी को धड़ल्ले से पूरा भुगतान जारी कर दिया गया।

  1. प्रशासनिक स्वीकृति आदेश की शर्तों के अनुसार, सामग्री की स्थापना के पश्चात 2 वर्ष तक इसका रखरखाव संबंधित एजेंसी द्वारा किया जाना था तथा कार्य पूर्ण होने पर यूजर एजेंसी को हस्तांतरण अनिवार्य था। किंतु आज जमीनी हकीकत यह है कि तमाम स्थानों पर यह बेशकीमती सामग्री कबाड़ के रूप में अस्त-व्यस्त पड़ी हुई है।
  2. एयर वाइस वॉकर, लेग प्रेस, सर्फ, रोवर, क्रॉस ट्रेनर, मल्टी स्टेशन जैसे 19 विभिन्न आइटम्स के नाम पर प्रति स्थान 12.31 लाख रुपये से अधिक की राशि खर्च की गई, लेकिन वास्तविक आपूर्ति और गुणवत्ता मानकों में जमीन-आसमान का फर्क साफ नजर आता है।

“स्थानांतरण नियमों को ठेंगा” मलाईदार कुर्सियों पर जमे ‘साहब’एक साथ कई मलाईदार प्रभार

मध्य प्रदेश शासन के स्पष्ट और सख्त निर्देश हैं कि कोई भी अधिकारी एक ही जिले में 5 साल से अधिक समय तक पदस्थ नहीं रह सकता। वर्ष 2024 की तबादला सूची में कई अधिकारियों के पते बदले गए, लेकिन शहडोल के जिला योजना एवं सांख्यिकी अधिकारी पर इन प्रशासनिक नियमों का कोई असर नहीं हुआ।शहडोल जिले के साथ-साथ पड़ोसी जिले अनूपपुर का अतिरिक्त प्रभार और रीवा स्थित विंध्य विकास प्राधिकरण (VDA) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) का भारी-भरकम जिम्मा भी थमा दिया गया है।आखिर कौन सी ऐसी जादुई ताकतें या राजनीतिक ‘संरक्षण’ है, जिसके चलते शासन के सारे कायदे-कानून और तबादला नीति कागजी साबित हो रही है? यह स्थिति सीधे तौर पर प्रशासनिक भ्रष्टाचार और पक्षपात का प्रतीक बन चुकी है।

जयसिंहनगर विधायक के विधायक निधि और अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल

जयसिंहनगर विधायक के विधायक निधि में हुऐ भ्रष्टाचार का जिम्मेदार कौन। क्या इन तमाम आउटडोर जिम उपकरणों की गुणवत्ता का कोई प्रमाणित तकनीकी मूल्यांकन कराया गया।क्या भुगतान की गई राशि और वास्तविक मैदानी आपूर्ति का पूरा भौतिक मिलान किया गया। नियमानुसार 2 साल के रखरखाव के दावे हवा क्यों हो गए और उपकरण कबाड़ क्यों बन गए।क्या जिला योजना एवं सांख्यिकी कार्यालय और संबंधित निर्माण एजेंसियों की जवाबदेही तय होगी, या फिर हर बार की तरह फाइलें सरकारी दफ्तरों में ही दबी रह जाएंगी।
विधायक श्रीमती मनीषा सिंह के क्षेत्र में स्वीकृत इन तमाम विकास कार्यों की स्थलवार उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जाँच की जरूरत है क्या जयसिंहनगर विधायक श्रीमती मनीषा सिंह एवं कमिश्नर शहडोल तथा कलेक्टर शहडोल इस 61 लाख के ‘आउटडोर जिम’घोटाले की जांच करातें है या फिर विधायक निधि में यूं ही लाखों करोड़ों रुपए का भ्रष्टाचार चलता रहेगा। जनता की गाढ़ी कमाई को लूटने वालों पर आखिर कब शिकंजा कसा जाएगा।

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