(Rewa/Bhopal, MP Breaking) मप्र के कराधान घोटाले की अब तक कागजों पर हुई जांच – सूचना आयोग की सुनवाई में सच्चाई आई सामने, कागज गोल कर अधिकारी मार रहे मौज

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुनवाई के दौरान झलकियां
👉 तत्कालीन कलेक्टर ओम प्रकाश श्रीवास्तव के दोनो पत्र पर जांच न होना सिस्टम को संदेह के घेरे में रख दिया – सूचना आयुक्त राहुल सिंह
👉 जितने डीम्ड पीआईओ होंगे और उनकी जबाबदेही तय होगी सभी पर जुर्माने की होगी कार्यवाही – राहुल सिंह
👉 सवाल यह है कलेक्टर के आदेश पर साल भर जांच किसकी सह पर नही हुई – शिवानन्द द्विवेदी
👉 डीम्ड पीआईओ बने सीईओ के साथ सभी जनपद पीआईओ की भूमिका भी तय होगी – राहुल सिंह
👉 यदि अधिकारियों ने आयोग को गुमराह करने की कोशिश की तो शपथ पत्र पर देना होगा जबाब – राहुल सिंह
👉 यदि अधिकारी बचने का प्रयास कर गुमराह करते हैं तो जुर्माने के साथ जीएडी में होगी कार्यवाही, चढ़ेगा सीआर में – राहुल सिंह
👉 किसी भी जनपद में करारोपण की पात्रता और प्रक्रिया की जांच नहीं हुई – शिवानन्द द्विवेदी
👉 बीपीओ ने अलमारी बन्द कर चला गया छुट्टी पर इसलिए नही मिले कागज – सीईओ प्रदीप दुबे
👉 हमे 15 दिन का और दें समय, जांच कर दस्तावेज देंगे – सीईओ रायपुर कर्चुलियान प्रदीप दुबे
👉 हमने जानकारी सीईओ जिला पंचायत को भेज दी थी लेकिन कलेक्टर के पत्र का पता नही – सीईओ रीवा हरिश्चंद्र द्विवेदी
👉 शासन के कागज हैं इसलिए सीईओ जानकारी छुपा नहीं सकते, जानकारी देनी पड़ेगी – राहुल सिंह
👉 सभी 6 जनपद पंचायतों के पीआईओ को भी बनाया जाएगा डीम्ड पीआईओ, अगली सुनवाई जल्द – राहुल सिंह
👉 अब कुल 15 से अधिक होंगे डीम्ड पीआईओ
(रीवा/भोपाल) मप्र की 1148 पंचायतों में लगभग 300 करोड़ के कराधान घोटाले को लेकर सच्चाई सामने आ चुकी है। जी हां हम बात कर रहे हैं इस बहुचर्चित घोटाले की जिसमे रीवा जिले की भी 75 पंचायतें सम्मिलित थीं। तत्कालीन कलेक्टर रीवा ओम प्रकाश श्रीवास्तव द्वारा घोटाले की जांच को लेकर जनपद सीईओ स्तर की एक जांच के लिए सभी संबंधित 6 जनपदों गंगेव, हनुमना, जवा, रीवा, रायपुर कर्चुलियान एवं सिरमौर को पत्र क्रमांक 2495 एवं 2498 लिखा गया था। जिसके माध्यम से घोटाले कि जांच कराए जाने के लिए निर्देशित किया गया था। यह जांच रिपोर्ट कलेक्टर कार्यालय को 7 दिवश के भीतर सौंपनी थी लेकिन हुआ यह कि आज सितंबर 2019 से पूरे साल भर होने को हैं पर गंगेव की कुछ जांच के अतिरिक्त आजतक किसी भी 75 पंचायत की करारोपण और अपनाई गई प्रक्रिया की जांच नहीं हो पाई है।
आरटीआई से हुआ था भ्रष्टाचार का बड़ा खुलासा
मामले को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी द्वारा कलेक्टर कार्यालय में आरटीआई दायर की गई थी जिस पर पत्र को सीईओ जिला पंचायत पीआईओ को फारवर्ड कर डीम्ड पीआईओ बनाया गया था। इसके बाद डीम्ड पिआईओ जिला पंचायत रीवा द्वारा सीईओ जिला और समस्त 6 जनपद सीईओ को भी मामले में डीम्ड पीआईओ बनाया गया था। पर आधा दर्जन रिमाइंडर के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं कि गयी थी जिस पर द्वितीय अपील एवं धारा 18 के तहत शिकायत पर सूचना आयुक्त श्री राहुल सिंह द्वारा 13 अगस्त को व्हाट्सएप वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई रखी गयी थी।
सुनवाई में सच्चाई आई सामने – मठाधीश की तरह कुंडली मार बैठे हैं अधिकारी, नही हुई कोई जांच अब सबसे बड़ा मुद्दा यह है कि तत्कालीन रीवा कलेक्टर ओम प्रकाश श्रीवास्तव ने जो दोनो पत्र 2495 एवं 2498 जारी कर करारोपण एवं कराधान की की जांच रिपोर्ट 7 दिन में भीतर सौंपने के लिए कहा था वह जांच एक वर्ष पूरे होने को हैं और नही हो पाई।
स्वाभाविक है कि कलेक्टर जैसी जिले की पावरफुल सीट पर बैठा दंडाधिकारी भी जांच नहीं करवा पाया तो इसका क्या मतलब है? जाहिर है कि कलेक्टर स्वयं ही नही चाहा कि यह जांच कभी पूरी हो। शायद ओम प्रकाश श्रीवास्तव ने भी नही चाहा और न ही उनके बाद के किसी कलेक्टर ने चाहा। इस प्रकार दिनाँक 13 अगस्त की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुनवाई में यह बात स्पष्ट हो गयी कि पूरा सिस्टम कराधान के भ्रष्टाचार में संलिप्त है। अब इस पूरी कड़ी में कौन कौन अधिकारी और जनप्रतिनिधि मिले हैं यह कह पाना मुश्किल है। किसकी सह पर अन्य जनपदों की रोंकी गई जांच? – शिवानन्द द्विवेदी
आज सबसे बड़ा सवाल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में सभी संबंधित सीईओ कब जबाब में यह सामने आया कि आखिर हनुमना जनपद सहित अन्य जनपदों में किसकी सह से कराधान घोटाले की जांच को रोका गया? ज्ञातव्य हो कि कराधान घोटाले की मात्र आंशिक जांच गंगेव जनपद की हुई है जिसमे संभागीय आयुक्त और सीईओ जिला द्वारा अलग अलग टीम गठित कर जांच करवाई गई थी और करोड़ों का भ्रष्टाचार सामने आया था। शेष अन्य जनपदों की कोई जांच नहीं हुई।
सूचना आयोग पूरे प्रकरण की बारीकी से करेगा जांच – राहुल सिंह
यद्यपि दिनांक 13 अगस्त की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुनवाई में उपस्थित जनपद के सीईओ द्वारा अपने पक्षों को रखा गया और बचने के हर सम्भव प्रयास भी किया गया जिसमें हर किसी ने ट्रांसफर, बीमारी, प्रभार आदि का जिक्र किया लेकिन कई सीईओ की एक न चली। सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने बड़ी सख्ती से स्पष्ट किया कि यदि जानकारी छुपाने का प्रयास किया गया अथवा भ्रमित किया गया तो सभी डीम्ड पीआईओ को शपथ पत्र में जबाब देना पड़ेगा।
सीईओ प्रदीप दुबे और हरिश्चंद्र द्विवेदी ने गुमराह करने का किया प्रयास
रीवा जनपद के सीईओ हरिश्चंद्र द्विवेदी और रायपुर कर्चुलियान के सीईओ प्रदीप दुबे ने बातों में उलझाने का भी प्रयास किया जिसमें पहले रीवा जनपद सीईओ ने कहा कि जानकारी भेज दी गयी है फिर बाद में कहा कि हमे कलेक्टर के पत्र का पता ही नही। वहीं रायपुर कर्चुलियान जनपद के सीईओ प्रदीप दुबे ने कहा कि उन्होंने 2 जून को पद्भार लिया है इसलिए कोई जानकारी नही मिल पाई है और उन्हें 15 दिन का समय चाहिए। प्रदीप दुबे ने बताया कि बीपीओ की आलमारी में कागज रखे थे लेकिन मिल नहीं रहे और बीपीओ हार्ट मरीज है इसलिए छुट्टी में है। इस बीच सूचना आयुक्त ने जाना चाहा की उनके पहले रायपुर कर्चुलियान में कौन पदस्थ था जिस पर तत्कालीन सीईओ बलवान सिंह का नाम सामने आया। हनुमना के तत्कालीन सीईओ का नाम मुंगाराम मेहरा बताया गया।
डीम्ड पीआईओ जो भी हों कार्यवाही सुनिश्चित होगी – राहुल सिंह
इस बीच सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने कहा कि कलेक्टर कार्यालय से पीआईओ द्वारा सभी संबंधित डीम्ड पिआईओ को पत्र जारी किया गया अतः जितने भी डीम्ड पीआईओ होंगे और दोषी पाए जाएंगे बख्से नही जाएंगे। आयुक्त श्री सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि कलेक्टर के पत्र पर जांच रिपोर्ट 7 दिवस के भीतर सौंपी जानी थी लेकिन साल भर तक जांच न किया जाना और आरटीआई का जबाब न दिया जाना कानून के घोर अवहेलना की श्रेणी में आता है इसलिए दोषियों पर दंडात्मक कार्यवाही की जाएगी जिसमें जुर्माना भी सम्मिलित है।
यदि झूँठ बोलने का प्रयास हुआ तो शपथ पत्र पर देनी होगी सूचना, जीएडी को जारी होगा पत्र, खराब होगा सीआर – राहुल सिंह
सुनवाई के दौरान गंगेव के प्रभारी सीईओ अजित तिवारी द्वारा कुछ बातें स्पष्ट नही बताई गईं जिससे सूचना आयुक्त ने नाराजगी जाहिर की और कहा कि यदि कोई भी अधिकारी जानकारी छुपाने का प्रयास करता है और जानकारी नही देता अथवा भ्रम की स्थिति पैदा करता है तो इस पर कार्यवाही की जाएगी साथ मे सम्बंधित डीम्ड पीआईओ को शपथ पत्र में जबाब देना पड़ेगा। आयुक्त श्री सिंह ने आगे कहा कि फाइन लगाने के बाद जीएडी को भी लिखा जाएगा और जुर्माने और दंड की कार्यवाही को सम्बंधित अधिकारियों के सीआर में दर्ज करवाने के निर्देश दिए जाएंगे।
6 जनपदों के पीआईओ भी बनेंगे डीम्ड पीआईओ, जल्द होगी अगली सुनवाई – राहुल सिंह
सुनवाई के बाद यह भी बात सामने आई कि जिला पंचायत सीईओ के पत्र के बाद जहाँ सभी 6 जनपदों के सीईओ डीम्ड पीआईओ बन गए हैं वहीं उन सभी 6 जनपदों के पीआईओ भी डीम्ड पीआईओ होंगे जिनके लिए नोटिस जारी की जाएगी और उन्हें भी अगली सुनवाई में पेश होना पड़ेगा। ज्ञातत्व हो कि पूरे मामले में जितना रोल डीम्ड पीआईओ बने हुए सीईओ का है उतना ही रोल सभी 6 जनपदों के पीआईओ का है जिन्हें इस मामले में अब डीम्ड पीआईओ माना जायेगा। इस विषय मे अगली सुनवाई जल्द ही आयोजित की जाएगी।
बाबुओं ने बताया गलत नंबर, सभी सीईओ से नहीं हो पाया संपर्क
दिनाँक 13 अगस्त को हुई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग व्हाट्सएप सुनवाई में एक बात जो सामने आई उसमे पता चला कि सूचना आयुक्त को सभी सीईओ की न तो सही जानकारी दी गयी थी और न ही उनके मोबाइल व्हाट्सएप नंबर सही थे जिसकी वजह से कुछ सीईओ का संपर्क नहीं हो पाया। इस पर सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने जिला कलेक्टर कार्यालय में पदस्थ अधीक्षक रमेश श्रीवास्तव की निंदा की जिनके द्वारा यह गलत जानकारी उपलब्ध करवाई गई थी और भविष्य में कर्तव्यों के प्रति सतर्क रहने की बात कही।

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