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(Rewa/Bhopal, MP Breaking) आरटीआई की धारा 10 में पृथक्करणीयता पर आयोजित हुआ 9 वां वेबीनार, सूचना आयुक्त राहुल सिंह की अध्यक्षता में आयोजित हुआ कार्यक्रम, पचासों जिज्ञासुओं ने ज़ूम मीटिंग में लिया हिस्सा, महिती अधिकार मंच मुंबई के भास्कर प्रभु एवं पूर्व मप्र सूचना आयुक्त आत्मदीप रहे विशिष्ट अतिथि

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   (शिवानन्द द्विवेदी)
      एक तरफ जहां मध्य प्रदेश सूचना आयोग में फेसबुक के माध्यम से आयोग की सुनवाई आम जनता तक सूचना आयुक्त श्री राहुल सिंह द्वारा पहुंचाई जा रही है वहीं दूसरी तरफ एक अरसे से चल रही जो मीटिंग वेबीनार के आयोजन का इस रविवार 23 अगस्त 2020 को 9 वां सेशन रहा। परंपरागत रूप से हर रविवार को सुबह 11:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक आयोजित होने वाले इस जूम मीटिंग वेबीनार में कार्यक्रम के अध्यक्ष मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयुक्त श्री राहुल सिंह रहे जबकि कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि माहिती अधिकार मंच मुंबई के अध्यक्ष श्री भास्कर प्रभु एवं पूर्वक मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयुक्त श्री आत्मदीप रहे। कार्यक्रम का संयोजन एवं प्रबंधन एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी द्वारा किया गया।
मानसून सत्र की 9वीं जूम मीटिंग वेबीनार का हुआ सफल आयोजन
     इस बीच रविवार 23 अगस्त को इस मानसून सत्र की नवमी ज़ूम मीटिंग वेबीनार का आयोजन किया गया जिसमें प्रमुख वक्ता के साथ दर्जनों जिज्ञासुओं ने भाग लिया और अपनी समस्या का समाधान पाया। कार्यक्रम में सम्मिलित होने वाले लोगों में से मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, नई दिल्ली, उत्तर प्रदेश, झारखंड, उत्तराखंड, बिहार, आंध्र प्रदेश, उड़ीसा, असम आदि राज्यों से पार्टिसिपेंट्स उपस्थित हुए एवं अपनी व्यक्तिगत समस्याओं से लेकर विस्तृत राष्ट्रीय हित तक कि आरटीआई से जुड़ी हुई समस्याओं पर चर्चा की एवं विशेषज्ञों से समस्या का समाधान पाया।
आरटीआई की धारा 10 पृथक्करणीयता पर विस्तृत हुई चर्चा
    रविवार 23 अगस्त को सुबह 11:00 बजे से वेबीनार का आयोजन जूम मीटिंग क्लाउड एप के माध्यम से प्रारंभ हुआ जिसमें दर्जनों जिज्ञासुओं ने भाग लिया। इस बीच कार्यक्रम के अध्यक्ष एवं वर्तमान मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयुक्त श्री राहुल सिंह ने मीटिंग में अपने विचार रखते हुए बताया की धारा 8 एवं 9 में ही सिर्फ कुछ विशेष जानकारी न दिए जाने की छूट का प्रावधान है और उस पर भी कारण स्पष्ट बताया जाता है कि किस वजह से अपीलार्थी को जानकारी नहीं दी जा रही है। आयुक्त श्री सिंह ने कहा की धारा 10 के तहत आवेदक को चाहिए कि वह लोक सूचना अधिकारी को लिखें की धारा 8 अथवा 9 के तहत जो जानकारी छुपाए जाने का या न देने का प्रयास किया जा रहा है उसमें से कुछ विशेष जानकारी रोककर शेष देय जानकारी धारा 10 के अंतर्गत दी जाए। इस प्रकार श्री राहुल सिंह ने स्पष्ट किया कि सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 10 हमें वह टूल प्रोवाइड करती है जिसके तहत हम लोक सूचना अधिकारी से वांछित जानकारी प्राप्त कर सकते हैं जो धारा 8 एवं 9 की कुछ उपधाराओं 8(1)(एच)/(जे) के तहत न देना बाध्यता में नहीं आती।
रीवा जिले में पुलिस विभाग द्वारा गुंडा एक्ट के तहत कार्यवाही पर जानकारी न देना रहा चर्चा का विषय
         इस बीच आरटीआई की धारा 10 के विषय में चर्चा करते हुए सूचना आयुक्त श्री सिंह ने कहा कि पिछले कुछ महीने पूर्व रीवा जिले में कलेक्ट्रेट कार्यालय में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से द्वितीय अपील के लंबित प्रकरणों की सुनवाई आयोजित की गई थी जिसमें एक बुजुर्ग व्यक्ति ने बताया कि पुलिस विभाग द्वारा उन्हें गुंडा एक्ट में फंसा कर जानकारी नहीं दी जा रही है। श्री सिंह ने कहा कि हमने इस विषय में एसपी रीवा को पत्र लिखा और पूछा कि वह दस्तावेज जो आप धारा 8 की उपधाराओं के अंतर्गत नही देना बता रहे हैं हमें सीधे आयोग में बंद लिफाफे में भेजें। इस प्रकार जब जानकारी आयोग के समक्ष पुलिस विभाग द्वारा प्रस्तुत की गई तो पता चला कि पुलिस ने गलत ढंग से बुजुर्ग व्यक्ति को गुंडा एक्ट में फंसाया हुआ था एवं निगरानी में रखा था। गुंडा एक्ट में कार्यवाही के लिए जिले के पुलिस अधीक्षक द्वारा लिखा जाता है न की किसी थाना प्रभारी द्वारा। इस प्रकार पुलिस ने गलत ढंग से बुजुर्ग व्यक्ति को गुंडा एक्ट में फंसाया था जिसका पर्दाफाश सूचना के अधिकार के माध्यम से हुआ।
घर के अंदर का नक्शा न देकर शेष नक्शा सूचना के अधिकार के तहत दिया जा सकता है-  सूचना आयुक्त राहुल सिंह
    आरटीआई की धारा 8, 9 एवं 10 पर चर्चा करते हुए सूचना आयुक्त श्री सिंह ने आगे कहा कि यदि कोई आवेदक किसी भवन से संबंधित नक्शा की माग करता है तो उस स्थिति में प्राइवेसी के तौर पर घर के अंदर का नक्शा तो रोका जा सकता है लेकिन लोक सूचना अधिकारी घर के बाहर का नक्शा देने से मना नहीं कर सकते। यदि मामला अतिक्रमण का है एवं जनहित से संबंधित है उस स्थिति में यदि प्राइवेसी का हवाला दिया जाता है तो मात्र घर के अंदर के नक्शे को ही रोका जा सकता है बाहर का नहीं।
नकल एवं प्रमाणित दस्तावेज में क्या अंतर है?
    वेबीनार में सम्मिलित एक पार्टिसिपेंट अंकुश बरुआ द्वारा पूछा गया कि सूचना के अधिकार के आवेदन में चाही गई जानकारी के अंतर्गत रिकॉर्ड का निरीक्षण करना, नकल प्राप्त करना, प्रमाणिक दस्तावेज आदि बातें लिखी रहती है। तो उन्होंने जानना चाहा कि नकल और प्रमाणिक दस्तावेज में क्या अंतर है? इस पर श्री राहुल सिंह ने कहा कि चाहे आप नकल ले अथवा प्रमाणिक दस्तावेज दोनों ही कागजों में सील सिग्नेचर होना अनिवार्य होता है। श्री सिंह ने यह भी कहा कि आज बहुत सारे दस्तावेज पब्लिक डोमेन में उपस्थित रहते हैं जिन्हें प्रिंट लेकर स्वयं हस्ताक्षर करने के बाद किसी भी कार्यालय अथवा कोर्ट में दिया जा सकता है। यदि कोर्ट को यह लगता है कि दस्तावेज की जांच होनी चाहिए उस स्थिति में कोर्ट स्वयं भी दस्तावेज मंगवा सकता है।
ईओडब्ल्यू एवं लोकायुक्त के प्रकरणों से संबंधित आरटीआई पर हुई विस्तृत चर्चा
   वेबीनार के दौरान उपस्थित पार्टिसिपेंट्स अतुल कुमार दुबे आदि ने ईओडब्ल्यू और लोकायुक्त से संबंधित प्रकरणों के विषय में जानकारी चाही और बताया कि उनके कुछ मामले कई वर्षों से पेंडिंग है जिन पर न तो लोकायुक्त और न ही ईओडब्ल्यू कार्यवाही कर रहा है और उन्होंने कई बार सूचना का अधिकार का आवेदन भी लगाया लेकिन धारा 8 की उपधाराओं 8(1)(एच)/(जे) का हवाला देकर जानकारी नहीं दी जा रही है और बताया जा रहा है कि इससे जांच और विवेचना प्रभावित होगी। इस पर सूचना आयुक्त श्री सिंह ने कहा कि यह लिखना पर्याप्त नहीं होता की जानकारी नहीं दी जाएगी बल्कि लोक सूचना अधिकारी को यह बताना पड़ेगा कि वह कौन कौन से कारण हैं जिससे संबंधित अपराध की विवेचना और जांच प्रभावित होगी। लोकायुक्त में किसी भदौरिया नामक आवेदक के एक मामले का हवाला देते हुए श्री सिंह ने कहा कि उस केस में भी ऐसा ही जवाब दिया गया था जिसमें अपीलार्थी की शिकायत पर उन्होंने पूरा दस्तावेज बंद लिफाफे में लोकायुक्त के माध्यम से मंगवाया।
राजस्थान से सपना मीणा एवं रामखेलावन मीणा ने पूछा कि पोस्ट ऑफिस की जानकारी कैसे प्राप्त करें
    इस बीच राजस्थान के उपस्थित पार्टिसिपेंट्स में सपना एवं रामखेलावन मीणा ने जानना चाहा की विभिन्न माध्यमों से उनके नाम पर पोस्ट किए जाने वाले रजिस्टर्ड एवं स्पीड पोस्ट की जानकारी पोस्ट ऑफिस नहीं दे रहा है और कह रहा है कि यह लिस्ट हमारे पास उपलब्ध नहीं है। इस पर सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने कहा कि यह जानकारी दी जानी चाहिए क्योंकि हर पोस्ट की एक रिसिप्ट होती है। पोस्ट ऑफिस जानकारी नहीं देता तो आवेदक को केंद्रीय सूचना आयोग को धारा 18 के तहत शिकायत करनी चाहिए एवं अपील दायर करनी चाहिए।
पब्लिक रिकॉर्ड एक्ट के तहत दस्तावेजों की सुरक्षा कार्यालय की जिम्मेदारी- सूचना आयुक्त राहुल सिंह
    वेबीनार के दौरान कई पार्टिसिपेंट्स ने कंप्लेंट करते हुए बताया कि कई बार वह सूचना का अधिकार का आवेदन लगाते हैं और संबंधित कार्यालय द्वारा बताया जाता है कि दस्तावेज उनके कार्यालय में मौजूद नहीं है इस स्थिति में वह क्या करें? इस बात का जवाब देते हुए सूचना आयुक्त श्री सिंह ने कहा कि कोई भी कार्यालय किसी भी प्रकार के दस्तावेज को नियम कायदों से हटकर न तो नष्ट कर सकता और न ही वह दस्तावेज चुराया जा सकता। ऐसा कुछ हुआ है तो संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी पब्लिक रिकॉर्ड एक्ट के तहत दोषी होते हैं जिन पर वैधानिक कार्यवाही किए जाने के प्रावधान हैं और इस मामले में अधिकतम 5 वर्ष के कारावास का भी प्रावधान है।
अधिवक्ता शिवेंद्र मिश्रा के आरटीआई आवेदन को पीआईओ ने किया अमान्य
    इस बीच रीवा से अधिवक्ता शिवेंद्र मिश्रा ने बताया कि उन्होंने अपने एक साथी के माध्यम से सतना जिले के किसी कार्यालय में सूचना के अधिकार का आवेदन लगाया था जबकि रुपये 10 का नॉन जुडिशल स्टांप उनके साथी द्वारा अपने नाम से जारी कर चस्पा किया गया था। इस पर संबंधित कार्यालय के लोक सूचना अधिकारी ने जानकारी देने से मना कर दिया और उनका आवेदन अमान्य कर दिया। पीआईओ ने कहा कि रुपये 10 का स्टांप आपके नाम पर नहीं है इसलिए यह आवेदन अमान्य होगा। इस बात का जवाब देते हुए सूचना आयुक्त श्री सिंह ने कहा कि आरटीआई कानून में किसी भी आवेदन को अमान्य किए जाने संबंधी ऐसी कोई बात नहीं लिखी है और आरटीआई कानून की मंशा जन-जन को अधिक से अधिक सूचना पहुंचाने की है। यदि आवेदक के द्वारा कोई गलती कर दी जाती है इस स्थिति में लोक सूचना अधिकारी का धारा 5(3) के तहत कर्तव्य होता है कि आवेदक को सहयोग करें एवं गलती को इंगित कर गलती सुधार करने के लिए कहे न कि आवेदन को अमान्य करें। और वैसे भी यदि शुल्क किसी भी रूप में जमा की गई है और शासन के खाते में आ गई है तो इस बात से कोई विशेष अंतर नहीं पड़ता कि स्टांप आवेदक के नाम से जारी किया गया है अथवा अन्य किसी व्यक्ति के नाम से।
बृजेश राय का आईआईटी गुवाहाटी से जुड़े भ्रष्टाचार के प्रकरण पर हुई चर्चा
   जूम वेबीनार में पार्टिसिपेंट्स के तौर पर असम गुवाहाटी से आईआईटी गुवाहाटी के पूर्व प्रोफेसर बृजेश राय सम्मिलित हुए और उन्होंने आईआईटी के अंदर चल रहे अनियमितता एवं भ्रष्टाचार के विषय में अपने अनुभव रखें। बृजेश राय ने बताया कि उन्होंने आईआईटी गुवाहाटी में नियुक्ति के संदर्भ में दर्जनों सूचना के अधिकार के आवेदन लगाए हुए हैं जिनमें से काफी कुछ जानकारी भी उन्हें प्राप्त हो चुकी है लेकिन लेकिन इसके बाद भी न तो आईआईटी प्रशासन, न गृह मंत्रालय, न मानव संसाधन विकास विभाग, न राष्ट्रपति कार्यालय और न ही सेंट्रल विजिलेंस कमीशन के द्वारा कोई कार्यवाही हुई है। मामले को लेकर उन्होंने एक जनहित याचिका भी लगाई लेकिन कोर्ट से भी कोई विशेष रिलीफ नहीं मिल पाई है। इस पर अपनी निराशा व्यक्त करते हुए बृजेश राय ने आरटीआई कानून की उपयोगिता और संपूर्ण भारतीय तंत्र पर ही प्रश्न खड़ा किया।
नियम कायदे हमारे सेंटीमेंट एवं भावनाओं पर नहीं चलते वह सबके लिए समान होते हैं – भास्कर प्रभु
    जब बृजेश राय ने आईआईटी गुवाहाटी एवं अन्य संस्थानों पर हो रही अनियमितता एवं नियुक्ति संबंधी भ्रष्टाचार का प्रश्न खड़ा किया तो सूचना आयुक्त श्री राहुल सिंह ने कहा कि इस विषय पर ज्यादा प्रकाश भास्कर प्रभु जी डाल सकते हैं। इस पर भास्कर प्रभु ने अपनी बात रखते हुए कहा कि सभी आरटीआई के लिए कार्य करने वाले लोगों को अपना काम करते रहना चाहिए और अपने व्यक्तिगत लाभ या इंटरेस्ट के लिए कार्य नहीं करना चाहिए। जब आरटीआई के कार्य का स्तर व्यापक होगा उस स्थिति में हमारी बातें सुनी जाएंगी। श्री प्रभु ने कहा कि आज माफिया और उच्च पदों पर पदआसीन भ्रष्टाचारियों के द्वारा ज्यादातर हमारे जैसे सीनियर आरटीआई एक्टिविस्ट को निशाना बनाया जा रहा है और फर्जी रिपोर्ट दर्ज करवाई जा रही है। यह आज एक आम बात हो गयी है। यह कोई नई बात नहीं है। निशाना साधने वाले लोग तैयार खड़े रहते हैं इसलिए इससे घबराना नहीं चाहिए और कार्य करते रहना चाहिए। सामाजिक कार्यकर्ता एवं आरटीआई एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी ने भी बृजेश राय एवं अन्य उपस्थित पार्टिसिपेंट्स को यही बात बताई।
जूम वेबीनार में यह यह पार्टिसिपेंट्स रहे उपस्थित
दिनांक 23 अगस्त 2020 दिन रविवार को सुबह 11:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक आयोजित जूम मीटिंग वेबीनार में जो पार्टिसिपेंट्स उपस्थित रहे उनमें से मुख्य रूप से अधिवक्ता नित्यानंद मिश्रा, आरटीआई एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी,  पत्रिका समूह से  वरिष्ठ पत्रकार मृगेंद्र सिंह, शिवेंद्र मिश्रा, राजस्थान से सपना एवं रामखेलावन मीणा, छत्तीसगढ़ से विनोद दास, मुरैना से राजेश शर्मा, विदिशा से अचल कुमार दुबे, अजय कुमार मेवाड़ी, राज तिवारी, गोविंद देशवारी, अक्षय गोस्वामी, आशीष राय, बृजेश राय, पुष्पराज तिवारी, बृजेंद्र चतुर्वेदी, सुरेंद्र सिंह पवार, ओम प्रकाश, नूरगुल, पंकज मिश्रा, नंदकिशोर, गोपाल कृष्ण गौतम, धर्मेंद्र बंदिल, मदन गोपाल तिवारी, अंकुश बरुआ आदि सैकड़ों पार्टिसिपेंट्स सम्मिलित थे।
      बता दें कि जूम मीटिंग वेबीनार प्रत्येक रविवार को सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 की विभिन्न धाराओं और पेचीदगियों से जुड़े बिंदुओं पर प्रत्येक रविवार सुबह 11:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक आयोजित की जाती है जिसमें देश के कोने कोने से पार्टिसिपेंट्स हिस्सा लेते हैं।

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