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(Rewa, MP) गंगेव की चौरी पंचायत में ग्रामीणों ने एक्टिविस्ट के साथ किया प्रदर्शन, लगाए पंचायत विभाग सरपंच सचिव मुर्दाबाद के नारे, पंचायती भ्रष्टाचार के जांच की माग की

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मध्य प्रदेश की 1148 पंचायतों में 300 तीन सौ करोड के बहुचर्चित 14वें वित्त आयोग की परफॉर्मेंस ग्रांट को लेकर किए गए कराधान घोटाले का मामला सूचना आयोग भोपाल में पहुंचने के बाद पूरे प्रदेश में भूचाल सा आ गया है। अब आलम यह है की मध्य प्रदेश की 23 हजार से अधिक ग्राम पंचायतों में जगह जगह भ्रष्टाचार के विरुद्ध आवाजें उठना प्रारंभ हो गई है जो हमारे लोकतंत्र के लिए एक अच्छी खबर के रूप में देखा जा रहा है।


रीवा जिले की गंगेव जनपद में चौरी पंचायत में सैकड़ों ग्रामीणों ने पंचायत विभाग के विरुद्ध किया प्रदर्शन, लगाया मुर्दाबाद के नारे
    अभी हाल ही में 26 अगस्त 2020 को जिले की गंगेव जनपद अंतर्गत चौरी पंचायत में वहां के ग्रामवासियों ने सैकड़ों की संख्या में उपस्थित होकर पंचायती कार्यों में सरपंच सचिव एवं अधिकारियों द्वारा किए गए व्यापक स्तर के घोटाले एवं अनियमितता के विरुद्ध प्रदर्शन किया। इस बीच उपस्थित ग्रामीणों में आरडी मिश्रा, लालमणि पांडे सहित सैकड़ों ग्रामवासी मौजूद रहे। एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी की मौजूदगी में उपस्थित ग्रामवासियों ने पंचायत विभाग मुर्दाबाद सरपंच सचिव मुर्दाबाद इस प्रकार के नारे लगाए एवं कार्यवाही की मांग की। ज्ञातव्य हो कि ग्रामवासियों के बुलावे पर पंचायती कार्यों की अनियमितता का जायजा लेने सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी भी वहां मौके पर पहुंचे थे।
पंचायत विभाग मुर्दाबाद और सामाजिक कार्यकर्ता न्याय करो के लगे नारे
    जब ग्रामीणों के बुलावे पर सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी मौके पर पहुचे तब सैकड़ों ग्रामीणों ने सरपंच सचिव और पंचायत विभाग मुर्दाबाद के नारे लगाने प्रारम्भ किये और सामाजिक कार्यकर्ता न्याय करो न्याय करो के भी नारे लगाए। इस बीच एक्टिविस्ट ने जनमानस को शांत करते हुए उन्हें बताया कि पंचायती कार्य करवाना और जांच कराना शासन प्रशासन का काम है लेकिन ग्रामीणों की समस्या पर संज्ञान लेते हुए मामले को उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जाएगा और जांचकर कार्यवाही की मांग की जाएगी। यदि प्रशासन जांच कर दोषियों को दंडित नही करता तो एक्टिविस्ट द्वारा जनता के साथ आंदोलन किया जाएगा।
पुलिया और पीसीसी सड़क निर्माण एवं खेल मैदान आदि में देखी गयी व्यापक अनियमितता
     ग्राम पंचायत चौरी अंतर्गत उपस्थित खंभरिया ग्राम के नागरिकों ने एक 10 लाख की पुल दिखाते हुए बताया कि यह अभी कुछ महीने पहले ही बनाई गई है लेकिन पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है। लालगांव स्कूल में पदस्थ अतिथि शिक्षक आरडी मिश्रा और सीबीआई के रिटायर्ड इंस्पेक्टर लालमणि पण्डेय ने बताया कि जब यह पुल बन रही थी तभी इसके गुणवत्ताविहीन कार्य की शिकायत की गई थी। लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई है और शिकायत की कोई जांच भी नही हुई है।
स्थानीय संविदाकार ने बताया कि किस तरह से पुल का गुणवत्ता विहीन हुआ है कार्य
    पुल को दिखाते हुये एक स्थानीय संविदाकार महेंद्र मिश्रा ने बताया कि हम भी कॉन्ट्रैक्ट लेकर पुल सड़क निर्माण करवाते हैं और हम बता सकते हैं कि यह कार्य पूरी तरह से गुणवत्ताविहीन है और इसकी जांच हो जाय तो पूरा भ्रष्टाचार समाज के सामने आ जाएगा और सरपंच सचिवों में अधिकारियों को बेपर्दा करने में मदद मिलेगी। 
4 लाख की पीसीसी सड़क की उड़ी धज्जियां
    पीसीसी सड़क के विषय में जानकारी देते हुए ग्रामीणों ने बताया कि इस सड़क में चार लाख से अधिक रुपए खर्च किए हैं लेकिन कार्य अधूरा है। पीसीसी सड़क की गुणवत्ता के विषय में प्रश्न उठाते हुए ग्रामीणों ने बताया यह सड़क बनने के 2 माह बाद ही उखड़ गई थी। सड़क निर्माण में घटिया सीमेंट जंगल के डस्ट और सफेद गिट्टी का उपयोग किया गया है जिसकी वजह से सड़क उखड़ चुकी है। ग्रामीणों ने जांच कर रिकवरी की मांग की है। वहीं दूसरी तरफ स्कूल प्रांगण के पास खेल के मैदान की तरफ इशारा करते हुए कुछ ग्रामीणों ने कहा की खेल के मैदान में कोई कार्य नहीं हुआ है और लाखों रुपए निकाल लिए गए है।
पीएम आवास की नहीं मिली राशि वर्षों से अधूरे पड़े हैं मकान
    कुछ ग्रामीणों ने अपनी पीड़ा  व्यक्त करते हुए  एक्टिविस्ट द्विवेदी  को बताया की चौरी ग्राम पंचायत में प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत आने वाली किस्त न मिलने के कारण लगभग 50 आवास अधूरे पड़े हैं जिसकी शिकायत कई बार सरपंच सचिव से की गई है लेकिन इस विषय में कोई कार्यवाही नहीं हुई। उपस्थित एक 80 वर्ष से ऊपर की वृद्ध महिला ने बताया कि उसके पीएम आवास की राशि आने के बाद वापस कर दी गई जिसकी वजह से उसके पास कोई आवास नहीं है और वह कच्चे मकान में रह रही है जो बरसात के समय कभी भी गिर सकता है। बता दें अभी हाल ही में नजदीकी ग्राम पंचायत बांस में भी एक कच्चा मकान गिरने से महिला और उसके बच्चों की मौत हो गई जबकि यदि देखा जाए तो पूरे भारत में पीएम आवास में अच्छा खासा फर्जीवाड़ा हुआ है और रसूखदारों पक्के मकान वालों को आवास योजना का लाभ मिल रहा है लेकिन जिनके पास कोई आवास नहीं है और जो कच्चे मकानों में जीवन यापन कर रहे हैं उन्हें इस योजना से वंचित रखा गया है।
चौरी पंचायत में शौचालय योजना में भी हुआ भ्रष्टाचार
     ग्रामीणों ने अपनी समस्याएं एक-एक करके बताते हुए कहा उनकी पंचायत में शौचालय के नाम पर भी भ्रष्टाचार हुआ है और सरपंच सचिव द्वारा बिना शौचालय बनवाए ही पैसा आहरित कर लिया गया है। एक मिश्रा परिवार ने बताया उनके शौचालय निर्माण करवाने के बाद सरपंच ने कहा कि मैं पैसा भेज रहा हूं लेकिन आज तक उन्हें पैसा प्राप्त नहीं हुआ। हरिजन आदिवासी बस्ती के लोगों ने सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी को बताया कि उनके पास ना तो समुचित आवास है और ना ही शौचालय साथ में आवागमन की भी समस्या के विषय में अवगत कराया और कहा की कार्यवाही कर जांच की जानी चाहिए और उन्हें शासकीय योजना का लाभ दिया जाना चाहिए।
कराधान घोटाले की जद में भी फंसी है गंगेव की चौरी पंचायत
    रीवा जिले की जिन 75 पंचायतों के विषय में कराधान घोटाले की जांच लंबित है एवं निरंतर कार्यवाही की माग की जा रही है उनमें से गंगेेेव जनपद की 38 पंचायतों में से चौरी ग्राम पंचायत भी सम्मिलित है जिसमें 29 से 30 लाख रुपए के बीच में कराधान राशि का आहरण किया गया है कार्य की स्थिति ने अनुरूप सभी कार्य गुणवत्ताविहीन और स्वयं ही जांच के दायरे में आते हैं। दिनांक 26 अगस्त को खम्भरिया ग्राम में उपस्थित ग्रामीणों ने पंचायत के सभी कार्यों की जांच की मांग करते हुए घोटाले में फंसी चौरी पंचायत में आहरण की गई राशि से किए गए कार्यों की जांच की भी मांग की है एवं साथ में सरपंच सचिव और दोषी अधिकारियों को तत्काल बर्खास्त कर पद से पृथक करते हुए रिकवरी की है।
क्या कहना है सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी का
    पंचायती कार्यों  में भ्रष्टाचार एवं अनियमितता  को निरंतर आवाज उठाने वाले  एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी  ने बताया कि निश्चित तौर पर पंचायतों में अनियमितता का एक दौर चल पड़ा है जिसमें न केवल रीवा जिले की यह कुछ गिनी चुनी पंचायतें ही सम्मिलित हैं बल्कि देखा जाए तो पूरे मध्यप्रदेश की 23 हज़ार से अधिक पंचायतों के कार्यों की जांच होनी चाहिए। जनता के टैक्स से प्राप्त हुए पैसे को सरकार के द्वारा जनता के विकास कार्य में खर्च किया जाता है लेकिन आज जनप्रतिनिधि और सरकारी कर्मचारी अधिकारी मिलकर पूरी राशि का बंदरबांट कर लेते हैं जिससे ग्राम स्वराज का सपना सिर्फ एक सपना ही रह गया है। हम सरकार से इस विषय में मांग करेंगे की पूरे पंचायती कार्यों की कैग ऑडिट के द्वारा जांच की जानी चाहिए जिससे सभी सच्चाई सामने आ जाएगी।

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