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मौहरिया सचिव पर सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने लगाया 25 हज़ार का जुर्माना,

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दिनांक 28 सितंबर 2020 को मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह के द्वारा फेसबुक लाइव के माध्यम से रीवा जिले की जनपद पंचायत नईगढ़ी के विषय में ग्राम पंचायत मौहरिया में लगाई गई वर्ष 2015 के एक आरटीआई आवेदन पर अपना निर्णय दिया गया। यह मामला वर्ष 2015 का था जिसमें पंचायत निवासी अनिल सिंह के द्वारा उस समय तत्कालीन ग्राम सचिव रामसुंदर साकेत जो कि इस मामले के लोक सूचना अधिकारी भी थे आरटीआई लगाकर ग्राम सभा के प्रस्ताव की जानकारी चाही गई थी। लेकिन यह जानकारी सचिव के द्वारा उपलब्ध नहीं करवाई गई जिसके विषय में आवेदक ने प्रथम एवं द्वितीय अपील प्रस्तुत की थी जिसकी सुनवाई वर्ष 2018 में राज्य सूचना आयोग में हुई थी। राज्य सूचना आयोग में तत्कालीन सूचना आयुक्त के द्वारा सुनवाई के उपरांत सचिव एवं लोक सूचना अधिकारी ग्राम पंचायत मौहरिया जनपद पंचायत नईगढ़ी को आदेशित किया गया था कि वह आवेदक को वांछित जानकारी 15 दिवस के भीतर उपलब्ध करवाएं।

    सूचना आयोग के आदेश के उपरांत भी 15 दिवस में जानकारी उपलब्ध नहीं करवाई

    वर्ष 2018 में मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयोग के द्वारा सचिव ग्राम पंचायत मौहरिया जनपद पंचायत नईगढ़ी को आदेशित किया गया कि वह 15 दिवस के भीतर जानकारी उपलब्ध करवाएं लेकिन आवेदक अनिल सिंह को कोई जानकारी उपलब्ध नहीं होने पर आवेदक द्वारा संबंधित जनपद पंचायत एवं एसडीएम कार्यालय सहित राज्य सूचना आयोग में शिकायत प्रस्तुत की गई एवं उन्हें जानकारी उपलब्ध नहीं करवाई गई इसके विषय में अवगत कराया गया।

   आयोग के आदेश की अवहेलना पर सचिव रामसुंदर साकेत को लगा 25हज़ार रुपये का जुर्माना

   अपीलार्थी अनिल सिंह के आवेदन पर कार्यवाही करते हुए मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने दिनांक 28 सितंबर 2020 को सुनवाई की जिसमें दोनों पक्षों को सुना गया। जहां ग्राम पंचायत मौहरिया के सचिव रामसुंदर साकेत के द्वारा कहा गया कि उन्होंने तीन बार आवेदक को जानकारी उपलब्ध करवाई लेकिन आवेदक द्वारा पाउती नहीं दी गई वहीं आवेदक अनिल सिंह के द्वारा कहा गया कि उन्हें कोई जानकारी उपलब्ध नहीं करवाई गई और सचिव झूठ बोल रहे हैं। सुनवाई के दौरान सचिव ने आवेदक अनिल सिंह पर गाली गलौज करने एवं धमकी देने का भी आरोप लगाया जिस पर सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने कहा कि यह विषय राज्य सूचना आयोग का नहीं है। और इसके विषय में यदि कोई पीड़ित है तो पुलिस में जाना चाहिए। जहां तक सवाल राज्य सूचना आयोग का है वह सिर्फ यह देखता है कि आवेदक को जानकारी उपलब्ध करवाई गई है अथवा नहीं और यदि सचिव रामसुंदर साकेत के द्वारा कोई भी जानकारी उपलब्ध करवाई गई है तो सचिव के पास उसका क्या सबूत है यह आयोग के समक्ष प्रस्तुत किया जाए। लेकिन इसके उपरांत सचिव के द्वारा कोई भी दस्तावेज के तौर पर आयोग के समक्ष प्रस्तुत नही किए गए और मात्र आरोप-प्रत्यारोप ही लगाए गए। 

  अपीलार्थी को जानकारी उपलब्ध करवाए जाने की बजाय पुराने मोबाइल नंबर पर भेज दिया व्हाट्सएप पीडीएफ

    सचिव ने कहा कि अभी सूचना आयुक्त राहुल सिंह के निर्देश के बाद उन्होंने व्हाट्सएप पर जानकारी संबंधित आवेदक अनिल सिंह को भेजी है जिस पर राहुल सिंह ने कहा कि सचिव और लोक सूचना अधिकारी मोबाइल व्हाट्सएप की स्क्रीनशॉट भेजें लेकिन सचिव रामसुंदर साकेत के द्वारा कोई भी स्क्रीनशॉट उपलब्ध नहीं करवाया गया और जो मोबाइल नंबर बताया गया आवेदक का बहुत पुराना मोबाइल नंबर था। इस पर सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने कहा कि यदि उसी ग्राम में होते हुए आप आवेदक से मिलकर उसको जानकारी उपलब्ध नहीं करवा सकते और उसका मोबाइल नंबर प्राप्त नहीं करवा सकते इसका मतलब आप बिल्कुल झूठ बोल रहे हैं और साथ में आयोग को भी गुमराह कर रहे हैं जिसके लिए आयोग ने दोषी पाए जाने पर सीधे सचिव रामसुंदर साकेत ग्राम पंचायत मौहरिया जनपद पंचायत नईगढ़ी के ऊपर 25 हज़ार रुपये का जुर्माना अधिरोपित किया।

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