MP/Rewa//Bhopal// जुर्मानों पर जुर्माने फिर भी अक्ल नही ठिकाने – तत्कालीन एएसपी रीवा और टीआई बैकुंठपुर को सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने जारी किया अलग अलग 25 हज़ार रु जुर्माने का कारण बताओ नोटिस, मामला 2017 के पुलिश विभाग की एक आरटीआई का

मध्य प्रदेश सूचना आयुक्त राहुल सिंह के द्वारा सूचना कानून के उल्लंघन पर निरंतर कार्यवाही की जा रही। सूचना के अधिकार कानून के उल्लंघन के बाद कोई भी लोक सूचना अधिकारी बक्सा नहीं जा रहा है जिसे अब लोक प्राधिकारियों के बीच खलबली मची हुई है।।
भारत मे अनूठा प्रयोग, सभी सुनवाइयां फेसबुक लाइव स्ट्रीमिंग के माध्यम से
श्री सिंह के द्वारा अपनी सभी सुनवाइयां फेसबुक लाइव स्ट्रीमिंग के माध्यम से सीधे प्रसारित की जा रही हैं जिसे धरती पर बैठा कोई भी व्यक्ति देख सकता है। इसी तारतम्य में दिनांक 6 नवंबर 2020 को सूचना आयोग की 4 लाइव स्ट्रीमिंग फेसबुक लाइव के माध्यम से सुनवाईयों का सीधा प्रसारण किया गया। यहां सुनवाई दोपहर लगभग 1:00 बजे के बाद प्रारंभ हुई और लगभग 3:00 बजे तक चलती रही। फेसबुक के माध्यम से सुनवाइयों का आनंद ले रहे दर्शकों ने विभिन्न प्रकार से प्रश्न पूछे और राहुल सिंह के सुनवाई की काफी प्रशंसा की। सुनवाई के दौरान कमेंट सेक्शन ऑन होने के वजह से सभी दर्शकगण समय-समय पर अपना कमेंट लिख देते हैं और अपना सुझाव भी देते रहते हैं जिसकी वजह से सुनवाई को और भी इंटरएक्टिव बना दिया जाता है।
भारत का पहला ऐसा प्रयोग है जहां पर आधिकारिक तौर पर किसी भी सेमी-जुडिशल अथवा फुली-जुडिशल सुनवाइयां फेसबुक लाइव के माध्यम से लाइव स्ट्रीम की जा रही हैं और जहां पर सीधे दर्शक जुड़ सकते हैं और अपनी बात भी रख सकते हैं।
अनिल सिंह उपकारी बनाम रीवा का पुलिस विभाग
दिनांक 6 नवंबर 2020 को जब सुनवाई का दौर प्रारंभ हुआ तो फेसबुक लाइव के माध्यम से पहली सुनवाई रीवा जिले के गंगेव ब्लॉक के गोन्दरी 27 ग्राम पंचायत के अनिल सिंह उपकारी का प्रकरण आया जो अपील संख्या सी-1107 क्रमांक से प्रारंभ हुआ जिसमें अनिल सिंह ने पुलिस विभाग में आरटीआई लगाकर एक नितांत अपराधी किस्म के व्यक्ति योगेंद्र पांडे पिता महेश पांडे निवासी ग्राम जोरौरी थाना बैकुंठपुर के आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी सूचना का अधिकार लगाकर दिनांक 26/09/2017 को चाही थी। इस जानकारी में अनिल उपकारी के माध्यम से अपराधी योगेंद्र पांडे का आपराधिक रिकॉर्ड क्रमांक 47/2003 धारा 107/116, अपराध क्रमांक 83/04 धारा 107/116, अपराध क्रमांक 25/09 भारतीय दंड संहिता की धारा 452, 294, 336, 323, 506, 34 अपराध क्रमांक 97/90, धारा 294, 323, 506, 34, अपराध क्रमांक 15/09 धारा 143, 148, 149, 323 एवं अपराध दिनांक 22/01/2020 धारा 307, 506, 294, 34, हरिजन एक्ट आदि अपराधों की जानकारी एफ आई आर की प्रमाणित प्रति चाही थी।
शिवकुमार सिंह तत्कालीन एडिशनल एसपी रीवा ने नही उठाया फ़ोन, आयोग की नोटशीट में दर्ज
सुनवाई के दौरान अपीलार्थी अनिल सिंह उपकारी और तत्कालीन लोक सूचना अधिकारी एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आशुतोष गुप्ता, तत्कालीन डीम्ड पीआईओ एवं टीआई बैकुंठपुर महेंद्र पांडे जो वर्तमान में शाहपुर चौकी थाना सिमरिया में टीआई पद पर पदस्थ हैं उपस्थित रहे, जबकि तत्कालीन लोक सूचना अधिकारी एवं तत्कालीन एडिशनल एसपी शिव कुमार सिंह बार-बार फोन कॉल किए जाने के बावजूद भी उपलब्ध नहीं हो पाए। इस बीच सूचना आयुक्त ने टिप्पणी करते हुए अपने आदेश में कहा कि तत्कालीन लोक सूचना अधिकारी एवं एडिशनल एसपी शिव कुमार सिंह को बार-बार मोबाइल कॉल किया गया एवं पहले भी सूचना दी गई फिर भी सुनवाई के दिन उन्होंने फोन कॉल रिसीव नहीं किया और न ही स्वयं ही किसी प्रकार से संपर्क करने का प्रयास किया तो यह बात आज की कार्यवाही की नोट सीट में दर्ज की जाए।
आशुतोष गुप्ता तत्कालीन एएसपी हुये सुनवाई से बरी
सुनवाई के दौरान तत्कालीन लोक सूचना अधिकारी एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रीवा आशुतोष गुप्ता के द्वारा बताया गया कि वह रीवा में एडिशनल एसपी के पद पर पदस्थ थे और उनके साथ एक अन्य एडिशनल एसपी शिव कुमार सिंह भी थे लेकिन लोक सूचना अधिकारी के कागजात पर हस्ताक्षर आशुतोष गुप्ता के द्वारा नहीं किया गया है। इस बात को सुनकर सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने आशुतोष गुप्ता को सुनवाई से बरी कर दिया।
एएसपी शिवकुमार सिंह ने आरोपी योगेंद्र पण्डेय से धारा 11 के तहत मागी थी अनुमति
इस बीच जब बात जानकारी दिए जाने की आई तो यह बात सामने आई की एडिशनल एसपी के द्वारा पत्र तत्कालीन टीआई थाना बैकुंठपुर महेंद्र पांडे को धारा 6(3) के तहत अंतरित किया गया था जिसके बाद महेंद्र पांडे एवं तत्कालीन एडिशनल एसपी एवं लोक सूचना अधिकारी शिव कुमार सिंह के द्वारा सामूहिक तौर पर हस्ताक्षर करते हुए यह बताया गया था की यह जानकारी योगेंद्र पांडे पिता महेश पांडे से देने के लिए अनुमति चाही गई थी जिसमें योगेंद्र पांडे के द्वारा जानकारी देने से मना कर दिया गया था इसलिए जानकारी आवेदक अनिल सिंह उपकारी को नहीं दी गई।
प्रशांत भूषण बनाम दिल्ली पुलिश : 2009 के केस में अपराध की जानकारी सार्वजनिक करें
दोनों पक्षों को सुनने के बाद सूचना आयुक्त श्री सिंह ने कहा की हाईकोर्ट नई दिल्ली का एक आदेश है जिसमें 2009 में प्रशांत भूषण बनाम दिल्ली पुलिस के एक प्रकरण में हाईकोर्ट ने निर्देश दिए थे कि किसी भी आपराधिक व्यक्ति के पुलिस रिकॉर्ड्स एफआईआर आदि की जानकारी व्यक्तिगत नहीं हो सकती है और इसे साझा किया जाना चाहिए एवं आरटीआई लगाई जाने पर जानकारी दी जानी चाहिए।
आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी व्यक्तिगत नहीं हो सकती – सूचना आयुक्त राहुल सिंह
इस प्रकार सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने कहा कि सूचना आयोग के समक्ष यह बात भली-भांति स्पष्ट है कि कोई भी जानकारी जो किसी आपराधिक व्यक्ति के पुलिस रिकॉर्ड से संबंधित है और ऐसे किसी भी व्यक्ति पर जिसके ऊपर दर्जनभर एफ आई आर दर्ज है वह जानकारी किसी की व्यक्तिगत प्रॉपर्टी नहीं है बल्कि वह सार्वजनिक की जानी चाहिए।
धारा 6(1) के तहत जनाकारी दी जाती है, जानकारी रोंकी नही जाती – सूचना आयुक्त
तत्कालीन लोक सूचना अधिकारी शिव कुमार सिंह एवं बैकुंठपुर टीआई महेंद्र पांडे के द्वारा धारा 6(1) का हवाला देकर आवेदक को गुमराह किया गया और बताया गया कि धारा 6(1) के तहत जानकारी नहीं दी जा सकती। इस पर टिप्पणी करते हुए सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने कहा कि लोक सूचना अधिकारी को यह पता होना चाहिए कि धारा 6(1) के तहत जानकारी दी जाती है और जानकारी देने से मना नहीं किया जाता है। जानकारी देने से सिर्फ धारा 8 एवं 9 के अंतर्गत ही मना किया जा सकता है और वह भी जब कोई प्रकरण विवेचना में चल रहा है और न्यायालय में पेश नहीं हुआ है और जिसके कारण जांच प्रभावित हो मात्र वह जनाकारी रोके जाने का आधार बनता है। पर कि यह अपराध और प्रकरण 2003 से लेकर 2009 के बीच के हैं इसलिए इनमें जानकारी छुपाने का प्रश्न ही नहीं उठता है।
एएसपी और टीआई पर 25 हज़ार रुपये अलग अलग जुर्माने का जारी हुआ कारण बताओ नोटिस
दोनों पक्षों को सुनते हुए एवं पूरे प्रकरण पर गौर करते हुए पेश की गई दलीलों के आधार पर एवं प्रकरण के गुण दोष के आधार पर सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने पाया कि सूचना के अधिकार अधिनियम का उल्लंघन किया गया है जिसमें आवेदक को एक ऐसी जानकारी देने से मना किया गया जो जानकारी व्यापक जनहित में थी और एक निहायत ही अपराधी किस्म के व्यक्ति के अपराधिक रिकॉर्ड से संबंधित थी जिसका कि उस समय ना तो विवेचना से कोई मतलब था और ना ही प्रकरण प्रक्रिया में था जबकि वह प्रकरण पहले से ही न्यायालय में पेश किया जा चुका था। इस प्रकार दिल्ली हाई कोर्ट के प्रशांत भूषण बनाम दिल्ली पुलिस के प्रकरण का हवाला देते हुए लोक सूचना के अधिकार का उल्लंघन मानते हुए सूचना आयुक्त श्री सिंह ने अतिरिक्त तत्कालीन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक एवं तत्कालीन लोक सूचना अधिकारी शिव कुमार सिंह एवं एवं तत्कालीन टीआई बैकुंठपुर महेंद्र पांडे को 25000 प्रत्येक को जुर्माने का कारण बताओ नोटिस जारी किया है और अगली सुनवाई तक के लिए मामले को सुरक्षित रखा है।

Subscribe to my channel
Comments are closed.