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MP//Rewa// देश के जाने-माने सूचना आयुक्त, सामाजिक कार्यकर्ता, आरटीआई एक्टिविस्टों ने सूचना आयुक्त राहुल सिंह के पक्ष में मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश शासन के नाम भेजा ज्ञापन,

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पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त शैलेश गांधी, मप्र के पूर्व सूचना आयुक्त आत्मदीप, पूर्व मुख्य केंद्रीय सूचना आयुक्त सत्यानंद मिश्रा, मजदूर किसान शक्ति संगठन के शंकर सिंह, निखिल डे एवं श्रीमती अरुणा रॉय, सतर्क नागरिक संगठन की अंजली भारद्वाज, महिती अधिकार मंच के भास्कर प्रभु, पुलिस रिफार्म वाच से श्रीमती डोल्फी डिसूजा आदि ने सामूहिक हस्ताक्षरित सौंपा ज्ञापन।

👉 मध्यप्रदेश के राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह के पक्ष में देश के प्रबुद्धजनों ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के नाम ज्ञापन जारी किया

👉 300 कराधान घोटाले में फंसे 1148 पंचायतों की CBI जांच की माग

👉 भ्रष्टाचारियों द्वारा कर्तव्यनिष्ठ सूचना आयुक्तों को हटाने की माग बर्दास्त नही होगी

👉 तत्काल फर्जी सरपंच संघ की जांच हो, भ्रष्टाचार में संलिप्त प्रधानों की CBI जांच हो

👉 14वें वित्त आयोग की ग्रांट की कैग ऑडिट की जांच की माग

 रीवा//मप्र

      मध्य प्रदेश के रीवा जिले में कराधान घोटाले की शुरुआत रीवा से हुई लेकिन अब इसकी आग मध्य प्रदेश की 1148 पंचायतों में फैल चुकी है। बात यहीं पर आकर नहीं रुकती अब हाल यह हैं कि भ्रष्टाचारी मध्य प्रदेश सूचना आयुक्त राहुल सिंह को हटाने के लिए मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंप रहे हैं। जिसे देखते हुए न केवल मध्यप्रदेश में बल्कि पूरे भारत देश में वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता, वरिष्ठ आरटीआई कार्यकर्ता, सिविल सोसाइटी के प्रबुद्धजनों आदि के द्वारा मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश शासन एवं भारत के प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपें जा रहे हैं और ऐसे भ्रष्टाचारियों की सीबीआई जांच की मांग की जा रही है और साथ मे कठोरतम कार्यवाही के लिए बात कही जा रही है।

14 वें वित्त आयोग की परफारमेंस ग्रांट में आरटीआई के माध्यम से उजागर हुआ था भ्रष्टाचार

मध्य प्रदेश में वर्ष 2017-18 के कराधान योजना के अंतर्गत 14 वें वित्त आयोग की परफॉर्मेंस ग्रांट को लेकर 1148 पंचायतों में 300 करोड़ की राशि सरकार द्वारा ग्रामीण विकास कार्यों के लिए अंतरित की गई थी। परंतु रीवा जिले के परिपेक्ष में 75 पंचायतों में जारी की गई 14 वें वित्त आयोग की राशि का बंदरबांट किया गया एवं वृहद और व्यापक स्तर पर घोटाला किया गया जिसकी जांच के बाद व्यापक स्तर पर अनियमितता एवं भ्रष्टाचार और बंदरबांट उजागर हुआ।

   आरटीआई उल्लंघन पर 6 जनपद सीईओ को लगे जुर्माने, उजागर हुआ कराधान घोटाला

     यह समस्त जानकारी सूचना के अधिकार के माध्यम से प्राप्त की गई। जानकारी बाहर निकलते ही जिला पंचायत रीवा सीईओ स्वप्निल वानखेड़े के द्वारा अच्छी कार्यवाही की गई और ऐसे भ्रष्ट सरपंच सचिव और रोजगार सहायक के विरुद्ध निलंबन, पद से पृथक करने एवं पंचायती राज अधिनियम की धारा 40 एवं 92 की कार्यवाही भी की जा रही है। पूरा मामला सूचना के अधिकार के माध्यम से उजागर हुआ इसलिए मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह का रोल काफी अहम रहा जिनकी कार्यवाही के बाद रीवा जिले के 6 जनपद सीईओ के विरुद्ध लगभग सवा लाख से ऊपर के जुर्माने भी लगाए गए और साथ में पारदर्शिता के सिद्धांत के तहत कार्यवाही किए जाने के निर्देश भी दिए गए। 

पूर्व सूचना आयुक्तों वरिष्ठ सामाजिक एवं आरटीआई कार्यकर्ताओं और अन्य प्रबुद्ध जनों ने शिवराज सिंह चौहान को ईमेल कर भेजा ज्ञापन
पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त शैलेश गांधी, मप्र के पूर्व सूचना आयुक्त आत्मदीप, पूर्व मुख्य केंद्रीय सूचना आयुक्त सत्यानंद मिश्रा, मजदूर किसान शक्ति संगठन के शंकर सिंह, निखिल डे एवं श्रीमती अरुणा रॉय, सतर्क नागरिक संगठन की अंजली भारद्वाज, महिती अधिकार मंच के भास्कर प्रभु, पुलिस रिफार्म वाच से श्रीमती डोल्फी डिसूजा आदि ने सामूहिक हस्ताक्षरित ज्ञापन शैलेश गांधी के ईमेल के द्वारा मध्य प्रदेश के सीएम के ऑफिशियल ईमेल एड्रेस पर भेजते हुए मांग की गई कि मध्य प्रदेश में अभी हालिया 1148 पंचायतों के 300 करोड़ के घोटाले की सीबीआई जांच करवाई जाए और साथ में अनाप-शनाप बकने वाले भ्रष्टाचारियों के ऊपर दंडात्मक कार्यवाही की जाए। ई-मेल में श्री गांधी ने यह भी लिखा है कि महाराष्ट्र में सूचना आयुक्त को 18 स्टाफ उपलब्ध करवाए जाते हैं ठीक उसी प्रकार मध्यप्रदेश में भी सूचना आयुक्त राहुल सिंह को 18 स्टाफ उपलब्ध करवाए जाएंगे जिससे 90 दिन के भीतर द्वितीय अपील का निराकरण हो सके एवं जनता को न्याय मिल सके।।

    कराधान घोटाले एवं 14वें वित्त आयोग की राशि के बंदरबांट करने वाले घोटालेबाज कार्यवाही के भय से अलाप रहे अनाप शनाप राग

    कार्यवाही के बाद कराधान घोटाले में फंसे हुए भ्रष्टाचारी सरपंच सचिव और रोजगार सहायक अब राहुल सिंह के विरुद्ध प्रोपोगंडा फैला रहे हैं और उनके नाम के विरुद्ध गलत संदेश प्रसारित कर रहे हैं। देश के प्रबुद्ध जनों वरिष्ठ सामाजिक क्षेत्र के कार्यकर्ताओं पूर्व सूचना आयुक्त एवं वरिष्ठ आरटीआई कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश शासन के नाम ज्ञापन मुख्यमंत्री के ऑफिशियल ईमेल एड्रेस में सौंपा है और कहा है कि यह मानना है कि न केवल मध्य प्रदेश बल्कि पूरे भारतवर्ष में मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह के पदभार संभालते ही आरटीआई कानून को एक नई मजबूती मिली है और साथ में मध्यप्रदेश की अलग ही पहचान बनी है।

मध्य प्रदेश आरटीआई कानून को नई दिशा देने वाला राज्य बना

आरटीआई कानून के लिए मध्यप्रदेश को जाना जाने लगा है। इस सब में सूचना आयुक्त राहुल सिंह का रोल बहुत ही अहम है। रीवा जिला और मध्य प्रदेश में कार्यरत सामाजिक एवं आरटीआई के क्षेत्र में एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी के द्वारा भी आरटीआई लगाकर ज्यादा से ज्यादा जन जागरूकता फैलाई जा रही है और साथ में भ्रष्टाचार उजागर किए जा रहे हैं जिसके कारण सभी भ्रष्टाचारी एकजुट होकर शिवानंद द्विवेदी को विभिन्न प्रकार से क्षति पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं जिसमें अभी हाल ही में उनके ऊपर दो बार हमले भी किए गए हैं जिसके विरुद्ध संबंधित थाना में एफआईआर दर्ज करवाई गई है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म सोशल ऑडिट जनसुनवाई धारा 4 के तहत साझा की जाने वाली जानकारी आदि के आधार पर एक्टिविस्ट द्विवेदी के द्वारा आरटीआई को लेकर जन जागरूकता फैलाई जा रही है जो मध्य प्रदेश के इतिहास में पहली बार हो रहा है। मध्यप्रदेश में अब तक सोशल ऑडिट और जनसुनवाई का कार्यक्रम किसी भी सामाजिक व्यक्ति अथवा आरटीआई कार्यकर्ताओं के द्वारा आयोजित नहीं किया गया था।

मध्य प्रदेश सूचना आयोग में पहली बार इंटर्नशिप और वॉलिंटियर्स ऑफर किए गए

मध्य प्रदेश सूचना आयोग में कर्मचारियों की कमी के चलते इंटर्नशिप एवं वॉलिंटियर्स ऑफर किए गए हैं जिसमें आरिटीआई एक्टविस्ट शिवानन्द द्विवेदी द्वारा युध्य स्तर पर प्रयास किये गए। वहीं सूचना आयुक्त राहुल सिंह के द्वारा इन वॉलिंटियर्स के सहयोग से फेसबुक लाइव के माध्यम से अपील की लाइव सुनवाई की जा रही है और साथ में प्रकरणों के त्वरित निराकरण किए जा रहे हैं जो अब तक कि एक ऐतिहासिक पहल है। कोई भी दोषी लोक सूचना अधिकारी जुर्माने से बच नहीं पा रहा है जिसकी वजह से इन सभी भ्रष्टाचारियों के द्वारा सूचना आयुक्त राहुल सिंह के विरुद्ध गलत संदेश प्रसारित किए जा रहे हैं और उन्हें पद से हटाने की बातें की जा रही हैं। जो उस पद की गरिमा के भी विरुद्ध है।

     प्रबुद्धजनों ने ज्ञापन में बताया कि हमारा मानना है कि यदि मध्यप्रदेश एवं भारत में सूचना के अधिकार कानून को जीवित रखना है और प्रशासनिक कार्य को बेहतर एवं पारदर्शी बनाना है तो उसके लिए मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह जैसे सूचना आयुक्तों की बहुत सख्त आवश्यकता है। 

   राहुल सिंह के प्रयासों से अपीलार्थी को मिली राहत वहीं पीआईओ के सरकारी खर्चा बचाने में हुई मदद

    श्री सिंह द्वारा लिए गए निर्णय से न सिर्फ प्रशासन को जनता के प्रति जवाबदेह बनाते हुए शासकीय कार्यालयों में पारदर्शिता के नए आयाम रचे जा रहे है बल्कि राहुल सिंह द्वारा फोन और व्हाट्सएप पर ऑनलाइन हियरिंग करने की वजह से अब शासकीय अधिकारी और अपीलकर्ता को भोपाल जाने की जरूरत भी नहीं है। इससे शासन द्वारा शासकीय अधिकारियों के दौरे पर खर्च होने का लाखों रुपये का ख़र्चा पूरी तरह से बंद हो गया है। वहीं इस क्रांतिकारी कदम से शासकीय दफ्तरों में मानव संसाधन के लिहाज से कार्य अवधि में बढ़ोतरी हो गई है क्योंकि अब शासकीय अधिकारी बिना दफ्तर से बाहर जाए सूचना आयोग की कार्रवाई में भाग ले सकते हैं। पहले शासकीय अधिकारी सूचना आयोग की कार्यवाही के नाम पर भोपाल में अपना टूर बना कर सरकारी खर्चे पर तीन से चार दिन दफ़्तर से ग़ायब रहते थे।

   गांव की गरीब जनता के विकास के पैसे का बन्दरवाट बर्दास्त नहीं

    गांव की गरीब जनता के विकास और उत्थान के लिए सरकार द्वारा दी जाने वाली राशि का इन भ्रष्टाचारी सरपंच सचिव और तथाकथित फर्जी पंच सरपंच संघ के अलीबाबा और 40 चोर के गिरोहों के द्वारा अपने व्यक्तिगत हित मे लगाया जा रहा है जो देश के लोकतंत्र के लिए अत्यंत घातक है एवं ग्रामीण विकास और ग्राम स्वराज लाने की जो मंशा शासन सरकार की है उसके भी विपरीत है। ज्ञापन ईमेल करते हुए प्रबुद्ध जनों ने आगे कहा कि हम सभी कार्यकर्ता एवं समाजसेवी पूर्व सूचना आयुक्त मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जी से यह अपील करते हैं कि मप्र राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह एवं रीवा जिले के परिपेक्ष में यहां के जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी स्वप्निल वानखेड़े जैसे अधिकारियों के कार्यों को प्रोत्साहन देकर तत्काल सीबीआई जांच गठित कर भ्रष्टाचारियों और फर्जी सरपंच संघ के विरुद्ध दंडात्मक कार्यवाही की जानी चाहिए।

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