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MP//Rewa// नवनिर्मित बांस गौशाला में बिना व्यवस्था ठूंस दिए मवेशी//पशु पालकों ने मचा रखा तांडव// पशुपालकों को दूध बना बरदान लेकिन गोमाता बनी अभिशाप// पापियों ने दूध खाया और दूध देने वाले से नाता तोड़ा// रीवा जिले की सरकारी गौशालाओं के हाल बेहाल//उधर किसान की हालत भी हुई खराब।।

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👉 नवनिर्मित बांस गौशाला में बिना व्यवस्था ठूंस दिए मवेशी
👉 पशु पालकों ने मचा रखा तांडव
👉 पशुपालकों को दूध बना बरदान लेकिन गोमाता बनी अभिशाप👉 पापियों ने दूध खाया और दूध देने वाले से नाता तोड़ा👉 रीवा जिले की सरकारी गौशालाओं के हाल बेहाल👉 उधर किसान की हालत भी हुई खराब

     मध्यप्रदेश में कमलनाथ सरकार के द्वारा 3000 गौशालाओं के बनाए जाने के लिए घोषणा की गई थी। उनकी सरकार तो चली गई लेकिन 3000 गौशाला नहीं बन पाई। फिर भी यदि कमलनाथ की बात करें तो गौरक्षा के नाम पर जनता को गुमराह करने वाली गौरक्षक और राष्ट्रवादी पार्टियों से इतर बेहतर काम करते हुए मध्य प्रदेश के हर जिले में दर्जनों गौशाला खोलने की व्यवस्था की है। इस बीच कुछ गौशालाएं बनकर भी तैयार हो गई थी लेकिन फंड की कमी का रोना रोकर उन्हें प्रारंभ नहीं करवाया जा सका। अभी जो गौशालाऐं बन रही है उनमें भी काम काफी धीमी गति से चल रहा है। 
गो-कैबिनेट गठित करने का ड्रामा तो करेंगे लेकिन गायों के लिए कुछ नही करेंगे
     इस बीच सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी ने कहा कि भाजपा शासनकाल और शिवराज की सरकार आने के बाद एक बार पुनः गो कैबिनेट का गठन किये जाने की बात हो रही है और बताया गया की गायों के लिए अच्छे दिन आने वाले हैं लेकिन जिस प्रकार से गौशालाओं की स्थिति है, गोवंश को जिस प्रकार प्रताड़ित किया जा रहा है, अवैध बाड़े  बनाए जा रहे हैं और पशुतस्करी जोरों पर है, साथ में दिन प्रतिदिन पशु क्रूरता जिस प्रकार बढ़ती जा रही है उससे बिल्कुल ऐसा प्रतीत नहीं होता कि गायों के लिए कोई अच्छा दिन आने वाला है।
रीवा के गौवंशों की चीत्कार पहुंची थी दिल्ली तक
   यदि हम रीवा जिले की बात करें तो यहां पिछले एक दशक से सामाजिक कार्यकर्ता एवं गायों और पशुओं के अधिकार के लिए निरंतर आवाज उठाने वाले एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी द्वारा सैकड़ों रेस्क्यू ऑपरेशन किए गए जिसमें जलप्रपातों, घाटियों, खाइयों, अवैध बाड़ों, पशु तस्करों, क्रूर व्यक्तियों के चंगुल से छुड़ाकर जान बचाने का प्रयास किया गया। जिसकी वजह से मीडिया ने समय-समय पर पूरे मामले को अच्छा स्थान भी दिया और पूरे देश में रीवा जिले और मध्यप्रदेश की गायों की चित्कार और आवाज दिल्ली का सिंहासन तक हिला बैठी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर शिवराज सिंह चौहान, पशुओं के अधिकार के लिए कार्य करने वाली तत्कालीन केंद्रीय मंत्री श्रीमती मेनका गांधी सबके पास बात पहुंची और कार्यवाही भी हुई। 
3000 गोशालाएं कब बनकर कंप्लीट होंगी?
     मध्य प्रदेश की तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने 3000 गौशाला खोलने के लिए बकायदा प्रयास किया जो काम अब मध्य प्रदेश की शिवराज सिंह की सरकार वर्तमान कार्यकाल में आगे बढ़ाने का दावा कर रही है। लेकिन दुर्भाग्य है कि चाहे हम रीवा जिले की बात करें या संपूर्ण मध्यप्रदेश की हर जगह काम मात्र कागजों पर ही चल रहा है और यदि कुछ गौशाला बनकर कंप्लीट भी हो गई है तो भी वहां पर गोवंशों को व्यवस्थित ढंग से रखा नहीं गया है।
बांस ग्राम की सरकारी गौशाला में ठूंस दिए गए मवेशी, कोई समुचित व्यवस्था नही
   अभी हाल ही में जिले की कुछ गौशालाओं जिसमें गंगेव ब्लॉक की बांस पंचायत में नवनिर्मित गीता गौशाला में जाकर देखा गया तो आवारा बेसहारा मवेशियों को बिना किसी व्यवस्था के ठूंस दिया गया है जहां पर 05 दिसंबर को दोपहर 2:00 बजे मौके पर देखा गया तो गोवंश बिना किसी व्यवस्था के मिले जहां पर गोवंशों के लिए कोई किसी प्रकार की व्यवस्था नही दिखी। एक बोझा पैरा हाथ में लेकर जब मवेशियों के पास पहुंचा गया तो देखा गया कि सभी मवेशी मुट्ठी भर चारे के लिए टूट पड़े हैं इससे साफ जाहिर हो रहा था कि इन्हें किसी भी प्रकार की समुचित व्यवस्था नहीं की गई है। अब सवाल यह है कि यदि मवेशियों को चारे और पानी की व्यवस्था नहीं की जाएगी तो वह कब तक जीवित रहेंगे और निश्चित तौर पर इसके लिए सबसे ज्यादा बांस ग्राम पंचायत, इसके सरपंच सचिव जिम्मेदार हैं जिन्होंने बिना किसी व्यवस्था के मवेशियों को गौशाला के अंदर रखने की परमिशन दी है। मौके पर उपस्थित बांस ग्राम पंचायत के ग्रामीणों देवेंद्र तिवारी, रविकांत अग्निहोत्री, रविशंकर मिश्रा, अजय मिश्रा, अभय राज पटेल, राजमणि केवट आदि ने गोवंश की समुचित व्यवस्था के लिए जिला कलेक्टर एवं राज्य शासन से अपील की है।

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