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MP//Rewa//Bhopal// लोकपाल मनरेगा पर सूचना आयोग का ऐतिहासिक आदेश, 3 माह के भीतर प्रदेश में सार्वजनिक करें सम्पूर्ण सूचना // लोकपाल मनरेगा लोक प्राधिकारी की श्रेणी में, सूचना न देने से बच नहीं सकते – सूचना आयुक्त// राहुल सिंह ने एकबार फिर रचा इतिहास, मजदूरों के हितों में कर दिया बड़ा निर्णय// मात्र एक क्लिक पर मिल सकेगी शिकायतों पर कार्यवाही की जानकारी।।

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भारत के सूचना आयोगों के इतिहास में मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयोग निश्चित तौर पर इस समय टॉप पर है। वर्ष 2019 में अपना पदभार संभालने के बाद सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने ऐतिहासिक निर्णयों की झड़ी सी लगा दी है। उनकी हर एक सुनवाई कुछ न कुछ विशेष आदेश लेकर आती है जो न केवल अपीलकर्ता को सूचना उपलब्ध करवाने से जुड़ी होती है बल्कि आरटीआई कानून में धारा 4 जिसमें ज्यादातर जानकारी सार्वजनिक करने की मंशा छिपी है उसे लागू करने का हर संभव प्रयास किया जा रहा है। अब तक दर्जनों ऐसे निर्णय आए हैं जिसमें धारा 4 के तहत संपूर्ण मध्यप्रदेश में जानकारी सार्वजनिक करने के आदेश दिए गए हैं।
3 माह के भीतर मनरेगा लोकपाल के आदेश से जुड़ी  समस्त जानकारी संपूर्ण प्रदेश में करें सार्वजनिक  -सूचना आयुक्त राहुल सिंह
   दिनांक 23 दिसंबर 2020 के अपने एक ऐतिहासिक सुनवाई में मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने पुष्पराज तिवारी बनाम लोकपाल मनरेगा रीवा मामले पर अपना ऐतिहासिक फैसला देते हुए सिविल प्रक्रिया संहिता 1960 और आरटीआई की धारा 18 और धारा 19(8) की शक्तियों का प्रयोग करते हुए प्रमुख सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग मध्यप्रदेश शासन को उत्तरदाई मानते हुए आदेशित किया कि लोकपाल मनरेगा से जुड़ी समस्त शिकायतों की जिलेवार ब्लॉकबार एवं पंचायतवार व्यवस्था सुनिश्चित करते हुए स्पष्ट लिंक देकर आदेश के 3 महीने के भीतर समस्त शिकायतों की जानकारी जिनका निर्णय हो चुका है अथवा जो प्रक्रियाधीन है पंचायत के वेब पोर्टल पर सार्वजनिक कर सूचित करें।
लोकपाल मनरेगा का  अजीबोगरीब तर्क आरटीआई कानून से बाहर है
   इस बीच सुनवाई के दौरान रीवा मध्य प्रदेश  के त्योंथर ब्लॉक की ग्राम पंचायत डाढ़ के निवासी सामाजिक कार्यकर्ता पुष्पराज तिवारी ने बताया कि उन्होंने लोकपाल मनरेगा में 10 वर्ष पहले शिकायत की थी लेकिन आज तक उन शिकायतों पर क्या जांच हुई और क्या कार्यवाही हुई इसकी कोई जानकारी उन्हें उपलब्ध नहीं हो पाई जबकि दर्जनों बार वह रीवा लोकपाल मनरेगा कार्यालय, लोकायुक्त कार्यालय रीवा एवं भोपाल पत्राचार भी कर चुके हैं और कई बार व्यक्तिगत तौर पर पेशी में भी उपस्थित हुए हैं। लेकिन इसके बावजूद भी उन्हें जानकारी नहीं दी गई और बताया गया कि लोकपाल मनरेगा लोक प्राधिकारी एवं आरटीआई की धारा 2(एच) से बाहर है और लोक सूचना अधिकारी की कोई व्यवस्था नहीं है।
लोकपाल मनरेगा अधिनियम से स्पष्ट है की लोकपाल मनरेगा आरटीआई कानून के दायरे में – राहुल सिंह
   इस पर अपना ऐतिहासिक निर्णय सुनाते हुए सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने बताया कि लोकपाल मनरेगा अधिनियम में यह भली-भांति स्पष्ट है कि लोकपाल मनरेगा आरटीआई कानून के दायरे में आता है और हर एक कार्यालय में लोक सूचना अधिकारी नियुक्त किया जाना चाहिए परंतु जिस प्रकार मजदूरों के शिकायतों के आवेदन पर क्या कार्यवाही हुई इसकी जानकारी के लिए लगाई गई आरटीआई को लोकपाल मनरेगा और लोकायुक्त, पंचायत विभाग के बीच में एक फुटबॉल की पास की तरह आवेदन को इधर से उधर भेज दिया गया इससे साफ जाहिर है कि न तो लोकपाल मनरेगा न ही लोकायुक्त और न ही पंचायत विभाग कोई जिम्मेदारी पूर्ण कार्य कर रहे जो काफी दुर्भाग्यपूर्ण है। कोरोना लॉक डाउन के समय जिस प्रकार मजदूरों के साथ अमानवीय समस्या हुई उस के तौर पर भी देखा जाए तो यह स्पष्ट है कि मजदूरों को लेकर कानून तो बहुत सख्त बनाए गए हैं लेकिन उनका क्रियान्वयन वास्तविक धरातल पर लगभग शून्य के तुल्य है।
क्या होंगे इस आदेश के दूरगामी परिणाम?
   जाहिर है जो यह आदेश दिया गया है इसके काफी दूरगामी परिणाम सामने आएंगे। जिस प्रकार बिहार सरकार में लोकपाल मनरेगा से संबंधित समस्त जानकारी, शिकायतों का विवरण, शिकायतों पर हुई कार्यवाही उसके निराकरण करने की समय सीमा आदि सभी जानकारी वेब पोर्टल पर स्पष्ट लिंक देकर साझा की जाती है ठीक वैसे ही यदि यह व्यवस्था संपूर्ण मध्यप्रदेश में लागू होती है तो इससे पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी।
कितने दिनों में लोकपाल की शिकायतों का होना चाहिए निराकरण?
     लोकपाल मनरेगा के कानून काफी सख्त हैं जिसमें किसी भी मजदूर के द्वारा की गई शिकायत का निराकरण 15 दिवस के भीतर किया जाना सुनिश्चित किया गया है जबकि यदि शिकायतें गंभीर किस्म की हैं तो उसका निराकरण अधिकतम 45 दिन के भीतर किया जाएगा। लेकिन जिस प्रकार पुष्पराज तिवारी बनाम लोकपाल मनरेगा के इस प्रकरण में देखा गया है कि आवेदक के द्वारा स्पष्ट तौर पर उल्लेख किया गया कि उनकी 10 वर्षों से शिकायत लोकपाल मनरेगा कार्यालय रीवा में लंबित है और उस शिकायत को कभी लोकायुक्त और कभी पंचायत विभाग में एक फुटबॉल की तरह पास देकर इधर से उधर भटकाया गया है लेकिन कोई कार्यवाही नहीं की गई है। इससे साफ जाहिर है कि इस आदेश के उपरांत हर शिकायत पर क्या कार्यवाही हो रही है, कब वह शिकायत दर्ज की गई, 15 दिवस के अंदर सामान्य शिकायत का निराकरण हुआ अथवा नहीं और यदि शिकायत गंभीर है तो क्या उसका निराकरण 45 दिवस के भीतर हुआ है अथवा नहीं यह समस्त जानकारी संपूर्ण मध्यप्रदेश के परिपेक्ष में मात्र वेबपोर्टल पर एक क्लिक पर मिल जाएगी जिससे मजदूरों के शोषण पर काफी हद तक रोक लग सकती है।
सूचना आयोग में वॉलिंटियर्स की मदद से आ रहे ऐतिहासिक परिवर्तन
     इस आदेश पर रिसर्च करने और आदेश को मूर्तरूप में लाने में आरटीआई वॉलिंटियर्स के तौर पर कार्य करने वाले अमीश पटेल का बहुत विशेष योगदान रहा है जिन्होंने मामले को पर शोध कर सूचना आयुक्त राहुल सिंह के मार्गदर्शन में लिपिबद्ध किया है।

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