MP//Rewa// गो-कैबिनेट लापता, 3000 गोशालाएं हवा हवाई, बढ़ रही पशु क्रूरता // गोरक्षक बने गौभक्षक, गोमाता बनी राजनीतिक पशु // गौमाताओं की हालत दिन प्रतिदिन हो रही खराब// अवैध बाड़ों का कसा शिकंजा, गौशाला की राशि भ्रष्टाचार की बलि चढ़ी ।।

जहां पूरे विश्व के लोग अंग्रेजी नव वर्ष 2021 की खुशियां मना रहे होंगे और मौज मस्ती में डूबे होंगे तो शायद बेजुबान मूक मवेशियों के साथ क्या घटित हो रहा है यह कोई सोच नहीं रहा होगा। स्वाभाविक है इसके बारे में कोई सोचेगा ही क्यों।
दुग्ध और मीट उत्पाद के लिए बढ़ाई जाती है पशुओं की संख्या
जहां एक तरफ विश्व में बहुतायत पश्चिमी देश और साथ में अन्य अरेबियन और नार्थ ईस्ट एशियन लोग पशुओं के मीट पर ही केंद्रित हैं और इस बाबत मात्र मीट उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए पशुओं की संख्या बढ़ाई जाती है और उनकी कटाई की जाती है वहीं भारत में जहां इस उद्योग के वास्ते मवेशियों का उपयोग किया जाता है वही दुग्ध उत्पाद की बढ़ती माग के चलते भी इनकी संख्या दिनों दिन बढ़ती जा रही है। क्योंकि खेती किसानी और कृषि संबंधी अन्य व्यवसाय में पशुओं की उपयोगिता लगभग न के बराबर हो गई है ऐसे में इनकी जमकर तस्करी होती है और मांस व्यापार के लिए भारत से लेकर बांग्लादेश तक यहां तक कि समुद्र के रास्ते इन्हें भेजा जाता है। मानवीय दूध उत्पाद खाने की आवश्यकता के चलते शहरों और ग्रामों में बढ़े हुए मवेशियों की संख्या से इन्हें बेसहारा छोड़ दिया जाता है जो जगह जगह मूक बेजुबान प्राणी खेती किसानी में भी नुकसान पहुंचाते हैं। जिसकी वजह से लोग इनके साथ क्रूरता का व्यवहार भी करते हैं।
किन किन प्रकार की क्रूरता का सामना करना पड़ता है इन बेजुबानों को?
आए दिन अवैध बाड़ों में कैद कर दिया जाना, चल पशु तस्करी करना, ट्रकों में भरकर तस्करी करना, मुंह तार से बांध दिया जाना, टांगे-कुल्हाड़ी से वार करना और यहां तक कि जलप्रपात घाटियों और नहरों में भी फेंक दिया जाना यह सब मध्य प्रदेश में कोई नया नहीं है। इस प्रकार की क्रूरता की वारदातें आज आम हो चुकी हैं। अब सवाल यह है कि पशु के अधिकार के लिए लड़ने वाली संस्थाएं और भारत की दक्षिणपंथी पार्टियां जो गौमाता के प्रेम और सुरक्षा करने का नाटक करती हैं वह चुप क्यों है? सरकारी खजाना खाली करने के नाम पर गौशालाओं का निर्माण, गौशालाओं और गौ माताओं के लिए एनजीओ के नाम पर लाखों का फण्ड और सब्सिडी और पता नहीं क्या-क्या योजनाएं मात्र कागजों तक ही सिमट कर रह गई है।
3000 गौशालाओं का सपना मात्र सपना ही रह गया
इसके पूर्व मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार ने 3000 गौशालाऐं बनाने की घोषणा की थी जिसका कार्य चल ही रहा है लेकिन शिवराज सिंह की भाजपा सरकार आने के बाद मात्र घोषणाएं हो रही है काम कहीं दिख नहीं रहा है। जिसकी वजह से जहां एक तरफ किसान फसल नुकसानी से परेशान है वहीं दूसरी तरफ इन मूक बेजुबान पशुओं की दुर्दशा हो चली है। लगता नहीं है कि भारत में कभी गोवंश को पूजा जाता था और उन्हें देवतुल्य माना जाता था। आज गौ माता की स्थित देख कर ऐसा लगता है जैसे भारत में गोवंश सदैव से ही दुत्कारे जाते रहे हों। आज इनकी इस दुर्दशा के पीछे यदि कोई सबसे अधिक जिम्मेदार है वह दुग्ध उत्पाद पर आधारित भारत का समाज जो मात्र दूध तो खाता है लेकिन उसे गौमाता से कोई लेना देना नहीं है। वहीं दूसरी तरफ शासन सत्ता पर बैठी गोभक्तों सरकार है जो मात्र गौमाता के नाम पर वोट बैंक की राजनीति तो करती हैं लेकिन वास्तविक धरातल पर आज तक उनके लिए कुछ किया नहीं है।
आज जबकि वर्ष 2021 लग चुका है ऐसे में स्वाभाविक तौर पर यह प्रश्न उठते हैं कि आगे आने वाले समय में भारत की भूमि पर जहां गौमाता को पूजा जाता था उसकी क्या स्थिति होगी? उसे क्या हक मिलेगा? उसे कौन सी सुरक्षा मिलेगी?

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