शिक्षा माफिया का गंदा खेल प्रशासनिक भ्रष्टाचार का घोल मेल

अखिलेश कुमार शर्मा मो. नं. -7999140850
शहडोल| देखा जाए तो शहडोल एक आदिवासी क्षेत्र है जहां नेतागिरी का व प्रशासनिक तंत्र का महत्वपूर्ण योगदान होना चाहिए प्रशासनिक व जनप्रतिनिधियों का अपने कर्तव्यों के प्रति संवेदनशील होना चाहिए परंतु किसी भी प्रकार से शहडोल जिले में ना ही प्रशासनिक और ना ही राजनीतिक सहयोग आदिवासी क्षेत्र को प्राप्त होता है, इसी विषय अंतर्गत शिक्षा विभाग का दुरुपयोग सामने आया है,जहां नियम कायदों को दरकिनार करते हुए अपराधी व्यक्तियों को प्रशासनिक सेवा का मौका दिया जा रहा है, मामला यह है कि तत्कालीन कलेक्टर श्री नीरज दुबे ने संजय पाठक व विक्रम सिंह सिंगर पर धारा 1832/2011 राज्य बनाम संजय पाठक अन्य के दिनांक 5-10-2019 को निर्णय पारित करते हुए मध्य प्रदेश मान्यता प्राप्त परीक्षा अधिनियम 1936 की धारा 4 में 6 माह के कठोर कारावास से दंडित किया गया है इसी विषय को लेकर के विक्रम व संजय ने माननीय शहडोल न्यायालय में अपील की है जिस अपील को माननीय न्यायालय ने स्वीकार किया है मगर अभी तक निर्णय नहीं दिया है अर्थात तत्कालीन कलेक्टर श्री नीरज दुबे जी जी का निर्णय अभी तक प्रभाव सील होता है वर्तमान में नियम अनुसार संजय पाठक विक्रम सिंह सिंगर को अपराधी ही पाया जाना चाहिए तथा दोनों को किसी भी प्रशासनिक सेवाओं से मुक्त रखा जाना चाहिए जब तक माननीय न्यायालय का आदेश न आ जाए परंतु इसके विपरीत दोनों को ही प्रशासनिक सेवा का मौका दिया जा रहा है वहीं संजय पाठक ग्राम कोटमा शासकीय स्कूल वा विक्रम सिंह शासकीय कन्या स्कूल शहडोल मैं अपनी सेवाएं दे रहे हैं यह विषय प्रशासनिक तंत्र पर एक बड़ा प्रश्न लगाता है कि आखिर कैसे कलेक्टर द्वारा 6 माह के कठोर कारावास से दंडित व्यक्तियों को प्रशासनिक सेवा का मौका किसके आशिर्वाद से प्रदान किया जा रहा है
इनका कहना है –
जो भी मामला आप बता रहे हैं मुझे वर्डशाप पर भेजिए मै देखता हूँ |
डॉ. सतेन्द्र सिंह कलेक्टर शहडोल
जो भी मामला है आपने बताया है तो जांच करवाई जायेगी दोनो पर कार्यवाही होगी |
नरेश पाल कमिश्नर संभाग शहडोल

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