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MP//Rewa// सोशल मीडिया के माध्यमों से आरटीआई कानून को मजबूत बनाने चलाई जाए मुहिम – सूचना आयुक्त राहुल सिंह

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आरटीआई कानून को जन-जन तक पहुंचाने में सोशल मीडिया प्लेटफार्म आज बहुत महत्वपूर्ण रोल अदा कर रहे हैं। ऑनलाइन मीटिंग वेबीनार फेसबुक टि्वटर व्हाट्सएप इंस्टाग्राम टेलीग्राम आदि माध्यमों से सूचना का आदान प्रदान बहुत ही तेजी से हो रहा है जिसमें लोग जुड़ कर अपनी समस्याओं का तत्काल समाधान पाते हैं और साथ में नए नए नवाचार भी किए जा रहे हैं। 

     यदि मध्यप्रदेश की बात की जाए तो नियमित रूप से प्रत्येक रविवार को आयोजित होने वाला राष्ट्रीय जूम मीटिंग वेबीनार न केवल देश बल्कि विदेश में भी धूम मचा हुआ है। इस वेबीनार में जहां देश के विभिन्न कोनों से लोग जुड़ रहे हैं वहीं आस्ट्रेलिया यूएसए और यूरोप के देशों से भी प्रवासी भारतीय सम्मिलित होकर अपने विचारों को रखते हैं और व्यवस्था में सुधार कैसे हो इस विषय पर मंथन किया जाता है।

कोर्ट के निर्णय आरटीआई कानून की मंशा के विरुद्ध, स्थगन से सूचना आयुक्त की शक्तियां प्रभावित – सूचना आयुक्त राहुल सिंह

   कार्यक्रम के दौरान परिचर्चा में अपना विचार व्यक्त करते हुए मध्य प्रदेश के वर्तमान राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने कहा कि आरटीआई से जुड़े हुए मामलों में कोर्ट को स्थगन और हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए इससे कानून कमजोर हो रहा है। हाई कोर्ट के आर्डर आरटीआई कानून के विरुद्ध होते हैं और इसके लिए हम सबको मिलकर सामूहिक प्रयास करना पड़ेगा जिससे कोर्ट को यह पता चले कि यह कानून जनता का कानून है जनता के लिए है और पारदर्शिता लाने के लिए इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए। राहुल सिंह का कहना था कि कई मामलों में तो कोर्ट में बैठे हुए जजों को आदेश के बारे में विस्तार से बताया भी नहीं जाता है जिसकी वजह से मामलों में स्थगन दे दिया जाता है और कई बार आरटीआई कानून के विरुद्ध आदेश आ जाते हैं। इसके लिए आरटीआई कानून के पक्ष में कार्य करने वाले कार्यकर्ताओं को आगे आकर एक मुहिम चलानी पड़ेगी तभी आरटीआई कानून को बचाया जा सकता है। 

  सोशल मीडिया के माध्यमों से आरटीआई कानून को मजबूत बनाने चलाई जाए मुहिम – राहुल सिंह

   वहीं सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने कहा कि आज सोशल मीडिया की पहुंच हर व्यक्ति तक हो गई है जिसका सहारा लेकर छोटे-छोटे वीडियो और संदेश बनाकर इंटरएक्टिव तरीके से व्हाट्सएप फेसबुक ट्विटर आदि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म में शेयर किया जाना चाहिए जिसमें आरटीआई कानून के माध्यम से जो नवाचार किए जा रहे हैं और जो लाभ आम जनता को मिल रहा है उसके सकारात्मक पहलुओं को प्रोजेक्ट किया जाना चाहिए।  उन्होंने कहा कि इसके लिए एक टीम वर्क की जरूरत पड़ेगी जिसमें मास मीडिया से जुड़े हुए लोग सहायता कर सकते हैं। मास मीडिया में छोटी-छोटी क्लिप्स बनाकर शेयर करने और आरटीआई कानून की विशेषता बताने वाले वीडियो शेयर करने से लोगों में जागरूकता बढ़ेगी और इसे एक मास मूवमेंट की तरह चलाया जा सकता है

   धारा 18(4) के तहत सूचना आयुक्त को महत्वपूर्ण दस्तावेजों की जांच का अधिकार – आत्मदीप

   दिनांक 17 जनवरी 2021 को आयोजित राष्ट्रीय जूम मीटिंग वेबीनार के दौरान पूर्व राज्य सूचना आयुक्त आत्मदीप ने कहा कि धारा 18  के तहत सूचना आयुक्त के पास ऐसी शक्तियां है जिसके तहत वह हलफनामे में लोक सूचना अधिकारी अथवा लोक प्राधिकारी के द्वारा लिखित स्टेटमेंट लेकर जो भी आवश्यक ऐसे समस्त दस्तावेजों की जांच कर सकता है। धारा 18(4) के तहत सूचना आयुक्त राज्य विधान मंडल एवं संसद मंडल के असंगत होते हुए भी ऐसे समस्त दस्तावेजों को तलब कर सकता है और जांच कर सकता है जो आरटीआई कानून के अधीन होते हुए किसी लोक प्राधिकारी के द्वारा संधारित किए जाते हैं। ऐसे में कोई लोक प्राधिकारी आरटीआई कानून के तहत आने वाले दस्तावेजों को देने से मना नहीं कर सकता चाहे भले ही ऐसे दस्तावेज राज्य विधानमंडल अथवा संसद को भी न दिए जाते हों। इस प्रकार धारा 18 के तहत सूचना आयोग के पास ऐसे विरले शक्तियां मौजूद हैं जिसका प्रयोग कर आरटीआई कानून का इंप्लीमेंटेशन करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की जा सकती है।

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