प्रभु के चरणों का आश्रय प्राप्त करते ही बड़े-बड़े पापियों का भी हो जाता है तरण तारण- शिवमूरत देव जी महाराज

31 जनवरी से चल रही मातृ सदन ग्राम टेंकर मझौली सीधी मे संगीत मय श्रीमद् भागवत कथा मे वृंदावन से पधारे राष्ट्रीय प्रवक्ता शिवमूरत देव जी महाराज ने कथा के महात्म को श्रवण कराते हुए कहा कि
*भाग्योदयेन बहुजन्म समर्जितेन।*
*सत्संगमम् च लभते पुरुषो यदा वै।*
*अज्ञान हेतुकृत मोह मदान्धकारनाशं विधाय हि तदो दयते विवेक ।*
एक जन्म का नही अनन्त जन्मों के भाग्य जब उदय होते है तो ही सत्संग कथा और संतो के प्रवचन सुनने इच्छा हो पाती हो । ये कृपा गुरु और गोविन्द की होती है। जो हमें ऐसे बचन सुनाने और सुनने का मौका मिलता है महात्म का वर्णन करते हुए भक्ति नारद संवाद एवं धुंधकारी मोक्ष की कथा श्रवण कराते हुए बताया की भक्ति महारानी अपने दोनों पुत्रों के साथ कलिकाल के प्रकोप के कारण अत्यंत दुखी थी जर्जर अवस्था को प्राप्त हो गई थी नारद जैसे संत का सानिध्य प्राप्त करते ही उनके दुख दूर हो गए व्यक्ति जाने अनजाने में कोई भी पाप करें वह पाप ही होता है धुंधकारी बड़ा ही दुष्ट और दुराचारी पापी था कुलटा स्त्रियों ने उसका वध कर दिया मृत्यु के बाद प्रेत बना लेकिन भागवत कथा के श्रवण मात्र से उसका तरण तारण हो गया और भगवान के पार्षद बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ कथा मन की व्यथा को नष्ट कर देती है इसलिए भगवान की कथा कही भी हो बिना बुलाए जाना चाहिए और श्रवण करना चाहिए कलिकाल में भगवान की कथा और प्रभु का नाम ही प्राणी के उद्धार का उपाय है जहां भी रहिए जैसी भी स्थिति हो पर परमात्मा का नाम लेते रहना चाहिए भगवान की लीलाओं का रसास्वादन करते हुए भाव विभोर हुए।

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