मामला भ्रष्ट प्रभारी सहायक आयुक्त एमएस अंसारी की कार्यप्रणाली का करोड़ों के गबन का मामला यू दबा, बापू की पुण्यतिथि पर मुख्यमंत्री शिवराज ने हटाया था अंसारी को

शहडोल:-“चट मंगनी-पट ब्याह”कुछ इस अंदाज में आदिवासी विभाग शहडोल के अंसारी जी ने अपनी लक्ष्य पूर्ति पर काम करना चालू कर दिया है। अभी कुछ ही दिन हुए तृतीय वर्ग कर्मचारी, मंडल संयोजक सोहागपुर अंसारी जो इस समय सहायक आयुक्त कार्यालय के प्रभारी सहायक आयुक्त पद को अपने दांवपेच से हथिया लिए हैं, प्रभार लेते ही तत्काल उन्होंने 30 तारीख को सूचना के अधिकार की एक अपील की सुनवाई करते हुए कथित तौर पर करोड़ों रुपए के गबन के केस पर प्रकरण नस्तीवध कर दिया। जबकि आवेदन के निराकरण हेतु पर्याप्त समय उपलब्ध रहा। प्राप्त जानकारी के अनुसार आरटीआई कार्यकर्ता नरेंद्र सिंह गहरवार ने विकासखंड बुढार में कौशल विकास उन्नयन के संबंध में वर्ष 2014 की छात्रों के प्रशिक्षण संबंधी दस्तावेजों की जानकारी चाही थी जिस पर जानकारी न मिलने से अपीलीय अधिकारी सहायक आयुक्त आदिवासी विभाग शहडोल के समक्ष 11 जनवरी 2021 को अपील प्रस्तुत किया। जिसके निराकरण के लिए तत्कालीन सहायक आयुक्त राजेंद्र श्रोति ने संबंधित अधिकारी से जवाब तलब किया था। इसी दौरान अचानक सहायक आयुक्त राजेंद्र श्रोती का स्थानांतरण अनंत्र हो गया और शहडोल आदिवासी मुख्यालय में कोई अधिकारी भी नियुक्त नहीं हुआ। रिक्त प्रभार पद पर बहुचर्चित मंडल संयोजक सोहागपुर एम अंसारी ने नेताओं से सौदा करके तृतीय वर्ग कर्मचारी होते हुए भी सहायक आयुक्त के पद पर जा धमके और प्रभार लेने के तत्काल बाद 30 जनवरी को महात्मा गांधी की पुण्यतिथि के अवसर पर अपने भ्रष्टाचार का शुभारंभ किया।उन्होंने तलब किए गए तत्कालीन खंड शिक्षा अधिकारी अशोक शर्मा के 30 तारीख को ही अपील प्रकरण पर जवाब प्राप्त किया और बिना आवेदक की उपस्थिति के फैसला भी लिख डाला। जवाब भी बेहद रोचक रहा। करोड़ों रुपए के गबन के संदेहास्पद मामले में चाहे गए प्रपत्र के मामले पर प्रभारी सहायक आयुक्त अंसारी ने निर्णय दिया की बुढार के अशोककुमार शर्मा द्वारा बताया गया कि आवेदक द्वारा जैतपुर में विभिन्न ट्रेडों में प्रशिक्षण हेतु छात्रों के आवेदन इत्यादि के मामले में जवाब दिया गया कि उक्त समय पर प्रशिक्षण के लिए संकुल प्राचार्य/ हाई स्कूल प्राचार्य श्री शिक्षित बेरोजगार पांचवी, आठवीं, दसवीं, बारहवीं उत्तीर्ण आदिवासी युवक युवतियों को नाम मांग कर सूची मंगाई गई थी और उनकी काउंसलिंग की गई थी जो आवेदक इच्छुक थे उन्हें विभिन्न ट्रेडों में प्रशिक्षण हेतु जिले के आईटीआई, पॉलिटेक्निक, आरसीटी ट्रेनिंग सेंटर भेजकर प्रशिक्षण दिलाया गया था। आवेदकों ने फार्म आदि नहीं भरा था। इस तरह एमएस अंसारी सहायक आयुक्त ने अपील का निराकरण करते हुए प्रकरण नस्तीवध करने का आदेश जारी किया।। आनंद की बात यह है कि जिस अंसारी की पत्नी जुबेदा गैर कानूनी तरीके से प्राइमरी शिक्षक होने के बाद भी हाई स्कूल में अंसारी के संरक्षण पर शिक्षक बनी हुई हैं वे अंसारी 30 तारीख को जवाब प्राप्त करते हैं और 30 तारीख को ही महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर फैसला सुना देते हैं। जिसमें आवेदक को उपस्थित होना उनके लिए मायने नहीं रखता। इससे लगता है भ्रष्टाचार की शिखर पर अपनी योग्यता से पहुंचे एमएस अंसारी बड़ी तेजी से “चट मंगनी पट ब्याह” के अंदाज पर भ्रष्ट फाइलों को निपटाने में लगे हुए हैं। पद बिकता है बोलो खरीदोगे के आधार पर अपना रास्ता तय करके आए तृतीय तृतीय वर्ग कर्मचारी एमएस अंसारी प्रभारी सहायक आयुक्त होने के बाद मार्च तक तमाम भ्रष्टाचार नस्ती बंद कर देंगे कोई बड़ी बात नहीं है ताकि बजट सत्र के अंदर ही लक्ष्य पूर्ति हो जाए। आश्चर्य तो यह है कि जिले का तमाम अमला एक तृतीय वर्ग कर्मचारी को सहायक आयुक्त पद पर आसानी से न सिर्फ स्वीकार कर रहा है बल्कि उसके आदेश को सिर माथे में लेते हुए स्वागत करता है। रह गई कार्यप्रणाली की बात महात्मा गांधी के पुण्यतिथि पर भ्रष्टाचार का मोहर का यह उनका दस्तावेज उनकी योग्यता को प्रमाणित करता है।। यह इनकी योग्यता ही थी के केलमनिया में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को भ्रमित जानकारी देने के कारण मुख्यमंत्री ने इन्हें पद से हटाने का निर्देश दिया था किंतु मुख्यमंत्री का आदेश की परवाह किए बिना इतने बड़े पद पर करोड़ों के भ्रष्टाचार के लिए तृतीय वर्ग कर्मचारी सहायक आयुक्त बना दिए गए ऐसा शिक्षकों का समूह का एक वर्ग मानता है देखना है बजट सत्र के अंदर ही अंदर कितने करोड़ों का कारोबार आदिवासी विभाग के भ्रष्ट नायक द्वारा किया जाता है


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