आखिर किसके संरक्षण में महिला डॉन बन रही है पति हत्या की संदेही निरुपमा… ?

पुलिस और प्रशासन के दलबल के सामने खुलकर किया हंगामा,
हरिजन आदिवासी महिलाओं को भी पाल रखा है उसने
शहडोल।कोतवाली परिसर के बगल में स्थित पांडे परिवार इन दिनों दहशत की जिंदगी जी रहा है । पुलिस अधीक्षक शहडोल प्रेषित पत्र मे षड्यंत्र करके आपराधिक मुकदमों में फंसाए जाने और समूह बनाकर हमला किए जाने की शिकायत में कहा गया कि 28 जनवरी
21 को दोपहर 2:45 बजे अंडर ब्रिज रोड स्थित दुकान के सामने हरिओम के मकान में अवैध रूप से निर्माण करने वाली निरुपमा ने कुछ दिन पहले दुकान के सामने एक ट्रक ईट गिरा कर दुकान पर जाम कर दिया था।जिस पर थाने के निर्देश पर एक पुलिस सिपाही के साथ मौका स्थल पर गए थे और जब दुकान की ताला खोला तो निरुपमा ने गाली गलौज करते हुए ईट फेंक कर वार किया।
इसी मामले मे आवेदन पर अनुविभागीय दंडाधिकारी सोहागपुर द्वारा पुलिस कार्यवाही हेतु निर्देशित किया गया , एक हफ्ते बाद थाने के बगल में पुलिस राहत देती नहीं दिखाई दे रही है तो क्या इस मामले को भी दबाने के दिशा में काम हो रहा है, जबकि 28 जनवरी को जब दोपहर बाद दुकान के एक परिसर आगे गली पर बत्रा परिवार के अतिक्रमण पर जिला पुलिस और प्रशासन पूरा अमला अपने दल-बल के साथ कार्यवाही कर रहा था,उसी वक्त दुकान के सामने ईटा उतारे जाने पर ट्रैक्टर वाले से आपत्ति करने पर निरुपमा, अपने एससी-एसटी वर्ग की महिलाओं को साथ लाकर अपने बच्चों सहित पहले पत्थर फेंक कर मारा बाद में गाली-गलौज करती रही, क्योंकि महिलाएं हैं और साथ में अनुसूचित जाति जनजाति की महिलाएं भी हैं।अतःसंपूर्ण परिस्थिति का रिपोर्ट दर्ज कराया गया ,साथ ही घटना से संबंधित पूरी पृष्ठभूमि भी ड्यूटी पर तैनात नित्यानंद पांडे को बताया ताकि मामले की गंभीरता के हिसाब से परिवार को सुरक्षा दी जा सके।
किंतु शिकायत पर उचित कार्यवाही न करते हुए 155 की शिकायत दर्ज कर ली गई।जबकि जिस प्रकार से जिले के बल जहां पर बगल में पुलिस प्रशासनका दल बल जमा हो वहां पर अपराधिक प्रवृत्ति की महिला अपने गिरोह के साथ हमला करती है, स्वाभाविक रूप से समझा जा सकता है कि उसका मनोबल किसी भी हद तक जानमाल का खतरा पैदा कर सकती है।
इस आशय की शिकायत हरिओम के पिता ओमप्रकाश पांडे (सेवानिवृत्त चुनाव पर्यवेक्षक शहडोल) द्वारा भी 29 जनवरी को शिकायत भेजकर कार्रवाई चाही है जिसमें कहा गया कि पुत्री रेनू के गुमशुदा कराने में तथा पुत्र श्रीकृष्ण की जो निरुपमा का पति था, पति की हत्या कराने में निरुपमा बड़ा हाथ है|किंतु पिछले चार-पांच साल से स्थानीय पुलिस प्रकरण में कोई कार्यवाही नहीं कर पाई। इन हत्याओं की संदेही निरुपमा मिश्रा अक्सर नए नए तरीके से मेरे परिवार के ऊपर प्राणघातक हमले का षड्यंत्र रचती रहती है यह पुलिस की लापरवाही को सिद्ध करती है कि थाना कोतवाली के बगल में अपने आपराधिक मनोवृति को संरक्षित पाकर अब खुलेआम हमला करने पर उतारू है और परिवार थाना परिसर के बगल में रहते हुए भी उस वक्त सार्वजनिक प्रताड़ना का शिकार हो गया जबकि जिला पुलिस और प्रशासन का बल मौका स्थल से कोई 200 मीटर की दूरी पर अवैध निर्माण को हटाए जाने के लिए उपस्थित रहा…। जो यह प्रमाणित करता है कि उपद्रवी किस्म की अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग की महिलाओं को साथ लेकर बच्चों को भी अपराधिक मनोवृति की ओर झूठी मनगढ़ंत कानूनी कार्रवाईओं का वह प्रशिक्षण दे रही है…। जो आसपास के समाज के लिए भी खतरा है।क्योंकि उसने जिस प्रकार से संरक्षण पाकर खुलेआम उपद्रव करना चालू कर दिया है। उससे पास पड़ोस के लोग भी भयभीत होकर उसके खिलाफ कोई नहीं जाना चाहता।गौरतलब है नगर पालिका परिषद ने उक्त निर्माण को गलत ठहराते हुए नोटिस जारी किए हैं किंतु अवैध रूप से संगठित ईट और पत्थर को दुकान के सामने पड़े रहने से दुकानदार को अपनी आजीविका चलाने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है


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