अध्यापक संवर्ग के कर्मचारियों का ट्रांसफर कराने का हुआ सौदा भ्रष्टाचार करने को खोला गया नया अकाउंट

शहडोल:- वैसे देखा जाए तो शिक्षा विभाग देश का महत्वपूर्ण विभाग है जोकि देश का महत्वपूर्ण आधार कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति न होगी क्योंकि शिक्षा ही व्यक्ति समाज व राष्ट्र का निर्माण करती है मगर जब शिक्षा विभाग में ही गोलमेल भ्रष्टाचार और लालच का खेल शुरू हो जाए तो व्यक्ति समाज तथा राष्ट्र की दशा और दिशा कैसी होगी इसकी कल्पना मात्र ही भयंकर परिणामों को इंगित करते हैं विषय अंतर्गत शहडोल जिले में अध्यापक संवर्ग के कर्मचारियों का स्थानांतरण हुआ है एवं कुछ अध्यापकों का स्थानांतरण नहीं हो सका है और जिन का स्थानांतरण नहीं हुआ है उसका कारण यह है कि उन अध्यापकों के मंशा अनुसार स्थान नहीं प्राप्त हुआ है बस यहीं से शुरू होता है भ्रष्टाचार और लालच का खेल अध्यापकों को उनके मंशा अनुसार स्थानांतरण करने के लिए निलंबन का खेल खेला जाता है तात्पर्य है कि जिस अध्यापक का उनकी मंशा अनुसार स्थानांतरण नहीं हुआ है उन्हीं की मंशा से उन्हें निलंबित कर दिया जाता है और निलंबन से बहाल करते हुए उन्हीं के इच्छित स्थान पर पद स्थापित कर दिया जाता है जैसा कि वर्तमान में प्री प्राइमरी टीचर गुलाब गुप्ता को सोहागपुर में पदस्थ किया गया है एक जांच का विषय है?
अकास्मिक मद की राशि में अनिमियता:-
आदिम जाति कल्याण विभाग के पूर्व सहायक आयुक्त नरोत्तम वरकडे के समय ढाई लाख रुपए प्रति छात्रावास आश्रम को आकस्मिक मद की राशि शासन द्वारा प्रदान की गई थी जोकि तत्कालीन एसी के द्वारा सभी पीटीए (पेरेंट्स टीचर असोसिएशन) के खाते में जमा करा दी गई थी परंतु नरोत्तम वरकडे के स्थानांतरण के बाद वर्तमान सहायक आयुक्त आर.के श्रोती के जिला स्तर से खरीदी करने का आदेश जारी करते हुए राशि वापस मंगाई एवं एसी आर.के श्रोती के द्वारा सिंडिकेट बैंक में कमेंद्र सिंह अधीक्षक आदिवासी बालक छात्रावास शहडोल के नाम से खाता खोला गया है और उक्त राशि को खाते में जमा करा दिया गया है शासन के निर्देशों के अंतर्गत पीटीए को छात्रावास आश्रम की सामग्री क्रय करनी थी परंतु सहायक आयुक्त आर के श्रोती द्वारा हॉस्टल अधीक्षक कामेंद्र सिंह को मोहरा बनाते हुए सामग्री की खरीदी की जा रही है जोकि सामग्री आज तक पूरी प्रदान भी नहीं की गई है जिन स्थानों पर कंप्यूटर है वहां प्रिंटर नदारद है जहां प्रिंटर है वहां कंप्यूटर का अता पता नहीं है छात्रावासों/आश्रम में लगने के लिए सीसीटीवी एलईडी की खरीदी की गई है परंतु देखने योग्य बात यह है कागजों में व खरीदी गई वस्तु किस छात्रावास/आश्रम की शोभा बढ़ा रहे हैं यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण जांच का विषय है ? अत्यंत महत्वपूर्ण बात यह भी है कि आरके श्रोती द्वारा खरीदी शासन के आदेशों के विपरीत किस अधिकार से की जा रही है इस विषय की जांच होना न्याय हित में अति आवश्यक है ।
लालच का खेल 15000 का घोल मेल:-
सभी छात्रावासों/आश्रमों में शासन द्वारा प्रति छात्रावास/आश्रम के रखरखाव के नाम पर प्रति छात्रावासों आश्रमों को 45,000 रुपए की राशि स्वीकृत की गई थी उक्त राशि छात्रावासों को दिया तो गया किंतु सभी छात्रावास अधीक्षकों पर दबाव डालकर 15,000 रुपए की राशि प्रति छात्रावास अधीक्षकों से वसूल किए गए हैं जिसकी सच्चाई रिकॉर्ड खंगालने पर प्रमाणित हो सकती है । उक्त विभाग में तीन संतान वाला पत्र भी काफी तूल पकड़ा था और उस पत्र ने ऐसा बवाल मचाया था कि जिसमें 2 शिक्षकों की मौत भी हो गई थी देखने और समझने योग्य बात यह है कि इतने बड़े भ्रष्टाचार लालच वह मानवता के प्रश्न चिन्हों को कौन अधिकारी मंत्री विधायक सांसद या संबंधित विभाग के उच्च अधिकारी पूर्ण विराम लगा सकते हैं ।
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