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MP//Rewa// 33 वें वेबीनार RTI महबैठक में मूट कोर्ट का हुआ आयोजन // देश के विभिन्न कोनों से सम्मिलित हुए सहभागी // सूचना आयुक्त राहुल सिंह की अध्यक्षता में हुआ आयोजन // पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त शैलेश गांधी और छत्तीसगढ़ सूचना आयुक्त मोहन पवार रहे जज की भूमिका में।। धारा 8(1)(जे) रहा चर्चा का विषय।।

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सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 को जन जन तक पहुंचाने के लिए हर रविवार सुबह 11:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक जूम मीटिंग वेबीनार का आयोजन परंपरागत रूप से किया जा रहा है। इस बीच दिनांक 7 फरवर 2021 को 33 वें सूचना के अधिकार पर राष्ट्रीय महाबैठक का आयोजन किया गया जिसमें देश के विभिन्न कोनों से आरटीआई कार्यकर्ता, सामाजिक क्षेत्र में कार्यरत महानुभाव और साथ में वर्तमान राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह सहित पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त शैलेश गांधी एवं पूर्व छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयुक्त मोहन पवार उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता वर्तमान मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने की जबकि संयोजन एवं प्रबंधन का कार्य आरटीआई एक्टिविस्ट एवं सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी, अधिवक्ता नित्यानंद मिश्रा, एवं छत्तीसगढ़ से एक्टिविस्ट देवेंद्र अग्रवाल के द्वारा किया गया।

   मूट कोर्ट में प्रकरणों का किया गया निपटारा, पीआईओ ने गिनाई अपनी समस्या

   इस बीच कार्यक्रम में मूट कोर्ट का आयोजन किया गया जिसमें छत्तीसगढ़ के पूर्व राज्य सूचना आयुक्त मोहन पवार एवं पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त शैलेश गांधी को सूचना आयुक्त के तौर पर प्रस्तुत किया गया जबकि कार्यक्रम में लोक सूचना अधिकारी के रूप में विरेंद्र कुमार ठक्कर एवं आवेदक के तौर पर राजस्थान से रमेश सुथार सम्मिलित हुए। कार्यक्रम में अन्य सहभागियों ने भी अपनी समस्याएं रखी। इस दौरान आवेदक के तौर पर रमेश सुथार ने सूचना आयुक्त के समक्ष अपना मामला रखा तो वही लोक सूचना अधिकारी के तौर पर उत्तराखंड से सम्मिलित हुए वीरेंद्र कुमार ठक्कर ने निजता और प्राइवेसी की बात करते हुए सूचना देने से इंकार कर दिया और बताया की जानकारी आरटीआई कानून की धारा 8(1)(जे) के तहत गिरीश चंद्र देशपांडे बनाम अन्य द्वारा नहीं जा सकती। इस बीच सूचना आयुक्त के तौर पर शैलेश गांधी ने कहा की धारा 8(1)(जे) का गलत उपयोग कर महत्वपूर्ण जानकारी रोके जाने का प्रयास किया जा रहा है और वह गिरीश चंद्र देशपांडे सहित अन्य जजमेंट, जो की विभिन्न न्यायालयों के द्वारा दिए गए हैं, उससे सहमत नहीं है। शैलेश गांधी ने बताया कि जब भी कोई गिरीश देशपांडे प्रकरण की बात कहें और धारा 8(1)(जे) का हवाला देकर जानकारी छुपाने का प्रयास करें ऐसे में वहां पर आर राजगोपाल प्रकरण का उल्लेख किया जाना चाहिए। श्री गांधी ने कहा की गिरीश चंद्र देशपांडे आरटीआई कानून को खत्म कर रहा है और इसमें संबंधित न्यायालय कानून को खत्म करने में अपना एक विशेष रोल अदा कर रही हैं जो कि देश के लिए काफी दुर्भाग्यपूर्ण है।

  कानून का ज्यादा इंटरप्रिटेशन भी आरटीआई को कमजोर कर रहा है – राहुल सिंह

  इस बीच मामले पर अपनी राय रखते हुए मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयुक्त और कार्यक्रम के अध्यक्ष राहुल सिंह ने कहा कि आज हम गिरीश चंद्र देशपांडे और धारा 8(1)(जे) पर कुछ ज्यादा ही विश्लेषण कर रहे हैं। न्यायालय के इन आदेशों के ज्यादा इंटरप्रिटेशन से भी आरटीआई कानून कमजोर हो रहा है। जहां तक उनका मानना है कि आरटीआई कानून की मंशा ज्यादा से ज्यादा जानकारी आम पब्लिक तक साझा करने की थी जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़े और साथ में भ्रष्टाचार पर लगाम लगे और लोगों को उनका अधिकार मिले। ऐसे में यदि हम 8(1)(जे) और गिरीश चंद देशपांडे आदि मामलों पर ज्यादा फोकस करेंगे तो यह आरटीआई कानून को कमजोर करेगा और लोगों को छोटी से छोटी जानकारी लेने में भी समस्या पैदा होगी। इसलिए यह पूरी तरह से लोक सूचना अधिकारी और सूचना आयोग पर निर्भर करता है कि वह इन मामलों को किस प्रकार से देखता है।  जहां तक उनका मानना है तो कोर्ट के फैसले किसी विशेष परिस्थितियों को लेकर किए जाते हैं इसलिए हर आदेश में एक अलग स्थिति निर्मित होती है जिसको देखते हुए अन्य सूचना आयुक्तों को अपने फैसले देने चाहिए।

 कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, हरियाणा, पंजाब, झारखंड, राजस्थान, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश, केरल, उत्तराखंड आदि विभिन्न राज्यों से आवेदक सम्मिलित हुए।

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