भू माफिया भी चिन्हित है…. अपना भूमाफिया, अपना अतिक्रमण कारी….? बड़ा माफिया कौन..?साधू या शैतान ……

समझने का प्रयास करते हैं…
विशेष संवाददाता शहडोल…….
शहडोल|जिला एवं सत्र न्यायाधीश शहडोल के निवास के ठीक सामने अब एक बोर्ड नजर आता है जो यह दावा करता है यह जमीन पुलिस की आराजी है..।
क्योंकि दावे को अगर सच माना जाए तो जमीन पुलिस की थी, जिस पर अब तक जब तक गोस्वामी जी ने भ्रष्टाचार की इस रामायण को सामने नहीं लाया था; सोने की चमक से चौंधिआया प्रशासन का अमला भ्रमित रहा फिर अपने दल बल के साथ जिला सत्र न्यायाधीश के निवास के सामने अवैध आराजी नगर के बड़े सोने के कारोबारी बंधुओं का कब्जा रहा है। जैसे फीता काटकर के उद्घाटन कर दिया जाता है उसी तरह दीवार तोड़कर कथित अवैध आराजी को पुलिस ने अपनी आराजी घोषित करने वाला बड़ा बोर्ड लगा दिया ताकि सबको मालूम रहे की आराजी पुलिस विभाग की है। इसके पहलेे भी इतनी ही मेहनत से ठीक बगल में पुलिस विभाग ने अपनी आराजी पर कुछ इसी अंदाज पर कब्जा किया था।
किंतु नजूल विभाग गांधी चौराहे में अपनी भूमि पर पूरे ताकत के बाद भी कब्जा करने पर किन शैतानों से परेशान हुआ तो समझने का प्रयास करते हैं। कि क्या-क्या हुआ तत्कालीन तहसीलदार बीके मिश्रा ने अंततः भ्रष्टाचार के चंद्रलोक की चमक से धुंधलाया भू माफिया का चेहरा शासकीय कि किस तरह है उसने नजूल भूमि को हड़प लिया है उसे साफ किया।
हालांकि दो तीन बार जिला न्यायालय में अवैध निर्माण के लिए भू माफिया नेमचंद को दंडित भी किया गया था थक हार कर अंततः नगर पालिका परिषद ने दिनांक 24 सितंबर 2019 को तहसीलदार को पत्र लिखा|

और उसके परिणाम भी सामने आए प्रशासन को शर्म आई और दिनांक 19 अक्टूबर 2019 को भ्रष्टाचार के चंद्रलोक को चमकाने वाले सफेदपोश भूमाफिया
नेमीचंद जैन को बेदखली वारंट जारी हुआ की अवैध भवन गिराया जाएगा ।
इसी बीच हाल में चर्चित आईएएस अधिकारी तत्कालीन कलेक्टर शहडोल ललित दायमा अचानक भ्रष्टाचार के चंद्रलोक की चमक को तलाशने पहुंच गए ,

कहते हैं एक घंटा करें चंद्रलोक के स्वर्ग का आनंद लिया। इसी दौरान कोई उन्हें परेशान ना करें इसके लिए एक घोषित चौकीदार चौकीदारी भी करता रहा। भ्रष्टाचार की चौकीदारी का जो परिणाम आना था। वह आ भी गया नजूल की भूमि पर बना भ्रष्टाचार का चंद्रलोक19 अक्टूबर 2019 में नहीं हटाया जा सका ।
क्योंकि शासन के नेताओंं के पितरसंगठन के चौकीदार वहां चौकीदारी कर रहे थे।
इस तरह कानून की परिभाषा किसी अफलातून ने सिद्ध भी की थी की कानून मकड़ी का जाला है
जिसमें छोटे-मोटे कीट पतंग फस जाते हैं और बड़े जानवर जाले को तोड़ देते हैं।
कभी यह बात हमारे यशस्वी मुख्यमंत्री शिवराज जी की कि “हम जिंदा गाड़ देंगे..” परंपरागत तरीके से झूठी होने लगती है….. हम भी प्रयास किए जहां वह पुलिस बोर्ड गाढ़ा गया , खंभे के नीचे क्या सिर्फ साधु गाड़े गए थे , खोजने का प्रयास किया या शैतान भी गाड़े गए हैं…..?
दरअसल साधु निवास के सोनी बंधु चौकीदार पालना नहीं सीख पाए, जबकि चौकीदार खुलेआम बिकते हैं.. शैतान, भू-माफिया के यहां चौकीदार चौकीदारी भी करते देखेगये, इसलिए भ्रष्टाचार का चंद्रलोक 14 महीने बाद अब भी चमक रहा है। और कहते हैं तत्कालीन नजूल अधिकारी नागदेव ने इस चमक को बनाए रखने में भी अपनी कृपा प्रदान की थी। उन्हें भी रेमंड के सूट जो 14लाख के तो नहीं रहे होंगे, जो हमारे प्रधानमंत्री पहने थे किंतु हैसियत के हिसाब से ठीक उसी तरह उधार दिए गए होंगे।
जैसे हाल में चर्चित आईएएस ललित दायमा ने कलेक्टर रहते हुए भ्रष्टाचार के चंद्रलोक के तहसीलदार द्वारा गिराए जाने के ठीक पहले लाखों की उधार कपड़े खरीदे थे…? यकीन मानिए उधारी अभी भी बाकी ही है महाजन के यहां इतनी महाजनी बनी ही रहती है… जिन्हें शैतानों के यहां उधारी करनी आती है।
अब कोई साधु, महाजन नहीं बन पाया तो यह उसकी गलती थी… अन्यथा जिस प्रकार का बोर्ड जिला एवं सत्र न्यायाधीश के आवास के ठीक सामने लगा है कि “यह आराजी पुलिस विभाग की है” ठीक उसी प्रकार का बोर्ड गांधी चौराहे में भ्रष्टाचारी भू माफिया नेमचंद के चंद्रलोक को हटाने के बाद लगा दिया गया होता कि “यह आराजी नजूल विभाग की है”।
तो क्या अतिक्रमण कारी भी चिन्हित है…, भू माफिया भी चिन्हित है…. अपना भूमाफिया, अपना अतिक्रमण कारी….?

अथवा साधु बढ़ा शैतान…. ?किसमें कितना है दम…..? यह चौकीदारी और चौकीदार नियुक्त करने पर सिद्ध होता है…..। तो क्या साधु चौकीदार नियुक्त नहीं कर पाया.. अयोध्या के राम के लिए कितना चंदा मांगा गया था…. आखिर धर्म का ही तो काम था…. दे देता…, तो क्या साधु की कथितआराजी पर लगा यह बोर्ड नहीं लग पाता….?
यह भी एक प्रश्न जिंदा है ,बावजूद इसके के मुख्यमंत्री शिवराज चिल्लाते ही रह जाते हैं कि हम जिंदा गाड़ देंगे……?
तो क्या टाइगर जिंदा है यह भी एक प्रश्न है…?

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