MP//Rewa// सरपंच दलाल की उपस्थिति में सेदहा पंचायत की हुई जांच // मौके पर न तो सरपंच और न ही सचिव रहा उपस्थित// शान्तिधाम के नाम पर लाखों का किया बन्दरबाट // दिव्यराज सिंह द्वारा जांच को प्रभावित करने का किया गया था प्रयास, बदलवा दी गयी जांच टीम// ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के एसडीओ केपी मिश्रा और उपयंत्री भोला पटेल द्वारा की गयी जाँच // मात्र शान्तिधाम के नाम पर ही लगभग 20 लाख के गबन का है मामला।।

रीवा जिले के गंगेव जनपद अंतर्गत सेदहा पंचायत में 3 शांतिधाम निर्माण, खेल मैदान निर्माण एवं सरकारी राशन की दुकान निर्माण को लेकर ग्रामीण यांत्रिकी सेवा रीवा की टीम के द्वारा दिनांक 25 फरवरी 2021 को मौके पर उपस्थित होकर जांच की गई।
जांच के दौरान मुख्य जांच अधिकारी सहायक यंत्री सिरमौर के पी मिश्रा एवं उपयंत्री भोला पटेल उपस्थित रहे। मौके पर सूचना देने के उपरांत भी न तो सरपंच पवन पटेल और न ही सचिव एवं रोजगार सहायक दिलीप कुमार गुप्ता उपस्थित रहे। ग्राम पंचायत सेदहा से शिकायत पक्ष से भूतपूर्व सरपंच राजमणि सिंह, अधिवक्ता अरुण सिंह, ग्रामवासी पुष्पराज सिंह, राजबली सिंह, दीपू सिंह एवं सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी उपस्थित रहे।
सरपंच के स्थान पर सरपंच के दलालों ने की बैटिंग
उधर जहां सूचना के उपरांत भी मौके पर न तो सरपंच और न ही सचिव रोजगार सहायक मौके पर पहुंचे वहीं सचिव एवं सरपंच का पक्ष लेने के लिए सेदहा ग्राम पंचायत के दलाल सीएम सिंह जरूर उपस्थित रहे। जिसका मौके पर ग्रामवासियों ने विरोध भी किया और कहा कि जहां सरपंच और सचिव को उपस्थित रहना चाहिए था वहां सीएम सिंह दलाली करने क्यों पहुंच जाता है।
विधायक दिव्यराज सिंह ने जांच को किया था प्रभावित, बदलवाया था जांच टीम
बता दें किसे सेदहा ग्राम पंचायत वही पंचायत है जिसमें सिरमौर विधायक दिव्यराज सिंह ने सरपंच के दलाल सीएम सिंह के जुगाड़ के चलते पूर्व में निर्धारित की गई ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के सहायक यंत्री आरडी पांडे एवं एक अन्य उपयंत्री की बनाई गई टीम को प्रभावित किया था और जांच टीम बदलवाने हेतु ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के अधीक्षण यंत्री आर एस धुर्वे को लिखा था। जिसके बाद मामला मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत स्वप्निल वानखेड़े के पास पहुंचा था। इसके उपरांत सेदहा ग्राम पंचायत एवं चौरी ग्राम पंचायत जनपद पंचायत गंगेव की जांच टीम ही बदल दी गई। अब जबकि ग्राम पंचायत सेदहा की जांच बदली हुई जांच टीम के द्वारा की गई है तो उपस्थित ग्रामीणों ने जांच पर ही सवाल खड़ा कर दिए हैं।
जंगल में राजमणि सिंह की निजी जमीन पर बना दिया शांति धाम
भूतपूर्व सरपंच राजमणि सिंह पिता विजय बहादुर सिंह निवासी ग्राम पंचायत सेदहा के द्वारा बताया गया की सेदहा ग्राम पंचायत में मनरेगा योजना के तहत 14 लाख 95 हजार रुपए की लागत से दिखाया गया शांतिधाम उनकी निजी आराजी नंबर 28 और 30 में बनाया गया है जिसका कि उन्होंने मौके पर प्रथम श्रेणी न्यायालय से वर्ष 1986 का आदेश भी प्रस्तुत किया जो कि वन विभाग के साथ चले मुकदमे के फैसले के बाद उन्होंने जीता था। राजमणि सिंह का कहना था की जहां शांतिधाम बना हुआ बताया गया है वह स्वयं उनके द्वारा मिट्टीकरण करवाया गया था जबकि सरपंच के द्वारा मात्र वन विभाग के पत्थर की खखरी उठाकर सेटल कर दिया गया है जबकि कोई कार्य नहीं करवाया गया है। यह सभी कार्य पूर्ण रूप से रिकवरी की श्रेणी में आते हैं।
सेदहा शांतिधाम की उपयोगिता शून्य के बराबर
उपस्थित सेदहा पंचायत के ग्रामवासियों का कहना था कि उन्होंने कभी भी उस शांतिधाम में किसी को दफन नहीं किया और न ही जलाया। क्योंकि शांतिधाम जंगल में ऐसी जगह पर बनाया गया है जहां न तो कोई सड़क है और न ही कोई आने जाने का साधन। अमूमन शांति धाम ऐसे स्थान पर बनाया जाता है जहां आम नागरिक आसानी से आ जा सके लेकिन मौके पर उपस्थित सहायक यंत्री के पी मिश्रा ने भी बताया कि इस शांतिधाम की कोई उपयोगिता नहीं है। जबकि ग्रामीणों ने तो स्पष्ट कर दिया शांतिधाम बनाए जाने के बाद किसी भी प्रकार का उपयोग नहीं हो पाया।
शांतिधाम में नहीं मिला कोई प्लेटफार्म
सेदहा पंचायत में बनाए गए 14 लाख 95 हजार रुपए की लागत से शांतिधाम में न तो कोई अंदर प्लेटफार्म देखने को मिला और न ही टीना टप्पर का छज्जा। दूसरी तरफ शांतिधाम पूर्णतया बंद पाया गया जहां न तो कोई गेट था और न ही आने जाने का रास्ता जिससे यह स्पष्ट हो गया यह शांति धाम था ही नहीं।
जिरौहीं टोला में मात्र दो चबूतरे बनाकर 5 लाख का किया गया बन्दरबाट
मजे की बात यह है कि शांति धाम बनाना एक लाभ का धंधा है। यह समझते हुए तत्कालीन सरपंच और सचिव ने शासन के पैसे का चूना लगा दिया और दो अन्य छोटे-छोटे शांतिधाम बना डाले। ग्राम सेदहा के जिरौहीं टोला में दो कच्चे किष्म के चबूतरे बनाए गए जो मौके पर टूटे मिले और बताया गया कि यहां मिट्टी भी डलवाई गई थी जबकि कहीं दिख नहीं रही थी। इस प्रकार देखा जा सकता है कि फर्जीवाड़ा करते हुए 5 लाख निकालकर दो शांतिधामों के नाम पर और भी चूना लगाया गया।
स्कूल के खेल के मैदान के नाम पर राशि का किया आहरण
इसी प्रकार सेदहा ग्राम पंचायत में स्कूल के पास खेल का मैदान बता कर राशि निकाली गई और कहीं कोई खेल का मैदान नहीं दिखा। सहायक यंत्री ने सरपंच के दलाल सीएम सिंह से पूछा कि खेल का मैदान कहां है तो दूसरी आराजी बता दी गई। तब सहायक यंत्री के पी मिश्रा द्वारा द्वारा कहा गया कि खेल का मैदान उसी स्थान पर बनाया जाना चाहिए था जहां के लिए टीएस और एस्टीमेट बनाया गया था न कि मन मुताबिक।
दलालों के बीच हंसकर रह गई सेदहा पंचायत
सेदहा पंचायत के साथ दुर्भाग्य यह है की सड़क किनारे मेन रोड से सटी हुई और जंगल की प्राकृतिक वादियों में बसी सटी सेदहा पंचायत विकास की दिशा में चार चांद लगा सकती थी और यहाँ काफी कुछ किया जा सकता था लेकिन जहां बेसहारा पशुओं से परेशान किसानों ने गोशाला की मांग की और गौशाला सैंक्शन होने के बाद भी सेदहा पंचायत के दलालों ने सरपंच पर दबाव लगाकर गौशाला का प्रोजेक्ट बंद करवा दिया वहीं विकास के लिए आने वाले लाखों रुपए दलालों के चलते भ्रष्टाचार की बलि चढ़ रही है।
सेदहा पंचायत को मात्र गिने-चुने कुछ दलाल ही चला रहे हैं जिसमें वहां के प्रमुख दलाल सीएम सिंह का नाम बढ़ चढ़कर लिया जाता है। ग्रामीणों का प्रश्न उठाना लाजिमी था कि आखिर आज जब पंचायत की जांच हो रही है तो वहां मौके पर वर्तमान सरपंच पवन पटेल और वहां का सचिव दिलीप कुमार गुप्ता उपस्थित क्यों नहीं था। लोगों की माने तो उन्होंने इस पूरी जांच पर ही प्रश्न खड़ा किया है और नए सिरे से जांच करवाए जाने की मांग की है जिसमे दलालों द्वारा जांच प्रभावित न कि जाय।

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