भारत में सबसे तेजी से उभरता हुआ वेब न्यूज़ चैनल

MP//Rewa – आरटीआई कानून के संसोधन के नाम पर हो रहा खिलवाड़, कानून को खत्म करने का चल रहा प्रयास – शैलेश गाँधी// 57 वें राष्ट्रीय वेबिनार का हुआ आयोजन, आरटीआई और प्रथम अपीलीय अधिकारी के कर्तव्य विषय पर हुआ आयोजन // प्रथम अपीलीय अधिकारियों की निष्क्रियता और निष्प्रभावी रवैये से बढ़ रही द्वितीय अपीलें – सूचना आयुक्त राहुल सिंह// एक पार्टिसिपेंट ने पूंछा पागल कुत्ते काट रहे हैं, साहब आरटीआई कहाँ �

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सूचना के अधिकार कानून और प्रथम अपीलीय अधिकारी के कर्तव्य विषय पर 57 वें ज़ूम मीट का आयोजन किया गया. इसमें देश के कोने कोने से आरटीआई एक्टिविस्ट और सामाजिक क्षेत्र में रूचि लेने वाले लोग जुड़े. कार्यक्रम की अध्यक्षता मप्र राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने की जबकि विशिष्ट अतिथि के तौर पर पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त शैलेश गाँधी, पूर्व मप्र राज्य सूचना आयुक्त आत्मदीप, कॉमनवेल्थ ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव के प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर वेंकटेश नायक, आरटीआई एक्टिविस्ट वीरेश बेल्लूर, आरटीआई टी-स्टाल कानपुर के संयोजक केएम भाई सम्मिलित हुए. कार्यक्रम में भारत के विभिन्न राज्यों मप्र, उप्र, राजस्थान, गुजरात, विहार, आन्ध्र प्रदेश, असम, नई दिल्ली, जम्मू कश्मीर, तमिलनाडु, झारखण्ड, उत्तराखंड, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल आदि राज्यों से सहभागी सम्मिलित हुए जिन्होंने अपनी अपनी बातें रखीं और संदेहों का निदान पाया.

  57 वें कार्यक्रम के सफल आयोजन में मुख्य रूप से कार्यक्रम का संयोजन एवं प्रबंधन का कार्य आर टी आई एक्टिविस्ट शिवानन्द द्विवेदी, नित्यानंद मिश्रा, अम्बुज पाण्डेय, देवेन्द्र अग्रवाल, पत्रिका समूह से वरिष्ठ पत्रकार मृगेंद्र सिंह ने किया.

   कार्यक्रम के दौरान राहुल हटोले महाराष्ट्र से प्रश्न किये की साहब पागल और आवारा कुत्तों का ग्राम पंचायतों में आतंक है और कहाँ आरटी आई लगाईं जाय. बताया गया की इसके विषय में जब सम्बंधित विभाग से जानकारी मागी गयी तो विभाग ने जानकारी देने से मना कर दिया जिसकी अपील भी की गयी लेकिन कोई जानकारी नहीं मिली. इस बीच सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने बताया की एनिमल से सम्बंधित जानकारी एनिमल विभाग से प्राप्त की जा सकती है. यदि जानकारी नहीं मिले तब नियमानुसार अपील भी करें. जब सूचना आयोग में मामला आता है तो उसका भी निपटारा किया जाता है.

  प्रथम अपीलीय अधिकारी के अधिकार बढ़ाए जाएँ, कानून में हो संसोधन

 

   कार्यक्रम की सुरुआत में सीएचआरआई के प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर और वरिष्ठ आरटीआई एक्टिविस्ट वेंकटेश नायक ने बताया की आरटीआई कानून में प्रथम अपीलीय अधिकारी के अधिकार सीमित हैं और उन्हें दंडात्मक कार्यवाही किये जाने का अधिकार प्राप्त नहीं है जिसकी वजह से एफएओ के आर्डर निष्प्रभावी रहते हैं और पीआईओ ज्यादा तवज्जो नहीं देते हैं क्योंकि लोक सूचना अधिकारियों को यह पता रहता है की कोई दंड नहीं लगेगा. वहीं दूसरी तरफ कई बार प्रथम अपीलीय अधिकारी भी अपने दायित्व का निर्वहन नहीं करते हैं और समयबद्ध तरीके से अपीलों का निपटारा नहीं करते हैं. अपीलों के निपटारे नहीं करने से द्वितीय अपीलों का बोझ बढ़ता जाता है और सूचना आयोग पर कार्यवाही का दबाब बनता है. वेंकटेश नायक ने बताया की प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के तहत प्रथम अपीलीय अधिकारी की सुनवाई स्वतंत्र और निष्पक्ष होनी चाहिए, सभी पक्षों को सुना जाना चाहिए और यह आदेश लिखित में होना चाहिए. उन्होंने बताया की उतराखंड में प्रथम अपीलीय अधिकारी के आदेशों को लेकर गाइडलाइन तय है वहीँ डीओपीटी में भी गाइड लाइन तय हुई है और सर्कुलर में यह बात रखी गयी है. वेंकटेश नायक ने कहा की प्रथम अपीलीय अधिकारी के कर्तव्यों को लेकर इनके अधिकार बढाने और अपीलीय अधिकारियों पर भी जुर्माना अथवा कार्यवाही करने के लिए स्टेट और केन्द्रीय सरकार को लिखना चाहिए और पीआईएल लगाईं जानी चाहिए.

 

  आरटीआई में संसोधनो से कानून को अब तक हुआ काफी नुक्सान – शैलेश गाँधी

 

  वहीं पूर्व केन्द्रीय सूचना आयुक्त शैलेश गाँधी ने एक बार फिर कोर्ट और सरकार दोनों को आड़े हांथों लेते हुए कहा की अब तक सूचना के अधिकार कानून को लेकर जितने भी संसोधन हुए हैं वह सभी कानून की मंशा के विपरीत हुए हैं और कानून को काफी क्षति पहुंची है. शैलेश गाँधी ने बताया की वर्ष 2006 में सरकार कानून को ख़त्म कर देना चाह रही थी लेकिन उन्होंने अपने आईपीएस साथी के साथ मिलकर इसका प्रोटेस्ट किया जिसका नतीजा यह हुआ की कानून बचा रहा. यह बात सही है की प्रथम अपीलीय अधिकारी के पास दण्डित करने की शक्ति नहीं है लेकिन यदि प्रथम अपीलीय अधिकारी समयबद्ध तरीके से और इमानदारी पूर्वक अपीलों का निपटारा करने लगें तो काफी हद तक सुधार हो सकता है और काफी कुछ द्वितीय अपीलें आयोग स्तर तक दायर होने से बचेंगी. यदि प्रथम अपीलीय अधिकारी समय पर सही निराकरण नहीं करते तो डेरेलिक्सन ऑफ़ ड्यूटी का मामला बनता है. शैलेश गाँधी ने बताया की हमे कमीशन को भी लिखना चाहिए यदि पीआईओ अथवा एफएओ कार्यवाही न करें उस स्थिति में.

 

  आयोग में अपीलों के अम्बार के पीछे पीआईओ और एफएओ का गैरजिम्मेदाराना रवैया – राहुल सिंह

 

   मप्र के वर्तमान सूचना आयुक्त और कार्यक्रम के अध्यक्ष राहुल सिंह ने बताया की देश के सूचना आयोगों में अपीलों का अम्बार लग रहा है जिसके पीछे लोक सूचना अधिकारियों और प्रथम अपीलीय अधिकारियों का गैर जिम्मेदाराना रवैया है. न तो लोक सूचना अधिकारी और न ही प्रथम अपीलीय अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों का सही तरीके से निर्वहन कर रहे हैं जिसकी वजह से आवेदक मजबूर होकर सूचना आयोगों में द्वितीय अपीलें और शिकायतें करते हैं. सूचना आयोगों में भी कई बार आर्डर देते समय यह बात कही जाती है की प्रथम अपीलीय अधिकारी को स्पीकिंग आर्डर देने चाहिए लेकिन उसके अभाव के कारण समस्या हो रही है. स्पीकिंग आर्डर की तो बात छोडिये यहाँ तो सुनवाई ही नहीं हो रही है. राहुल सिंह ने कहा की यदि एफएओ समयबद्ध तरीके से और नियमानुसार कार्यवाही कर अपीलों का निपटारा नहीं करते हैं तो यह उनके सर्विस कंडक्ट रूल के विपरीत आचरण कहा जाएगा और ऐसी स्थिति में उनके विरुद्ध कार्यवाही बनती है. उन्होंने बताया की अब केंद्र और राज्य सरकारों को प्रथम अपीलीय अधिकारी के कर्त्तव्य और पॉवर दोनों बढाने चाहिए क्योंकि कुछ मुठ्ठीभर सूचना आयुक्त पूरे प्रदेश के मामलों का निस्तारण और निवारण तत्परता से नहीं कर सकते. उन्होंने आगे कहा की यदि मामले पेडिंग हो रहे हैं तो उसके पीछे मात्र एफएओ का निष्प्रभावी होना, निष्क्रिय होना, और कठोर निर्णय न लेना जिम्मेदार है. 

 

  प्रथम अपीलीय अधिकारियों को हमने लगातार जगाने का भी काम किया – वीरेश बेल्लूर  

 

   कर्णाटक से वरिष्ठ आरटीआई एक्टिविस्ट वीरेश बेल्लूर ने बताया की प्रथम अपीलीय अधिकारी अपने कर्तव्य का निर्वहन सही ढंग से नहीं कर पा रहे हैं. वर्तमान परिपेक्ष में देखा जाय तो प्रथम अपीलीय अधिकारी को सरकारें विशेष ट्रेनिंग की भी व्यवस्था नहीं करती हैं जिससे प्रथम अपीलीय अधिकारियों को उनके कर्तव्य दायित्व और उनके अधिकार स्वयं भी नहीं पता है. अपने प्रदेश कर्णाटक का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया की उन्होंने कई बार उपपंजीयक कार्यालय में पदस्थ रहे प्रथम अपीलीय अधिकारियों को अपने सूचना आयोग के कई स्पीकिंग आर्डर डिस्ट्रीब्यूट किये और बताया की इन्ही आदेशों की तर्ज पर प्रथम अपीलीय अधिकारियों को भी अपने आदेश बनाने चाहिए और सुनवाई करनी चाहिए. वीरेश बेल्लूर ने बताया की कई राज्य सरकारों के सामान्य प्रशासन विभाग की तर्ज पर कर्णाटक सरकार ने भी अपनी गाइड लाइन और सर्कुलर जारी किये हैं और बताया है की प्रथम अपीलीय अधिकारियों के आर्डर किस प्रकार होना चाहिए.

 

 कई प्रथम अपीलीय अधिकारियों के निर्णय बढ़िया रहते हैं, सब एक जैसे नहीं – आत्मदीप

 

  पूर्व मप्र राज्य सूचना आयुक्त आत्मदीप ने बताया की कई प्रथम अपीलीय अधिकारियों के निर्णय ठीक होते हैं. यह बात सही है की सभी प्रथम अपीलीय अधिकारी अपने कर्तव्यों का निर्वहन सही ढंग से नहीं कर रहे हैं. आत्मदीप ने कहा की लोक सूचना अधिकारी स्वयं ही प्रथम अपीलीय अधिकारियों के आदेशों को नहीं मानते जिसके पीछे एफएओ के पास पीआईओ के विरुद्ध दंडात्मक शक्ति का अभाव है. आत्मदीप ने बताया की उन्होंने काई बार प्रथम अपीलीय अधिकारियों को भी जानकारी रोंकने के लिए डीम्ड पीआईओ बनाया था जिसके बाद प्रथम अपीलीय अधिकारियों में इसका गहरा सन्देश गया था और एफएओ के काम करने के तरीके में कुछ हद तक सुधार आया था. उन्होंने राजस्थान का उदाहरण देते हुए बताया की राजस्थान में सचिव को पीआईओ बनाया गया है और सरपंच को एफएओ अतः ऐसी स्थिति में जानकारी पब्लिक तक नहीं पहुँच पाती क्योंकि सरपंच-सचिव अपने भ्रष्टाचार की जानकारी नहीं देना चाहते.

 आरटीआई टी-स्टाल चलाकर कानून का कर रहे प्रचार प्रसार – के एम भाई

 

  कानपुर उत्तर प्रदेश से पधारे कृष्ण मुरारी यादव उर्फ़ केएम भाई ने बताया की उनकी उच्च शिक्षा के बाद वह पब्लिक फील्ड में काम करने लगे जिसमे कई प्रकार के सामाजिक कार्य सम्मिलित हैं. आरटीआई कानून को शस्त्र बनाकर भ्रष्टाचार और पब्लिक महत्त्व की जानकारी निकालते हुए उन्होंने हजारों लोगों को लाभ दिलवाया है. पहले वह शहरी क्षेत्र में काम करते थे लेकिन उन्होंने महसूस किया की शहरी क्षेत्र में काफी लोग एक्टिव हैं इसलिए उन्होंने ग्रामीण इलाकों में कार्य करना प्रारंभ किया. ग्रामीण इलाकों में काफी चैलेंज थे जहां लोग उनके कार्यों को लेकर संदेह करते थे. एक बार एक चाय की दूकान में बैठे थे तो लोगों ने पूंछ मारा की यह आरटीआई किस बला का नाम है और इससे क्या होता है? केएम भाई ने जब लोगों को आरटीआई कानून के फायदों को बताया तो लोग काफी प्रभावित हुए और वहीं से उन्होंने आरटीआई टी-स्टाल खोलने का प्लान बनाया जहां लोग चाय की चुस्कियों के साथ आरटीआई कानून की बारीकियों को समझते और आरटीआई लगाते हैं.

 

  कार्यक्रम में कई प्रतिभागियों ने सम्मिलित होकर अपनी बातें रखीं जिनमे से आरटीआई एक्टिविस्ट ताराचंद जांगीर, सुरेन्द्र जैन, अक्षय गोस्वामी, देवेन्द्र अग्रवाल, राहुल हटोले, सुरेन्द्र भनोट, राज तिवारी, संजय सिंह, अतुलेश द्विवेदी, अलोक कुमार सिंह आदि सम्मिलित रहे.

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