शासकीय भूमि पर अतिक्रमण बर्दास्त नही किया जाएगा- कमिश्नर
फिर भ्रष्टाचार के चंद्रलोक का शरणदाता कौन…?
अब तक नहीं हटा मुख्य गांधीचौक का अतिक्रमण और अवैध निर्माण….
शहडोल 3 अगस्त 21 – आज शहडोल कमिश्नर राजीव शर्मा का यह बयान देखकर लग रहा है कि क्या सचमुच में शहडोल मुख्य गांधी चौक स्थित करोड़ों रुपए की शासकीय आराजी खसरा नंबर 119 और 120 में किए गए अवैध निर्माण को प्रशासन हटाने के मूड में है या फिर यह एक औपचारिक शासकीय कार्यवाही मात्र है…? क्योंकि अतिक्रमण को चिन्हित करते हुए तत्कालीन तहसीलदार बीके मिश्रा ने बाकायदा लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद अवैध निर्माण को हटाने के लिए ₹90000 का जुर्माना नेमचंद्र जैन के खिलाफ पारित किया था और अवैध निर्माण को हटाने का निर्देश दिया था, उसका क्रियान्वयन 19 अक्टूबर को हो पाता कि 1 दिन पहले तत्कालीन कलेक्टर श्री दायमा अतिक्रमण कारी जैन के रेमंड शोरूम से लंबी खरीदी किए थे छन से जो बातें आ रही दो लाख करीब खरीदी थी तब सत्ताधारी भाजपा की पितृ-संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिला प्रमुख इस घटना के साक्षी/अतिक्रमणकारी के पक्ष में चौकीदारी भी किए थे। तब से लेकर अब तक भ्रष्टाचार का चंद्रलोक तमाम अधिकारियों के आदेश को मुंह चिढ़ा रहा है… अब तो खबर यह भी है कि सौदा तय हो गया है तहसीलदार के आदेश को निरस्त कर दिया जाएगा… तो ना रहेगा अतिक्रमण का आदेश और फिर ना हटेगा अतिक्रमण… यह बात जिला न्यायालय के आदेशों को भी बेईमान साबित करेगी कि नगर पालिका परिषद शहडोल के आवेदन पर न्यायालय ने नेमचंद जैन को अवैध निर्माण के लिए दो बार दंडित भी किया है यानी सजा दी है। इस तरह नगर पालिका और जिला न्यायालय की कार्यवाही अभी राजस्व न्यायालयों की न्याय की गरिमा को पतित करते हैं ऐसे में कमिश्नर राजीव शर्मा की चिंता स्वाभाविक है किंतु क्या निचला अमला इस चिंता से चिंतित दिखता है….? अगर वह दिखता होता, तो भ्रष्टाचार के चंद्रलोक को पुलिस द्वारा चलाई गई ऑपरेशन-शंखनाद की शुरुआत में ढहा दिया होता।
तो पहले देख ले कमिश्नर श्री शर्मा ने क्या कहा …. शासकीय प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार श्री शर्मा ने कहा शासकीय भूमि पर अतिक्रमण किसी भी स्थिति मे बर्दास्त नही किया जाएगा। उन्होंने कहा है कि राजस्व अधिकारी शासकीय भूमि के रक्षक है, शासकीय भूमि को सुरक्षित रखना अतिक्रमण से मुक्त रखना राजस्व अधिकारियों का दायित्व है। कमिश्नर ने शहडोल जिले के सभी राजस्व अधिकारियों को निर्देश दिए है कि, वे शासकीय भूमि में अतिक्रमण न होने दें तथा जहां शासकीय भूमि में अतिक्रमण हुआ है ऐसी भूमि का चिन्हित कर उसे अतिक्रमण मुक्त करें। कमिश्नर ने कहा है कि सभी राजस्व अधिकारी शासकीय भूमि के रक्षक है वे अपने दायित्वों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करे और शासकीय भूमि को अतिक्रमण होने से बचाएं।इस तरह उन्होंने राजस्व न्यायालयों की सम्मान बचाने की बात भी कही है
किंतु सत्ता की गुलामी मे दबे “गुड-अतिक्रमण” और “बेड-अतिक्रमण” के सिद्धांत को प्रशासनिक अधिकारी पूरी निष्ठा से अब तक तो अमल करते दिखे। देखना यह भी होगा कि प्रशासन भ्रष्टाचार की किस स्तर पर इस भू मफिया नेमचंद जैन के करोड़ों रुपए की अतिक्रमण को संरक्षण देने वाले तमाम निर्वस्त्र अधिकारियों को कब तक रेमंड का के कपड़ों से उन्हें और उनके परिवारों को ढककर रखेगा…?



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