भूमाफिया खनिज माफिया नहीं बदले तो क्या मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री बदलेंगे…?

शहडोल के रेत के खेल में नेताओं ने फैलाई शतरंजी बिसात शहडोल:-बेहतरीन अनुशासनिक अंदाज का पालन करते हुए गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपाणी ने अपने हाईकमान की इच्छा मात्र का पालन करते हुए मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। तो अन्य नेता रो-रो कर मुख्यमंत्री नहीं बन पाए और भूपेंद्र पटेल गुजरात के मुख्यमंत्री बना दिए गए। किंतु मध्यप्रदेश में हैट्रिक लगाने वाले न जाने कौन कौन सी ट्रिक लगाते हुए शिवराज की राजनीति मैदान में जमी हुई। किंतु मध्यप्रदेश के दूरस्थ बॉर्डर आदिवासी अंचल शहडोल में सोन नदी के किनारे जो घटनाक्रम अचानक कांग्रेस विधायक के संरक्षण वाली वंशिका ग्रुप के साथ भाजपा शासन से जो विश्वासघात हुआ ,वह तब तक निष्ठा और इमानदारी से चल रही रेत खदान को अचानक रातों-रात चोर बता दिया गया और उनकी लगभग रेत इंडस्ट्री को तमाम प्रकार की कानूनी धाराओं में बांध दिया गया। उससे यह तो पता चलता है कि गुजरात की तरह मध्यप्रदेश में सत्ता परिवर्तन का धुंआ सुलग रहा था इस रेत इंडस्ट्री में आग लगाने से वह तिलमिला गया है। अब शिवराज की राजनीति पूरी तरह से पलटी मारेगी या फिर नए मुख्यमंत्री का घोषणा गुजरात के अंदाज में हो जाएगा इस पर नजर भी रहेगी।फिलहाल पॉलिटिकल लाइन में शहडोल छापेमारी की रेत इंडस्ट्री की फाइल दिल्ली की तरफ बढ़ा दी गई है अब फैसला हाईकमान को लेना है की शहडोल सोननदी की पौड़ी के रेत खदान मे मुख्यमंत्री बदलने की ताकत है या नहीं..? एकमात्र अनुशासन वाली पार्टी का अनुशासन पूरी चुप्पी के साथ राजनीतिक हिलोरे भर रहा है। माना जाता है जब भी कभी मध्यप्रदेश की राजनीति में परिवर्तन होगा तब वर्तमान गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा मुख्यधुरी पर होंगे चाहे मुख्यमंत्री की कुर्सी मालवा को मिले या फिर बुंदेलखंड को किंतु सत्ता परिवर्तन का केंद्र गृह मंत्रालय ही होगा। और सोन नदी के तट पर पिछले 2 वर्ष की रेत सफलता के साथ चल रही माफिया गिरी पर छापामार कार्यवाही के आड़ में वंशिका ग्रुप को बदनाम किया जाना उसका तुरुप का इक्का होगा।छापेमारी पर रेत माफिया में हुई बड़ी कार्यवाही:-. तो पहले जान लेते हैं गत 2 वर्ष से पूरी अपने राजनीतिक आकाओं के लिए इमानदारी से अपने कर्तव्यों को करने वाली वंशिका ग्रुप पर कैसे घेराबंदी की गई है। जबकि काम राजनीति और कार्यपालिका का माफिया पूरी पारदर्शिता के साथ कार्य को अंजाम देता रहा। अतिरिक्त पुलिस महानिर्देशक दिनेश चंद्र सागर शहडोल जिला कलेक्टर श्रीमती बंदना वैद्य पुलिस अधीक्षक शहडोल अवधेश गोस्वामी की साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में जारी प्रेस विज्ञप्ति को माने तो सोन नदी पौड़ी रेत खदान के प्रतिबंधित क्षेत्र पर अवैध कार्य करते हुए, अवैध उत्खनन/ परिवहन /भंडारण करने वाली वंशिका कंपनी के जीएम अजीत जादौन मैनेजर खान और ट्रक मालिको तथा चालकों के विरुद्ध थाना व्योहारी में भारतीय दंड विधान की धारा 379, 414, 420, 465, 467, 468, 120 बी तथा खनिज अधिनियम 4/21 , वन्य जीव संरक्षण अधिनियम की धारा 51 के तहत प्रकरण पंजीबद्ध करके 35 हाईवा डंपर पोकलेन एक पनडुब्बी एक मोटर बोट एक बोलेरो वाहन अनुमानित कीमत 10 करोड़ रुपए मूल्य की जब्ती की गई है।

इस तरह लगभग 2 वर्षों की अब तक की गई कार्यवाही में 268 प्रकरण में- 253 ट्रैक्टर ट्रॉली,57 डंपर/हाइवा/ट्रक3जेसीबी1पोकलेन 1पनडुब्बी/ मोटरबोट 1बोलेरो नंबर एमपी 18 बाई 3599 जप्त की गई है जिसमें 35 डंपर/हाइवा हाल के छापा में जब्त हुए हैं। पिछले 2 वर्ष में 22 डंपर जब्त किए गए।
इसी तरह हाल की कार्यवाही में उमरिया जिले के मानपुर थाने में 3 पोकलेन, 4 ट्रक जब्त करते हुए उस क्षेत्र के ठेकेदार के मैनेजर भूपेंद्र सिंह के खिलाफ व मोटर मालिकों/चालको के खिलाफ भारतीय दंड विधान की धारा 188, 379, 414, 34 के तहत तथा खनिज अधिनियम 4/21 तहत प्रकरण पंजीबद्ध किया गया हैइतना तो तय है कि इतनी बड़ी कार्यवाही मैं अब तक पूरी ईमानदारी से काम करने वाली वंशिका कंपनी हो या राजनीतिज्ञों के लोकप्रिय माफिया भाई यह सब अपनी रेत इंडस्ट्री को सफलता से चला रहे थे कहीं कुछ भाजपा के अंदर साइलेंट वार चलता रहा है जिसका परिणाम यहां की माफिया इंडस्ट्री पर छापे पर पड़ा है। अन्यथा शहडोल आदिवासी संभाग मे रेत माफिया की इंडस्ट्री के रूप में काम करने वाला ठेकेदार को कोई रातों-रात चमत्कार की तरह प्रकट नहीं हो गया और इन तीनों जिलों में सफलता से माफिया माइनिंग को संरक्षण देने वाली काम कर रही खनिज अधिकारी युवा चेहरा सुश्री फरहत जहां खान(photo) ने माफिया कारोबार को यह कहते हुए काम करने दिया की ऊपर का आदेश जैसा होता है वैसा काम करना पड़ता है।. तो साफ है:- जैसा प्रशासन और शासन चाहता है वैसा माइनिंग अफसर कार्य को अंजाम देते हैं अचानक वही लोकप्रिय माफिया इंडस्ट्री के लोग प्रशासन की चपेट में आ जाते हैं इसका मतलब स्पष्ट है कि शहडोल आदिवासी अंचल में गृह मंत्रालय, मुख्यमंत्री के संरक्षण में अब तक चल रहे की तमाम गतिविधियों पर ब्रेक लगा दिया कि पहले राजनीतिक निर्णय खो जाएं फिर माफिया इंडस्ट्री काम करें। एक प्रकार का यह एक नेता को दूसरे नेता के लिए स्थगन आदेश सी है।. इन दिनों रावतपुरा सरकार वंशिका ग्रुप के संरक्षक कांग्रेस विधायक संजय शर्मा के कार्य क्षेत्र में चतुर्मास पर हैं जहां पर उनसे मिलने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की पत्नी साधना सिंह साधना के लिए पहुंची थी। और हफ्ता भी नहीं बीता संजय शर्मा की खदान पर गृह मंत्रालय की इतनी बड़ी छापेमारी हो गई। लगभग पूरी रेत इंडस्ट्री पर ताला लग गया । संजय शर्मा कभी भारतीय जनता पार्टी के विधायक हुआ करते थे वह अब कांग्रेस के विधायक हैं। किंतु सत्ता पर भाजपा के आते ही उनकी निष्ठा भाजपा के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के इर्द-गिर्द सिमट गई। जो गृहमत्री नरोत्तम मिश्रा अथवा पूर्व मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की आंखों की किरकिरी बनी रहे। क्योंकि संजय शर्मा न सिर्फ स्वयं अकेले बल्कि कई विधायकों के नेता भी हैं। और इसी की बदौलत उनका शहडोल रेत इंडस्ट्री सफलता से सत्ता परिवर्तन पर बिना किसी प्रभाव के अपनी सफलता को अंजाम दे रहे थे।. किंतु जब यह सुनिश्चित हो गया की चूहे की लंबी कूद के पीछे कौन सा अन्न का भंडार काम कर रहा है अन्न के भंडार पर याने रेत के इंडस्ट्री पर ताला जड़ दिया गया। पंचतंत्र की कहानी का चूहा अब सलेंडर होगा या नहीं यह देखने की बात होगी। किंतु इससे रेत इंडस्ट्री को कितनी राहत मिलेगी यह भी वक्त बताएगा फिलहाल वंशिका ट्रेडर्स, उसके पूरे डायरेक्टर्स कर्मचारी जादौन, खान और ज्ञात अज्ञात सभी संपत्तियों के मालिक जिसमें तथा कथित तौर पर लगभग हर पार्टी के किंतु ज्यादातर भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के डंपर हैं का कारोबार कुछ दिन के लिए ठहर गया है। क्योंकि डंपर किसके किसके लगे हैं उन का मालिक कौन सा नेता है किस पार्टी का नेता है अभी इसका खुलासा पुलिस के द्वारा नहीं किया गया है तो यह बात अब राजनीति तय करेगी की माफिया गिरी किसकी चलेगी…?

बिंध्य नेताओं के लिए क्या वरदान साबित होगा यह छापा. तो एक दूसरा पहलू क्षेत्रीय भी है फिलहाल क्षेत्र के विधायक और भाजपा कांग्रेस की राजनीति पर असर डालने वाले ब्योहारी विधायक शरद कोल ने दावा किया है की पूरी कार्यवाही उनके पहल पर की गई शिकायत का परिणाम है स्मरणीय है की कांग्रेस सरकार बनने के बावजूद मैहर विधायक नारायण त्रिपाठी अथवा व्यवहारी विधायक शरद कॉल दोनों ही तत्कालीन राजनीति की केंद्र के मे रहे हैं बावजूद इन्हें शिवराज सरकार में कोई जगह नहीं मिली है बल्कि मैहर के विधायक नारायण त्रिपाठी के लिए उनके प्रतिद्वंदी रहे भाजपा में आयात किए गए श्रीकांत चतुर्वेदी की ताकत व्यवहारी क्षेत्र में चल रही रेत माफिया इंडस्ट्री का नेतृत्व कहीं ना कहीं नारायण त्रिपाठी को परेशानी का कारण बना हुआ था। क्योंकि यही वह अन्न का भंडार था जो श्रीकांत चतुर्वेदी को उनकी राजनीतिक पहुंच और धन संपदा को मजबूत कर रहा था। जो स्पष्ट तौर पर ज्योतिरादित्य सिंधिया के ग्रुप के सदस्य होने के कारण मैहर क्षेत्र की भविष्य की विधायक की सीट पर श्रीकांत चतुर्वेदी के लिए वरदान बन गया था। इससे नारायण त्रिपाठी को अपने राजनीतिक अस्तित्व का खतरा महसूस हो रहा था। इस तरह अलग-अलग राजनीतिक पहलुओं में रेत माफिया गिरी बहुमुखी तौर पर असर डाल रही थी। किंतु अब जब भी सत्ता का परिवर्तन होगा इस छापेमारी के दूरगामी असर देखने को मिलेंगे। जिसमें यह सुनिश्चित होगा कि नारायण त्रिपाठी, शरद कोल को कितनी तवज्जो मिलती है अथवा मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री का चेहरा परिवर्तन पर शहडोल की छापेमारी कितना दखल देती है …? “सकरी पड़ी बिलारी, तो मुसवा ताने मूंछ”. फिलहाल संजय शर्मा जैसे दबंग विधायक के लिए इतना ही कहना होगा कि “सकरी पड़ी बिलारी, तो मुसवा ताने मूंछ” यानी बिल्ली दो पाटों के बीच में फस गई है तो चूहे उसकी मूछ खींचे डाल रहे हैं। और कोई बात नहीं है अन्यथा मध्यप्रदेश के दूसरे रईस विधायक संजय शर्मा के कारोबार को छूने की क्षमता शासन-प्रशासन में कहां होती है…? उनके क्षेत्र में जानने वाले कहते हैं वे प्रतापगढ़ के राजा भैया की तरह अंदाज में ही अपना काम करते हैं।. हालांकि यह छापेमारी कोई नई बात नहीं है आईएएस अफसर एस डी एम रहे लोकेश कुमार जांगिड़ ने इस प्रकार की माफिया गिरी पर अंकुश लगाते हुए सुहागपुर थाने में पोकलेन, जेसीबी ,हाईवा, ट्रैक्टर आदि जब्त करके खड़े किए थे। यह अलग बात है कि सोहागपुर थाने मे इस पर माफियाओं के खिलाफ कैसी कार्यवाही किया…? और उसे इन 2 वर्षों में कितना दंडित करा पाया …? हालांकि यह सार्वजनिक प्रकाशन का हिस्सा नहीं रहा किंतु शहडोल के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक डीसी सागर का पत्रकार वार्ता में दबंगई के साथ किया गया दावा की “पुलिस ऐसी कार्यवाही करें ताकि कोई भी बचने ना पाए” यह अपने आप में किसी एडीजीपी की एक बड़ी शपथ भी है जो पत्रकारों के समक्ष ली गई है। इसका परिणाम भी यह बताएगा कि यह कार्यवाही वास्तव में संविधान के सच्चे सिपाहीयों की कर्तव्य-निष्ठा का परिणाम था या फिर गंदी और भ्रष्ट राजनीति मैं पतित राजनेताओं की आदिवासी क्षेत्र में उल्लू बना कर अपने राजनीतिक हित साधने का जरिया मात्र था….? दरअसल जबसे विन्ध्य की राजनीत में राजनीतिक इच्छाशक्ति मर गई है, जो शहडोल संभाग में तो लगभग मरी हुई ही है…. ? वह लोकतंत्र की संविधान के प्रति सच्ची निष्ठा का भाव ही बचा सकता है। और वैसा पत्रकार वार्ता मे देखने को भी मिला। और अगर यह सच है तो राजनीतिक माफिया गिरी का बाहरी हस्तक्षेप रोकने का कदम शहडोल के लिए एक वरदान साबित होगा । पर्यावरण विनाश होता ही रहता है:- इसी प्रकार की कार्यवाही हमें सड़क माफिया गिरी में, जंगल माफिया गिरी में, भू-माफिया गिरी में तालाब और नदी विनाश में खुलेआम दिखती है। जिसमें सबका जिम्मेदार प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का अधिकारी सात पर्दे के अंदर बैठकर एनओसी बाटता रहता है। कार्यवाही पर्यावरण अधिनियम में लोकतंत्र की सुरक्षा का संदेश भी है किंतु पर्दे में रहने वाला प्रदूषण का वृत्त अधिकारी शहडोल की भ्रष्ट हो चुकी सत्ता में कानून को आंख दिखाता प्रतीत होता है जो प्रेस से इसलिए बचता है ताकि जवाबदेही सुनिश्चित न होने पाए। जैसे कि सोन नदी को छलनी करने वाली खनिज माफिया की कार्यप्रणाली किसने पहली बार बताया की पनडुब्बी रेत और पानी को अलग करने वाली कार्यप्रणाली का सिस्टम भी काम करता है कैसे तमाम प्राकृतिक संसाधन विश्वव्यापी नर्मदा को संरक्षित करने वाली अमरकंटक की घाटी टूट कर सड़क मार्ग को प्रभावित करती है जिस पर अभी कोई प्रदूषण विभाग का स्पष्टीकरण नहीं आया है…? . तो देखना होगा की शहडोल आदिवासी अंचल कि यह बड़ी छापेमारी की घटना के बाद प्रदेश की अथवा बिंध्य राजनीति में कहां कब किसको कितना फर्क पड़ता है अथवा सत्ता परिवर्तन किस रूप में किसी कहां बैठता है…?


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