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संपूर्ण देश में लागू की जाए नालसा हेल्पलाइन व्यवस्था, अधिकारियों को सुझावों को सकारात्मक रूप से लेने की जरुरत – जस्टिस कल्पेश झवेरी // सरकार से अनुदान प्राप्त संस्थाएं आरटीआई के दायरे में इसलिए नालसा भी – राहुल सिंह // 67वें राष्ट्रीय वेबिनार का हुआ आयोजन, देश के जाने माने चीफ जजों और सूचना आयुक्तों ने लिया हिस्सा //

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कानूनी ज्ञान के साथ न्याय व्यवस्था सुलभ हो और आरटीआई के प्रति आम से आम नागरिक भी जागरूक होकर अपने अधिकारों का घर बैठे उपयोग कर सके इसके लिए प्रत्येक रविवार सुबह 11 बजे से दोपहर 01 बजे तक राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया जाता है. इस बीच दिनांक 3 अक्टूबर 2021 को 67 वें नेशनल आरटीआई वेबिनार का आयोजन किया गया। इस बीच कार्यक्रम का विषय रहा – आम लोगों की न्याय तक पहुंच और राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण का हेल्पलाइन नंबर 15100 का उपयोग किस प्रकार से हो रहा है और क्या-क्या व्यवस्थाएं हैं और यह सही ढंग से लागूहो रहा है अथवा नहीं और इसके साथ ही सूचना के अधिकार कानून 2005 का उपयोग कर इस व्यवस्था में और क्या परिवर्तन लाए जा सकते हैं विषय पर विस्तार से चर्चा की गई।

 

कार्यक्रम में यह उपस्थित रहे विशिष्ट अतिथि

 

   कार्यक्रम की अध्यक्षता पहले की भांति वर्तमान मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने की जबकि कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के तौर पर पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण एवं पूर्व मुख्य न्यायाधीश उड़ीसा राजस्थान एवं गुजरात हाईकोर्ट कल्पेश झवेरी, अमन कचरू फाउंडेशन ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं नेशनल फेडरेशन फॉर सोसायटी फॉर फास्ट जस्टिस के अध्यक्ष डॉक्टर राजेंद्र कचरू, पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त शैलेष गांधी, पूर्व मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयुक्त आत्मदीप, फोरम फॉर फास्ट जस्टिस के ट्रस्टी एवं सामाजिक कार्यकर्ता प्रवीण पटेल, सोसायटी फॉर फास्ट जस्टिस के अध्यक्ष भगवानजी रैयानी एवं ट्रस्टी श्री वेंकटरमण, सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि चक्रवर्ती, एडवोकेट नित्यानंद मिश्र सम्मिलित रहे। कार्यक्रम का संचालन एवं समन्वय का कार्य एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी एवं प्रवीण भाई पटेल द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।

 

 सरकार से अनुदान प्राप्त संस्थाएं आरटीआई के दायरे में इसलिए नालसा भी – राहुल सिंह

 

       कार्यक्रम में अध्यक्षता करते हुए मध्य-प्रदेश राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने बताया कि आरटीआई कानून बहुत ही सशक्त कानून है जिसका उपयोग कर हर तरह की सरकारी जानकारियां प्राप्त की जा सकती हैं और आम नागरिक अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो सकते हैं लेकिन आज भी कानून का सही तरीके से उपयोग नहीं हो पा रहा है इसलिए लोगों को अधिक से अधिक आरटीआई का उपयोग करना चाहिए। राहुल सिंह ने कहा की आरटीआई लगाकर नालसा और सालसा के संबंध में सभी राज्यों और केंद्र की जानकारी प्राप्त की जा सकती है। राहुल सिंह ने कहा की मप्र फीस और अपील अधिनियम के तहत यह व्यवस्था है की जो संस्थाएं सरकार से फण्ड प्राप्त कर रही हैं वह सब आर टी आई के दायरे में आती हैं. उन्होंने बताया यह काफी महत्वपूर्ण विषय है और हर नागरिक को न्याय उपलब्ध हो इसके लिए सभी को मिलकर प्रयास करना चाहिए।
संपूर्ण देश में लागू की जाए नालसा हेल्पलाइन व्यवस्था, अधिकारियों को सुझावों को सकारात्मक रूप से लेने की जरुरत – जस्टिस कल्पेश झवेरी

 

    कार्यक्रम में आगे विशिष्ट अतिथि के तौर पर पधारे उड़ीसा गुजरात एवं राजस्थान हाई कोर्ट के रिटायर्ड चीफ जस्टिस कल्पेश झवेरी ने बताया कि वह स्वयं भी राजस्थान में स्टेट लीगल सर्विस अथॉरिटी के कार्यकारी अध्यक्ष रहे हैं और इस विषय में समय-समय पर विभिन्न प्रकार के मुद्दे आते रहे हैं जिस पर सुधार किस प्रकार किया जाए हमेशा ही चर्चा का बिंदु रहा है। उन्होंने कहा की हम सभी को अपने टेनर में कुछ न कुछ सुझाव आते रहते हैं लेकिन हम सबको उसे सकारात्मक तौर पर लेने की जरुरत है और उसमे सुधार करना चाहिए. आज नालसा की जो व्यवस्थाएं हैं वह डिस्ट्रिक्ट  और तालुका लेवल पर लागू करने की जरुरत है. उन्होंने बताया कि आज इस मीटिंग में देश के सभी क्षेत्रों से लोग जुड़े हुए हैं और जिस प्रकार संपूर्ण देश में और सभी राज्यों में लीगल हेल्पलाइन की व्यवस्था सुधारने के लिए बातें सामने आ रही हैं वह काफी प्रशंसनीय है और इसके लिए सभी को मिलकर काम करना चाहिए और उनसे इस विषय में जो भी मदद होगी की जाएगी।

 

 नालसा हेल्पलाइन का एक अच्छा मॉडल हमने छत्तीसगढ़ में किया तैयार – डॉ0 राज कचरू

 

   कार्यक्रम में अगले विशिष्ट वक्ता के रूप में अमन-कचरू ट्रस्ट के अध्यक्ष एवं लीगल एड के विषय में अपना महत्वपूर्ण योगदान देने वाले डॉक्टर राज कचरू ने अपना स्लाइड प्रेजेंटेशन के माध्यम से जानकारी साझा की और देश की वर्तमान स्थिति के विषय में बताया कि कहां-कहां कौन-कौन सी हेल्पलाइन काम कर रही हैं और उनकी क्या स्थिति है। राज कचरू ने कहा की ऐसी व्यवस्था की जाए जिसमें सभी हेल्पलाइन मिलकर एक यूनिफाइड व्यवस्था हो और लोगों की समस्या का समाधान तत्काल किया जाए। उन्होंने कहा कि बहुत सारी हेल्पलाइन है लेकिन वह सही तरीके से काम कर नहीं रही है जिससे प्रश्न उठना लाजिमी है। हालांकि इस विषय पर कार्य करने की आवश्यकता है और वह अपने ट्रस्ट के माध्यम से बेहतर व्यवस्था बना रहे हैं और यह देश में सरकार एवं सुप्रीम कोर्ट उनके मॉडल को अपनाना चाहती है तो यद्यपि लगभग 200 करोड़ रुपए का खर्च आएगा लेकिन अच्छी व्यवस्था बन सकती है। कार्यक्रम में राज कचरू ने विभिन्न प्रतिभागियों के काफी प्रश्नों का जवाब भी दिया और उनके संदेहों का समाधान भी किया।

 

लीगल ऐड व्यवस्था लागू किया जाकर न्याय प्रणाली में होगा सुधार, आरटीआई का रोल काफी अहम् – आत्मदीप

 

मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयुक्त आत्मदीप ने कहा कि आज यह खुशी की बात है कि लीगल एड विषय पर चर्चा हो रही है क्योंकि यह टॉपिक अब तक हमारे वेबिनार में अछूता बिंदु रहा है। उन्होंने कहा कि लीगल एड सर्विस मात्र दिखावे के तौर पर बनाई गई है लेकिन इसका लाभ अभी उस स्तर से प्राप्त नहीं हो पा रहा है जिस प्रकार सरकार की मंशा थी। हालाँकि इसे लागू किया जाकर अच्छे न्यायिक समाधान की ओर अग्रसर हो सकते हैं और लोगों के लिए काफी लाभकारी होगा। उन्होंने कार्यक्रम में अपने कुछ अनुभव और काफी तथ्यों को भी साझा किया और साथ में उपस्थित प्रतिभागियों के आरटीआई से जुड़े हुए प्रश्नों का भी जवाब दिया।

 कुछ पूर्व जजों ने न्याय व्यवस्था के साथ किया खिलवाड़ लेकिन हम लीगल ऐड को करेंगे मजबूत – प्रवीण पटेल

 

फोरम फॉर फास्ट जस्टिस के ट्रस्टी एवं सामाजिक कार्यकर्ता प्रवीण पटेल ने कई मुद्दों पर चर्चा की और चरमराई हुई न्यायिक व्यवस्था को आड़े हाथों लिया और कहा कि इसके लिए सरकार के साथ-साथ पूर्ववर्ती कुछ जज भी जिम्मेदार हैं जिन्होंने व्यवस्था में सुधार लाने के लिए कोई पहल नहीं की बल्कि सरकार की गलत नीतियों का ही पक्ष लिया। हालांकि उन्होंने इस विषय पर पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुप्रीम कोर्ट आफ इंडिया दीपक मिश्रा एवं अन्य का भी उदाहरण देकर कुछ बिंदुओं का उल्लेख किया। उन्होंने भी इस बात पर जोर देकर कहा की इसके लिए पैरा-लीगल वालंटियर और ट्रेनिंग देने की जरूरत है और सभी राज्य एवं साथ में जिलों एवं तालुक में लीगल एड सर्विस को बेहतर बनाया जाए. इस विषय पर काम करने की जरूरत है और हम निश्चित तौर पर इस पर काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा की यह व्यवस्था सब के साथ मिलकर ही लागू की जा सकती है.

 

ऑनलाइन माध्यमों से कानूनी चर्चा तो ठीक लेकिन भौतिक धरातल पर काम करने की है बड़ी जरुरत

 

कार्यक्रम में आगे मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के अधिवक्ता एवं आरटीआई एक्टिविस्ट नित्यानंद मिश्रा ने मध्यप्रदेश के स्तर पर अपने अनुभव और विचार साझा करते हुए कहा की लीगल एड सर्विस को लेकर कई सारी भ्रांतियां हैं और अच्छे वकील भी नहीं मिलते क्योंकि सरकार की तरफ से दी जाने वाली राशि भी कम रहती है इसलिए वकील रुचि नहीं रखते। इसके लिए जहां पैरा-लीगल वालंटियर बढ़ाने की जरूरत है उसके साथ ही अच्छे प्रतिस्पर्धी वकील भी रखे जाने की जरूरत है. कार्यक्रम में सोसायटी फॉर फास्ट जस्टिस के अध्यक्ष भगवानजी रैयानी ने कहा की आज ग्राउंड में काम करने की भी जरूरत है जिसमें सीधे सरकार की नीतियों का विरोध किया जाए क्योंकि हम यदि आपस में चर्चा करते हैं तो उसका समाधान नहीं दिखता है. इसलिए सरकार पर दबाव देना भी आवश्यक है जिसके लिए हमें सड़क पर उतरना पड़ेगा। सरकार मनमाने ढंग से नीतियां लाकर कानून की धज्जियां उड़ा रही है। उन्होंने कहा की देश की न्यायालयीन व्यवस्था चरमरा चुकी है और वर्षों से कोर्ट केस पेंडिंग पड़े हैं यह सब चिंता का विषय है।

 

कार्यक्रम में सोसायटी फॉर फास्ट जस्टिस के ट्रस्टी श्री वेंकटरमण ने भी अपने विचार साझा किए और उन्होंने बताया कि हमें इसी प्रकार मिलकर काम करने की जरूरत है और जागरूकता लाते रहेंगे तो लोग अपने अधिकारों और दायित्वों के प्रति जागरूक होंगे। आज मीटिंग, सेमीनार और वेबिनार आदि के माध्यम से जो व्यवस्थाएं चल रही है वह इसी प्रकार चलती रहे और अपनी बात मजबूती से शासन प्रशासन के समक्ष रखी जाती रहे।

 

आरटीआई कार्यकर्ताओं की सुरक्षा करें सरकारें

 

कार्यक्रम में विजय सिंह पालीवाल ने भी अपने विचार साझा किए और उन्होंने कोर्ट में पेंडिंग पड़े प्रकरणों और चरमराई हुई न्याय व्यवस्था को आड़े हाथों लिया। इसी प्रकार अन्य दर्जनों प्रतिभागियों ने अपनी-अपनी बातें रखी और देश में न्याय तक आम व्यक्ति की पहुंच कैसे आसान की जाए और कैसे विभिन्न प्रकार से संचालित हो रही हेल्पलाइन को बेहतर किया जाए विषय पर अपने विचार रखे और साथ में आरटीआई कानून के प्रति भी लोगों का झुकाव हो और साथ में आरटीआई कार्यकर्ताओं को सुरक्षा मिले इस विषय पर भी लोगों ने अपनी चिंता जाहिर की जिनमें मुख्य रुप से छत्तीसगढ़ से देवेंद्र अग्रवाल रहे.

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