पशु क्रूरता के शिकार 58 गोवंशों को घाटी के ऊपर निकाला, अभी भी फंसे हैं सैकड़ा भर अन्य गोवंश
दिनांक 9 अक्टूबर 2021 को एक बड़े रेस्क्यू ऑपरेशन में 58 गोवंशों को रेस्क्यू किया गया। सुबह लगभग 10:00 बजे पंचायत, राजस्व, जंगल और पशु चिकित्सा विभाग के साथ मौके वारदात सिरमौर वन परिक्षेत्र अंतर्गत रेहवा घाटी पर पहुंचकर रेस्क्यू का कार्य सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी एवं उनके अन्य गो सेवक साथियों रोहित मिश्रा, शतानंद केवट, बाबूलाल यादव एवं अन्य के साथ प्रारंभ किया गया। रेस्क्यू ऑपरेशन के तीसरे दिन सबसे पहले बड़े पत्थर को काटकर एक बेहतर रास्ता बनाने का प्रयास किया गया जिससे मवेशियों को आसानी से चढ़ाया जा सके। इस कार्य मे पत्थर काटने वाले लेबर ने अपना सहयोग प्रदान किया। इसके बाद लगभग 10 छोटी बोरी जिसमें भूसा भरकर ले जाया गया और तलहटी पर स्थित गोवंश को खिलाया गया जिससे मवेशियों में मानव के प्रति थोड़ी नजदीकी आई और उन्हें लगा कि शायद उन्हें धकेलने के लिए नहीं बल्कि रेस्क्यू करने के लिए ही कोई आया है।
इस प्रकार गोवंश उपस्थित लोगों के बीच घुल मिल गए और उपस्थित डॉक्टरों ने घायल 3 नग मवेशियों का मल्टीविटामिन, एंटीबायोटिक, दर्द बुखार के इंजेक्शन और मल्हम लगाकर इलाज किया। साथ में उपस्थित वेटरनरी डॉक्टर ने मौके पर जाकर देखा तो जो गोवंश 27-28 सितंबर के दरमियान मर गए थे और झाड़ियों में लटक रहे थे उनके मात्र चमड़े और कंकाल ही अब प्राप्त हो सके क्योंकि जंगली जानवरों ने उन्हें खा लिया था और सिर्फ उनके अवशेष बचे थे जिसका कि मौका पंचनामा भी बनाया गया। इसी प्रकार कमजोरी और भूख प्यास से चार अन्य मवेशी भी मृतक पाए गए जिन्हें मौका पंचनामा में दर्ज किया गया।
*जंगल विभाग का रेस्क्यू आपरेशन में नकारात्मक रवैया*
यद्यपि मामले की जानकारी कई दिनों पूर्व ही वन मंडल अधिकारी जिला रीवा को दे दी गई थी और उनसे वन विभाग के बीट गार्ड और कर्मचारियों की माग की गई थी जो रेस्क्यू आपरेशन में सहयोग प्रदान कर सकें लेकिन इसके बावजूद भी रेहवा घाटी सिरमौर वन परिक्षेत्र में उपस्थित बीट गार्ड और अन्य वनपाल मात्र घाट के ऊपर ही घूमते रहे और मौके पर आकर किसी भी प्रकार की सहायता नहीं की हालांकि पंचनामा में उन्होंने अपनी सहायता उपलब्ध कराने की बात लिखी है जो कि गलत है।
जिन गोवंश को बाहर निकाला गया है उनको बांधने के लिए कोई रस्सी अथवा अन्य किसी प्रकार की व्यवस्था नहीं थी जिसके चलते गोवंश पुनः बाहर आकर फैल गए इसके विषय में संबंधित पंचायत विभाग और राजस्व विभाग के राजस्व निरीक्षक परमानंद तिवारी सहित पीसीओ केके मिश्रा एवं अन्य को अवगत करा दिया गया है और उन्हें बताया गया कि पशु चिकित्सा विभाग के साथ मिलकर गोवंशों की टैगिंग कर उन्हें समुचित और सुरक्षित स्थान पर पहुंचाएं और उनका पोषण और इलाज करें अन्यथा की स्थिति में आवारा बेसहारा छोड़ने पर पुनः लोग उन्हें खाई में धकेल सकते हैं। इस प्रकार पूरे दिन चले रेस्क्यू ऑपरेशन में चार जत्थे में मवेशियों को बाहर निकाला गया और अभी भी लगभग एक सैकड़ा मवेशी शेष बचे हुए हैं जिन्हें निकाला जाना अत्यंत आवश्यक है। सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी के द्वारा बताया गया कि रविवार को छोड़कर अगले सप्ताह पुनः रेस्क्यू ऑपरेशन किया जाएगा और तब तक उन वगोवंशों को भूसा और पानी उपलब्ध कराना अत्यंत आवश्यक है जिसके विषय में कलेक्टर जिला रीवा डॉक्टर इलैयाराजा टी को फोन से अवगत करा दिया गया है।


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