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छात्रों की शैक्षणिक स्थिति खराब है बाकी सब ठीक है, जवाब
न्यू बरौधा शासकीय बालक माध्यमिक विद्यालय पर बड़ी जांच
विद्यालय पर हो सकती है दण्डात्मक कार्यवाही

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शहडोल/ब्योहारी – इन दिनों शासकीय बालक माध्यमिक विद्यालय न्यू बरौधा का मामला काफी ज्यादा चर्चाओं में है इस विद्यालय ‌में शैक्षणिक स्थिति बिल्कुल खराब हो जाने‌ के कारण सी एम हेल्पलाइन में शिकायतें करनी पड़ी थीं जिसके कारण शासकीय बालक माध्यमिक विद्यालय न्यू बरौधा की जांच हेतु टीम भी गठित की गई और छात्रों की जांच करवाई गई जिसमें छात्रों का शैक्षणिक स्तर‌ वास्तविक में अत्यंत ही खराब पाया गया यह पाया गया कि विद्यालय में बच्चों की उपस्थिति पढने वाले छात्रों की संख्या अत्यंत विचारणीय है तथा जांच अधिकारियों को अपने प्रतिवेदन में लिखना पड़ा कि बच्चों का शैक्षणिक स्तर‌ खराब पाया गया अब जबकि शिक्षा के मंदिर में शिक्षा ही नहीं दी जा रही है तो अन्य बातों का कोई मतलब ही नहीं निकलता है ।
ऊपर से शिक्षा अधिकारियों के कथन‌ तो और ज्यादा चिंताजनक है जो यह कहते हैं कि शैक्षणिक स्तर खराब पाया गया बाकी सब ठीक है तो अब इन अधिकारियों को भला हम क्या बतलाइए कि विद्यालय का एकमात्र ध्येय शिक्षा प्रदान करना होता है यहां से शिक्षा प्राप्त करने के बाद ही बच्चों एवं देश का भविष्य निर्मित होता है शिक्षा ही देश की नीव है यदि देश में शासकीय विद्यालयों के छात्र-छात्राओं को प्रतिभावान नहीं बनाया जाएगा उन्हे विषयों की शिक्षा नहीं दी जाएगी तो वो बच्चे देश और समाज की सहायता कैसे कर पाएंगे और यह बात सभी को भली-भांति मालुम है कि अशिक्षा एक अभिशाप है तो क्या जानबूझकर शासकीय विद्यालयों के प्राथमिक और माध्यमिक स्तर के बच्चों को यह अभिशाप परोसा जा रहा है बात तो यही पर समाप्त हो जाती है जब यह कहा जाता है कि विद्यालय में छात्र एवं छात्राओं की शैक्षणिक स्थिति खराब‌ है क्योंकि शिक्षा के लिए ही विद्यालय हैं किसी गरीब के बच्चे को शासकीय विद्यालय में यह सोचकर दाखिला करवाया जाता है कि उस गरीब का बच्चा पढ लिखकर अपने परिवार तथा देश की सहायता करेगा परंतु शासकीय बालक माध्यमिक विद्यालय न्यू बरौधा में जहां कक्षा 8 के छात्रों को ज्ञानशून्य कर दिया गया है इन्हे अनपढ बना दिया गया है कक्षा में संख्या अगर 40 है तो इस विद्यालय में कभी भी 8 या 10 छात्रों से ज्यादा छात्रों की उपस्थिति नहीं रहते हैं जिसका कारण है कि शैक्षणिक गतिविधियों पर शिक्षकों द्वारा ध्यान ना दिया जाना इस विद्यालय में पदस्थ सनत कुमार पटेल के द्वारा छात्रों के शैक्षणिक स्तर की बलि चढा दी गई है छात्रों को लिखना पढना तक नहीं आता है एवं‌ जब शिकायतकर्ताओं द्वारा इस आशय की जानकारी ली जाती है तो उच्चाधिकारियों द्वारा यह जवाब दिया जाता है कि कोरोनाकाल के कारण छात्रों की शैक्षणिक स्थिति बिगड़ी है जिले के शिक्षा अधिकारी इसी बात को बार बार दोहराते हैं कि लाकडाउन के कारण यह स्थिति हुई है उनका अभिप्राय यह होता है कि छात्रों के शैक्षणिक दुर्दशा कारण अयोग्य और उदासीन शिक्षक नहीं है जबकि सनत कुमार पटेल द्वारा विद्यालय में इतनी ज्यादा अफरा तफरी फैलाई गई और शिक्षा व्यवस्था की धज्जियां उड़ाई गई और इसी उदासीनता के कारण छात्रों का भविष्य बरबाद हो गया ।
सूचना के अधिकार को लेने से इंकार – विद्यालय में संदेह और भी ज्यादा तब बढ गया जब लोक सूचना अधिकारी द्वारा सूचना के अधिकार के तहत जानकारी देने से इंकार कर दिया गया जिसके कारण आर टी आई के फार्म को पोस्ट द्वारा भेजा गया परंतु उसे भी लेने से इंकार कर दिया गया एवं लौटे लिफाफे में डाक विभाग के सरकारी कर्मचारी ने यह लिखकर दे दिया कि लोक सूचना अधिकारी द्वारा इस डाक को लेने से इंकार कर दिया है, जबकि जब जांच बैठाई गई थी उसी समय जांच अधिकारी प्राचार्य श्री प्रेमलाल मिश्रा जी ने प्रभारी सनत पटेल को यह कहा था कि सूचना का अधिकार लेकर 7 दिवस के भीतर चाही गई जानकारी उपलब्ध करवाएं यदि जानकारी बनाने में समस्या जाती है तो जांच टीम बनवाने में सहायता करेगी , इतना होने के उपरांत भी आवेदन लेना तो दूर रहा सनत कुमार पटेल द्वारा भारतीय डाक सेवा के माध्यम से भेजे गए आर टी आई को भी लौटाया गया।
सूचना का अधिकार ना लेना यह दर्शाता है कि विद्यालय के मदो में अवश्य ही भ्रष्टाचार किया गया है ।
यहां पर बात यह नहीं समझ में आ रही है कि जब शासकीय बालक माध्यमिक विद्यालय न्यू बरौधा में शैक्षणिक स्थिति शून्य के कगार पर पाई गई फिर भी दण्डात्मक कार्यवाही के स्थान पर शिकायतों को विलोपित करने की सिफारिश आखिरकार क्यों की जा रही है जबकि इस विद्यालय की शिकायत कोई पहली बार नहीं की गई है करीब 10 से 15 शिकायतकर्ताओं ने अलग अलग नंबरों से इस विद्यालय के शैक्षणिक दुर्दशा की शिकायतें देश हित और समाज हित को ध्यान में रखते हुए की है एवं इन शिकायतों पर कुछ शिकायतें तो सीधे केन्द्र सरकार से भी की गई है जिसके निराकरण के आदेश राज्य शिक्षा केंद्र भोपाल को दिए गए हैं ।
पूर्व में भी की गई हैं शिकायतें – सनत कुमार पटेल के कार्यकाल में चतुर्दिक भ्रष्टाचार और अव्यवस्था की शिकायतें पहले भी कई बार की गई थी जिस पर तत्तकालीन जिला कलेक्टरों ने अपने अपने कार्य काल में इस विद्यालय की जांच के आदेश भी दिए थे जिसका पालन करते हुए एस डी एम ब्योहारी के द्वारा 3 वर्ष पूर्व भी जांच की गई थी उस समय भी छात्रों की शैक्षणिक स्थिति खराब ही पाई गई थी एवं कारण बताओ नोटिस भी जारी करवाई गई थी परंतु विद्यालय ने तो मानो शैक्षणिक भविष्य बर्बाद करने का ठेका ही ले रखा हो इसीलिए सुधार के निर्देश मिलने के बाद भी उस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया ।
‌इनके कथन हैं
एल 4 स्तर में शिकायतें आ चुकी हैं हम अपने स्तर से कठोर कार्रवाई करेंगे।
श्री धनराजु एस ,संचालक राज्य शिक्षा केंद्र,आई ए एस
मैं किसी दिन स्वयं ही निरीक्षण करने आऊंगा और अनियमितता पाए जाने पर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई करूंगा
श्री सहदेव सिंह संयुक्त संचालक शिक्षा संभाग शहडोल
कोरोनाकाल के कारण बच्चों का शैक्षणिक स्तर‌ कमजोर हुआ है, दोबारा जांच की जाएगी।
उपसंचालक शिक्षा शहडोल ,व्ही डी पाठक
यदि शासकीय राशि का दुरुपयोग किया जाता है तो दण्ड निश्चित है,। श्री मदन त्रिपाठी ,डी पी सी शहडोल

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