रेहवा घाटी में फंसी एक और गाय की हुई मौत// लगभग दर्जन भर गायों की भूख और पोषण के अभाव में जीवन संकट में// सामाजिक कार्यकर्ता शिवानन्द द्विवेदी ने प्रशासन पर लगाया आरोप, कहा प्रशासनिक अधिकारियों ने मन से नही किया कोई प्रयास, मात्र दबाब में कर रहा काम//
दिनांक 23 अक्टूबर 2021 को जिला रीवा अंतर्गत सिरमौर वन परिक्षेत्र के सरई बीट में रेहवा घाटी की हजारों फीट गहरी खाई के नीचे लगभग 150 की संख्या में गोवंशों को जबरन हत्या की दृष्टि से धकेल दिया गया था जिसमें लगभग दो दर्जन गोवंशों की मौके पर ही मौत हो गई थी जबकि दर्जनों घायल हो गए थे। मामला सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी के संज्ञान में आने के बाद उनका रेस्क्यू और इलाज प्रारंभ किया गया जिसमें 104 की संख्या में गोवंशों को रेस्क्यू किया जाकर घाटी के ऊपर निकाला गया जबकि प्रशासन के द्वारा उन्हें किसी गौशाला में पोषण और पुनर्वास हेतु सुरक्षा की दृष्टि से नहीं पहुंचाया गया और बेसहारा ही छोड़ दिया गया था एवं शेष बचे हुए लगभग 15 गोवंश का घायल अवस्था में इलाज चलता रहा। क्योंकि वारदात 27 एवं 28 सितंबर के दरमियान की थी इसलिए तब से लेकर आज तक पर्याप्त और समुचित भूषा और पोषण की व्यवस्था न होने से घायल गोवंश दिन प्रतिदिन कमजोर होते गए।
*प्रशासन के गैर जिम्मेदाराना रवैये के चलते एक एक कर मर रही गायें*
पिछले लगभग 2 सप्ताह के बीच में दर्जनभर गोवंश इलाज और पोषण के अभाव में मर चुके हैं एवं दिनांक 23 अक्टूबर 2021 को एक काली रंग की गाय की मृत्यु हो गई जिसका इलाज इसके पहले भी 2 बार किया जा चुका था। उपस्थित डॉक्टर और गोसेवक ने बताया की घायल और कमजोर होने की वजह से पर्याप्त पोषण न होने से गाय की मौत हो गई। ज्ञातव्य हो कि गाय के पीछे के हिस्से में गुदाद्वार में रेक्टम भाग को कीड़ों ने खा लिया था। दिनांक 23 अक्टूबर की स्थिति यह है कि अभी भी कुल 13 नग गोवंश फंसे हुए हैं जिसमें 11 गाय हैं एवं दो छोटे बछड़े हैं। हालाकी यह आंकड़ा बहुत स्पष्ट नहीं है क्योंकि गहरी घाटी और घनी झाड़ियों के बीच में कई अन्य गोवंश फंसे हुए हो सकते हैं।
*पंचायत और वन विभाग नदारद मात्र देरी से पहुँचे पशु चिकित्सक*
दिनांक 23 अक्टूबर को रेस्क्यू एवं इलाज के दौरान मात्र पशु चिकित्सा विभाग के दो गौ सेवक ही 2 बजे दोपहर पहुंच पाए जबकि अन्य वेटरनरी सर्जन विवेक मिश्रा गढ़, रत्नेश सिंह देवास और एपी सिंह सिरमौर समय पर उपस्थित नहीं हुए एवं शाम 4:00 बजे के बाद घाटी के ऊपर पहुंचे और वहीं से वापस भी आ गए। रेस्क्यू और इलाज के दौरान भूसा चारा की कोई व्यवस्था भी नहीं हो सकी जिसका जिम्मा पंचायत विभाग को दिया गया था। इस इस प्रकार हालात यह हैं कि भूख से कमजोर हो रही गायों की दिन प्रतिदिन मौत होती जा रही है और प्रशासन मात्र मूकदर्शक बना बैठा है।



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