मत्स्य पालन बाणसागर में बढती हुई समस्याएं
दिनों-दिन बढ रही हैं अवैधानिक गतिविधियां

शहडोल:-शहडोल जिले के अंतर्गत आने वाले बाणसागर बांध परियोजना के क्षेत्र में ठेकेदार द्वारा अवैध तरीके से अपने मछुआरों को लाकर मछली का शिकार कराया जा रहा है। इसकी वजह से स्थानीय मछुआरों को काम नहीं मिल रहा है और बेरोजगारी के चलते मछुआरों का परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा है। इसमें बाणसागर मत्स्याखेट महासंघ व स्थानीय समीतियों द्वारा ठेकेदार के साथ सांठगांठ कर न सिर्फ कमीशनखोरी की जा रही है बल्कि स्थानीय मजदूरों का अधिकार छीनकर उन्हें भूखों मरने के लिये छोड़ दिया गया है। इसके चलते जिले के मछुआरों का परिवार चाहकर भी कुछ नहीं कर पा रहा है। वहीं इस पूरे मामले की निगरानी करने वाला मत्स्य महासंघ आंखों में पट्टी बांधकर बैठा हुआ है। मप्र मत्स्य महासंघ मर्यादित भोपाल द्वारा करीब 2 साल पूर्व हुये ठेके में । ठेकेदार द्वारा बाहर से जिन मछुआरों को जिले में लाकर कार्य लिया जा रहा है, उनमें से किसी का भी पुलिस वेरीफिकेशन नहीं कराया गया है।
ये हैं ठेके की शर्तें
जानकारी अनुसार ठेकेदार व मप्र मत्स्य महासंघ मर्यादित भोपाल के बीच हुए अनुबंध के अनुसार ठेकेदार द्वारा बाणसागर बांध परियोजना से डूब प्रभावित, विस्थापित ग्रामों के मछुआरों व ग्रामीणों को ही मछली शिकार के लिए काम पर रखा जाना है। किसी भी स्थिति में जिला व संभाग से बाहर के मछुआरों को काम पर नहीं रखा जा सकता। यदि स्थानीय मछुआरें काम नहीं करते और ठेकेदार को कोई नुकसान होता है तो ठेकेदार को किसी प्रकार की छूट व हर्जाना का भुगतान नहीं किया जाएगा।
समिति की भूमिका संदिग्ध
मछली शिकार के लिए जो नियम बनाए गए हैं, उसके अनुसार बाणसागर परियोजना के मत्स्य महासंघ द्वारा समितियों का गठन किया गया है। इन समितियों का काम है कि स्थानीय मछुआरों का चयन कर ठेकेदार के लिये मछली का शिकार करायें। स्थानीय मछुआरे जो मछली पकड़ते हैं वो ठेकेदार को सौंप दी जाती हैं। राज्य शासन की नई दर के अनुसार छोटी मछलियों के शिकार पर
आर्थिक तंगी के शिकार
दूसरे राज्यों के मछुआरों से मछली के शिकार का ठेका लेने वाले ठेकेदार द्वारा अनुबंध शर्तों को ताक पर रख बाहर के मजदूर मछुआरों को लाया गया है। इनके जरिये मछली का शिकार कराया जा रहा है। जबकि शहडोल जिले में कई मछली समितियां है जिसमें करीब 1 हजार स्थानीय मछुआरे रोजगार न होने पर घर में खाली बैठे हैं। इसकी वजह से उनका परिवार आर्थिंक तंगी से जूझ रहा है। वहीं बाहर से लाये गए मछुआरे बांध के किनारे कैम्प लगाकर दिनरात मछली का शिकार कर रहे हैं। इन्हें रोकने-टोकने वाला कोई नहीं है। स्थानीय मछुआरे सुबह 10 से शाम 5 बजे तक ही काम करते हैं जिससे दिनभर में 1-दो क्विंटल मछली ही मिल पाती है। वहीं बाहर के मछुआरे सुबह 5 बजे से रात 12 बजे तक काम करते हैं जिससे ठेकेदार को अधिक मुनाफा होता है। इसलिये बाहर के मछुआरों से काम लिया जा रहा है।

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