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National Breaking: आरटीआई एवं सिविल कंस्ट्रक्शन वर्क विषय पर आयोजित हुआ 111 में सप्ताहिक वेबिनार // एनएचएआई विशेषज्ञ कंसलटेंट इंजीनियर अलक्षेंद्र मिश्रा ने विस्तार से समझाया तकनीकी जानकारी // पार्टिसिपेंट्स ने भी रखे अपने विचार, जाना रोड कंस्ट्रक्शन वर्क की बारीकियां// केंद्रीय सूचना आयुक्त शैलेश गांधी ने धारा 8 के विषय में दी जानकारी//

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सूचना के अधिकार कानून से संबंधित जानकारी को जन जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से प्रत्येक रविवार सुबह 11:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक आरटीआई वेबीनार के आयोजन किए जाते हैं। इसी श्रृंखला में दिनांक 7 अगस्त 2022 को आरटीआई और सिविल कंस्ट्रक्शन वर्क जिसमें स्टेट रोड कंस्ट्रक्शन, नेशनल हाईवे रोड कंस्ट्रक्शन आदि विषयों पर तकनीकी विशेषज्ञ एवं एनएचएआई के कंसलटेंट इंजीनियर अलक्षेंद्र मिश्रा के द्वारा विस्तार से बारीकियां बताई गई। कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त शैलेष गांधी उपस्थित रहे जिन्होंने आरटीआई से जुड़े हुए पार्टिसिपेंट्स के प्रश्नों के जवाब दिए एवं धारा 8, 9 और 11 से संबंधित अपवाद पर भी चर्चा की और जो जानकारियां इन धाराओं के हवाले से छुपाई जाती हैं उसे सार्वजनिक करने के बारे में कहा और यह भी कहा की यह पूरी तरह से गैर कानूनी है कि लोक सूचना अधिकारी धारा 8, 9 अथवा 11 का उपयोग करते हुए जानकारियां नहीं देते।

  *डीपीआर, अप्रूव्ड बिल और अप्रूव्ड ड्राइंग की मदद से जान सकते हैं सड़क निर्माण में खामियां*

  एनएचएआई के कंसलटिंग इंजीनियर अलक्षेंद्र मिश्रा ने बताया किसी भी सिविल कंस्ट्रक्शन के कार्य के निर्माण के पहले उसका डीपीआर और अप्रूव्ड ड्राइंग एवं अन्य तकनीकी जानकारियां सहित निर्माण एजेंसी की जानकारी प्राप्त कर लेना चाहिए। यदि निर्माण एजेंसी कार्य के दौरान कोई गड़बड़ी करती है तो वहां धारा 2(जे)(1) के तहत निरीक्षण एवं धारा 2(जे)(3) के तहत सैंपल प्राप्त करने के लिए आरटीआई लगाई जा सकती है। जहां भी कार्य में गड़बड़ी दिखे वहां इसकी शिकायत भी की जा सकती है और शिकायत प्रधानमंत्री पोर्टल पर भी दर्ज की जा सकती है। इससे कंपनी पर प्रेशर बढ़ता है और ब्लैक लिस्ट होने के डर से 80 प्रतिशत तक कार्य में सुधार हो जाता है। लेकिन अमूमन होता यह है कि बड़े कार्यों में लोगों की रुचि नहीं रहती है और ध्यान नहीं देते हैं जिसकी वजह से कंपनियां घालमेल कर निकल जाती है। बाद में कार्य होने के उपरांत इनकी जांच करवाना थोड़ा मुश्किल पड़ जाता है। उन्होंने कुछ अपने अनुभव भी साझा किए और बताया कि किस तरह से पंजाब एवं हरियाणा में एनएचएआई के प्रोजेक्ट को लेकर उन्होंने आरटीआई लगाई थी और उनका आवेदन जगह-जगह घुमाया गया और जानकारी छुपाने का प्रयास किया गया। इसी प्रकार पार्टिसिपेंट्स छत्तीसगढ़ से देवेंद्र अग्रवाल, जोधपुर राजस्थान से सुरेंद्र जैन, राजगढ़ मध्य प्रदेश से जयपाल सिंह खींची और बिहार से रजि हसन आदि पार्टिसिपेंट्स ने भी अपने प्रश्न अलक्षेंद्र मिश्रा के समक्ष रखे जिसका उन्होंने जवाब दिया।

  *धारा 8, 9 या 11 का हवाला देकर अपवाद बोलकर जानकारियां रोकना गैरकानूनी  – पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त शैलेश गांधी*

   पार्टिसिपेंट्स के प्रश्नों का जवाब देते हुए पूर्व केंद्रीय सूचना आयुक्त शैलेश गांधी ने एक बार पुनः लोक सूचना अधिकारियों एवं सूचना आयोग की कार्यप्रणाली पर प्रश्न खड़ा करते हुए कहा कि आजकल धारा 8, 9 या 11 का हवाला देकर गलत तरीके से गैरकानूनी ढंग से जानकारियां रोकने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आज अधिकतम जानकारियां पब्लिक पोर्टल पर रखने योग्य होती हैं और आवेदकों को दिए जाने चाहिए लेकिन होता यह है कि गिरीश रामचंद्र देशपांडे आदि जैसे आधे अधूरे और गलत सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का हवाला देते हुए ज्यादातर जानकारियां रोकी जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि जो आवेदक अपना आर्गुमेंट सही तरीके से नहीं रख पाते वह हमारे सत्यमेव जयते डॉट इन्फो नामक वह पोर्टल पर जाकर जानकारी प्राप्त कर संबंधित तर्क किस प्रकार से रखने हैं उसकी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं और उसका अध्ययन कर अपना जवाब सूचना आयोग के समक्ष रख सकते हैं।

     इस प्रकार कार्यक्रम में दर्जनों पार्टिसिपेंट्स ने हिस्सा लिया और अपने सवाल का जवाब पाया।

    कार्यक्रम का संचालन सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी के द्वारा किया गया जबकि सहयोगियों में पत्रिका समूह के वरिष्ठ पत्रकार मृगेंद्र सिंह, अधिवक्ता नित्यानंद मिश्रा और आरटीआई रिवॉल्यूशनरी ग्रुप के आईटी सेल के पवन दुबे आदि सम्मिलित रहे।

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