ऑल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन का वार्षिक अधिवेशन पूरी में शोभायात्रा के माध्यम से प्रारंभ हुआ!

रेली का प्रारंभ बीएनआर क्लब से प्रारंभ होकर पूरी शहर का भ्रमण करते हुए मुख्य मार्ग से होते हुए पूरी रेलवे स्टेशन के समक्ष सभा में परिवर्तित हुआ। इस ऐतिहासिक रैली, शोभा यात्रा का पुरी के चौक,चौराहों पर फूलों की वर्षा कर ऐतिहासिक स्वागत किया,जो देखते बन रहा था। रैली में हिंदुस्तान के 17 जोन एवं 7 उत्पादन इकाइयों के लगभग 50,हजार महिला एवं पुरुष सदस्यों ने अपनी सहभागिता दर्ज कराई। शोभा यात्रा, रैली, पूरी रेलवे स्टेशन पर पहुंची जहां। खुला सत्र के माध्यम से कार्यक्रम प्रारंभ हुआ। खुला अधिवेशन के मंच पर ऑल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन के अध्यक्ष कन्हैया, महामंत्री शिव गोपाल मिश्रा, रेलवे बोर्ड की मेंबर अलका अरोरा मिश्रा, ईस्ट कोस्ट रेलवे के महाप्रबंधक रूप नारायण सोनकर,डीआरएम रिंकेस राय, महिला विंग की राष्ट्रीय कन्वीनर प्रमिला सिंह,ऑल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन की मंत्री चंपा वर्मा, सहित 17 जोन के महामंत्री एवं अध्यक्षों ने भगवान जगन्नाथ, बलराम और सुभद्रा के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस कार्यक्रम में बिलासपुर जोन के महामंत्री मनोज बेहरा, बिलासपुर डिवीजन के डिविजनल कोऑर्डिनेटर सी.नवीन कुमार, राजकिशोर चौधरी,के.अमर कुमार, के.के मोहती,एस. बंदोपाध्याय, संदीप चंद्रा, मुकेश कुमार,यूके बारीक, दीपक कुमार, राजकुमार, अनंत कुमार, संजय दास, राजेश डोंगरे, गिरजा शंकर पुरी, सहीत बिलासपुर जोन के तीनों डिवीजन से हजारों कार्यकर्ता ने भाग लिया। इस अवसर पर ऑल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन के महामंत्री शिव गोपाल मिश्रा ने खुला अधिवेशन को संबोधित करते हुए कहा कि रेल का निजीकरण किसी भी सूरत पर बर्दाश्त नहीं है। सरकार से 1974 के बाद कभी आर पार की लड़ाई नहीं हुई हैं,तो सरकार हमें पंगु न समझे।दोस्ताना व्यवहार के माध्यम से जो हमारी मांगे हैं वह मांगे सरकार पूरा करें। पुरानी पेंशन स्कीम को पुनः बहाल करें। आज हिंदुस्तान के रेलवे में 7:50 लाख गैर पेंशन कर्मचारी, समस्त भारत के एजेंसियों के 20 लाख कर्मचारी सहित पूरे हिंदुस्तान के सभी राज्यों के करोड़ों कर्मचारी पेंशन से महरूम हो रहे हैं। पेंशन कर्मचारियों के बुढ़ापे की लाठी है सरकार उनसे उनकी लाठी को ना छीने और छीनी हुई लाठी को पेंशन के रूप में वापस करें। रेल कर्मचारियों ने कोविड-19 के समय जब सब लोग घरों में बंद थे, रेल कर्मचारी और अधिकारियों ने बढ़-चढ़कर काम किया। ऑक्सीजन गैस, फल, दूध आवश्यक वस्तुओं को जनसामान्य लोगों के पास रेल परिवहन के माध्यम से पहुंचाया,और माल रेलगाड़ियों का संचालन किया। जिसके कारण लगभग देश के विभिन्न जोनों के लगभग 3 हजार रेल कर्मचारी शहीद हुए। खुला अधिवेशन में शिव गोपाल मिश्रा ने उपस्थित सदस्यों का अभिवादन करते हुए कहा कि ऑल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन की आप सब ताकत है जिस कारण सरकार या मंत्रालय हम को झुका नहीं सकता है। आने वाले समय में निश्चित रूप से आप सभी को इस अधिवेशन का लाभ मिलेगा,और जो हमारी मांग है की पुरानी पेंशन को पुनः बहाल कर दिया जाए सरकार पूरा करे।उन्होंने कहा कि ट्रैकमैन साथियों के लिए अंतिम स्लैब 24सौ 28सौ ना होकर 42 सौ तक कैसे पहुंचे इस विषय में हम जिम्मेदारी पूर्वक कार्यवाही में लगे हैं कि रास्ता कहां से बने। सभी विभागीय कर्मचारियों को डरने की नहीं, लड़ने की जरूरत है, बिना मांगे कुछ नहीं मिलता। 1974 की हड़ताल पर हम कब तक जीवित रहेंगे, यदि जरूरत पड़ा तो हम हड़ताल से पीछे नहीं हटेंगे।ऑल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन संघर्ष की पर्याय है, संघर्ष हमारे खून में है। हम संघर्ष से घबराने वाले नहीं हम संघर्ष से रास्ता बनाने वाले लोग हैं। रेल मंत्री अश्वनी वैष्णव ने आश्वस्त किया है कि जहां पर रेल कर्मचारी अपने कार्यों को दक्षता और कार्यकुशलता के साथ करते रहेंगे उन स्थानों पर कभी भी निजी करण या निगमीकरण नहीं किया जाएगा। खुला अधिवेशन को ऑल इंडिया रेलवे मेंस फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष कन्हैया एवं मंच पर उपस्थित अतिथियों ने भी संबोधित किया। खुला सत्र में सभी का स्वागत ईस्ट कोस्ट रेलवे श्रमिक यूनियन के महामंत्री पीके पाठसानी ने किया।
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