32-वर्ष बाद नंदलालपुर के लोगों को मिल-सकेगा सरकारी-योजनाओं का लाभ:डीएम के प्रयास से खत्म हुआ ग्रामीणों का अभिशाप

1990 में गांवों का रिकार्ड जलकर हो गया था नष्ट
कन्नौज से जिला संवाददाता बेबाक शक्ति न्यूज
कन्नौज जिले के 35 गांवों के लोग सरकारी योजनाओं का लाभ लेने से वंचित थे। उन्हें 32 वर्षों से यह अभिशाप झेलना पड़ रहा था। हालांकि जिलाधिकारी के प्रयास से एक अब एक गांव के 255 लोग सरकारी योजनाओं का लाभ ले सकेंगे। डीएम ने पुरानी चकबंदी प्रक्रिया के तहत गांव वालों के अभिलेख तैयार करवा कर उन्हें सौंप दिए हैं। मार्च 2024 तक 7 अन्य गांव के अभिलेख तैयार कराने का लक्ष्य रखा गया है। जिस पर तेजी से काम शुरू कर दिया गया।
सरकारी-योजनाओं का लाभ:डीएम के प्रयास से खत्म हुआ ग्रामीणों का अभिशाप, 1990 में गांवों का रिकार्ड जलकर हो गया था नष्ट
:कन्नौज जिले के 35 गांवों के लोग सरकारी योजनाओं का लाभ लेने से वंचित थे। उन्हें 32 वर्षों से यह अभिशाप झेलना पड़ रहा था। हालांकि जिलाधिकारी के प्रयास से एक अब एक गांव के 255 लोग सरकारी योजनाओं का लाभ ले सकेंगे। डीएम ने पुरानी चकबंदी प्रक्रिया के तहत गांव वालों के अभिलेख तैयार करवा कर उन्हें सौंप दिए हैं। मार्च 2024 तक 7 अन्य गांव के अभिलेख तैयार कराने का लक्ष्य रखा गया है। जिस पर तेजी से काम शुरू कर दिया गया।
:35 गांवों का रिकार्ड जलकर हुआ था नष्ट
छिबरामऊ तहसील क्षेत्र के 35 गांवों के अभिलेख 32 वर्ष पहले जल गए थे। उस वक्त कन्नौज फर्रूखाबाद जिले की तहसील था। फर्रूखाबाद के एक फूस बंगले में गांवों के रिकार्ड रखे हुए थे। तभी वहां किसी तरह आग लग गई थी। कन्नौज के छिबरामऊ क्षेत्र के 35 गांवों का रिकार्ड जलकर नष्ट हो गया था। तब से लेकर अब तक उन गांवों के लोग अभिलेख तैयार कराने के लिए अफसरों के कार्यालयों के चक्कर काट रहे थे। लेकिन अधिकारियों ने कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। जिस कारण 35 गांवों के लोग सरकारी योजनाओं का लाभ लेने से अब तक वंचित थे। जब यह समस्या कन्नौज के डीएम सुभ्रांत कुमार शुक्ला के सामने आई, तो उन्होंने 8 महीने पहले चकबंदी विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को अभिलेख तैयार करने के निर्देश दिए।
:किसानों को उनकी जमीनों के अभिलेख सौंप दिए
बताया गया कि जिन गांवों के अभिलेख जल गए थे। उन गांवों में वर्ष 1982 में चकबंदी प्रक्रिया कराई गई थी। उसी चकबंदी प्रक्रिया के आधार पर चकबंदी विभाग की ओर से अभिलेख बनाने का काम शुरू किया गया। परिणामस्वरूप गांव वालों के जो कागज नष्ट हो गए थे। उन्हें पुर्नजीवित करने का काम किया गया। जिस कारण नंदलालपुर गांव के 255 किसानों को उनकी जमीनों के अभिलेख सौंप दिए गए। जमीनों के कागज पाते ही ग्रामीणों में खुशी की लहर दौड़ गई।
उन्होंने डीएम सुभ्रांत कुमार शुक्ला के प्रयासों की प्रशंशा की। डीएम सुभ्रांत कुमार शुक्ला ने बताया कि क्षेत्र के 35 गांवों के लोग अब तक अभिलेख न होने का दंश झेलते आ रहे हैं। उन गांवों को अभिलेख जले गांव के नाम से जाना जाने लगा।
1 गांव के तैयार हुए अभिलेख, 7 गांवों के कागज हो रहे तैयार
डीएम के प्रयास से फिलहाल 1 गांव के अभिलेख तैयार करवा दिए गए। जिस कारण अब नंदलालपुर गांव के किसान सरकारी योजनाओं का लाभ ले सकेंगे और जरूरतमंद लोग बैंकों से लोन भी ले सकेंगे। उन्होंने कहा कि अन्य गांवों के अभिलेख तैयार करवाने का काम तेजी से चल रहा है। जल्द ही सभी 35 गांवों के अभिलेख तैयार करवा दिए जाएंगे। फिलहाल 7 गांवों के अभिलेख तैयार करने के लिए मार्च 2024 तक लक्ष्य रखा गया है।

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