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कांग्रेस जिलाध्यक्ष सुभाष गुप्ता ने किया अपराध करना स्वीकार। आस्था के नाम पर ट्रस्ट गैंग सक्रिय.?

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शहडोल। शहडोल जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुभाष गुप्ता का विवादों से लगातार नाता बना ही रहता है पूर्व में कंचनपुर की आदिवासी की जमीन अपनी पत्नी के नाम खरीदने का मामला सामने आया था जिसका मामला स्थानी अनुविभागीय अधिकारी सोहागपुर न्यायालय में लंबित है। अभी ताजा मामले में सुभाष गुप्ता द्वारा तथा कथित ट्रस्ट के नाम से बुढार रोड स्थित गणेश मंदिर के पीछे अवैध निर्माण किया गया था जिस पर स्थानीय नगर पालिका द्वारा सुभाष गुप्ता के ऊपर धारा 187(8) नगर पालिका अधिनियम के तहत मुख्य न्यायाधीश मजिस्टिक न्यायालय में परिवार प्रस्तुत किया था जहां सुभाष गुप्ता ने अपराध किया जाना स्वीकार है जिस पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्रीमती प्रीति साल्वे ने अभियुक्त सुभाष गुप्ता को धारा 187(8) नगर पालिका अधिनियम 1969 के आरोप में ₹1000(एक हजार रुपए)के अर्थ दंड से दंडित किया है साथ ही अभियुक्त द्वारा अर्थ दंड की राशि अदा न करने पर 15 दिवस का कारावास पृथक से भुगताए जाने की सजा सुनाई है। आश्चर्य की बात यह है कि तथाकथित ट्रस्ट को हाई कोर्ट जबलपुर के आदेश पर स्थानीय अनुविभागीय अधिकारी द्वारा भंग कर दिया गया था साथी ही प्रत्येक दिवस मंदिर की तात्कालिक व्यवस्था हेतु तहसीलदार सोहागपुर की अध्यक्षता में तथा अनुविभागीय अधिकारी लोक निर्माण विभाग, थाना प्रभारी कोतवाली, शहडोल राजस्व निरीक्षक सोहागपुर नंबर 1 सदस्यता में अस्थाई कार्यकारी समिति मंदिर की व्यवस्था हेतु गठित की गई थी । उक्त विषय सहित हाई कोर्ट में विचार अधीन मामले को छुपाते हुए अपराधी द्वारा जुर्म को स्वीकार किया गया है अब देखना है कि उक्त सभी विषयों को लेकर स्थानीय शासन प्रशासन क्या कार्यवाही करता है..?
क्या ऐसे ही होता रहेगा लोगों की आस्था से खिलवाड़:-
प्राप्त सूत्रों के जानकारी के आधार पर मात्र भगवान गणेश का मंदिर ही बस अनियमितताओं से नहीं आहत हैं आस्था से खिलवाड़ शहडोल नगर व जिले में अन्य मंदिर में भी हो रहा है उदाहरणतः लोगों की आस्था का केंद्र घरौला नाथ भी मंदिर है मंदिर के नाम से कौन सा ट्रस्ट है ओर ट्रस्ट का ट्रस्टी कौन कौन है उनकी जमीनें कहां कहां है मंदिर की सम्पत्ति सहित ट्रस्टियों की संपत्ति कितनी है वैध है उचित है अवैध है तो कहां से आई इत्यादि विषय जांच का है.?
शहडोल जिले में अगर मंदिर ट्रस्टों के नाम से अनियमिताएं अगर व्यापक रूप से है तो शहडोल में कथित ट्रस्टों मंदिरों के नाम से ट्रस्ट माफियाओं के अस्तित्व को नकारा नहीं जा सकता है। स्थानीय जन तो मात्र भगवान सहित स्थानीय शासन प्रशासन से निवेदन कर सकतें हैं की भगवान के नाम पर जन आस्था, भगवान पे चढ़ाएं जाने वाले पैसों के गबन व एसे धोखाधड़ी करनें वालों के आय, सम्पत्ति व आपराधिक रिकॉर्ड निकाल कर अतिशीघ्र कार्यवाही की जानी चाहिए।

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