हिमाचल प्रदेश तथा देश की राजनीति में मचा इस बार भूचाल

हिमाचल प्रदेश पी सी शर्मा की कलम से -: इस बार हिमाचल की राजनीति में बहुत बड़ा भूचाल आया हुआ है। हर दिन कुछ न कुछ राजनीति में हलचल हो रही है। जैसे ही हिमाचल में मंगलवार को उन्होंने कांग्रेस के बागी विधायको को विधान सभा चुनावों के लिए टिकट दिए उसके बाद बी जे पी के लोगों ने इस्तीफ शुरू कर दिया है। कुर्सी को राजनीति को लेकर पर्व मुख्य मंत्री शांता कुमार ने क्या ब्यान दिया उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी सिर्फ कुर्सी के लिए राजनीति कर रही है। इस बात पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार बड़े दुःखी मन है। जिसे ही लोक सभा चुनावों का बिगुल बजा उसी दिन से हिमाचल प्रदेश बी जे पी सरकार बेकपुट पर आ गई है। पहले तो हिमाचल प्रदेश की कॉग्रेस सरकार को बी जे पी सरकार ने गिराने की पूरी कोशिश की लेकिन इसमें भी वह लोगों फेल हो गए। मण्डी लोक सभा क्षेत्र ही बी जे पी एक अभिनेत्री कंगना रनौत को अपना उम्मीदवार घोषित किया उसी दिन से हिमाचल प्रदेश बी जे पी में बगावत शुरू हो गई। यह अभिनेत्री हिमाचल प्रदेश में पैदा हुई और यह अभिनेत्री किसानों को आतंकवादी कह सकी है। क्या ऐसा ब्यान देना इनको शोभा देता है वह भी तो एक ग्रामीण क्षेत्र के किसान की बेटी है। हिमाचल प्रदेश की जनता पढ़ी लिखी है। इस का जवाब उनको जनता इन लोक सभा चुनावों में दे सकती है। केंद्र की मोदी सरकार भी को भी बार बार जनता उनको कुर्सी पर बैठा रही है हर पांच साल में किसी और पार्टी को जीतकर सता में बैठना चाहिए। जिसको जनता बार बार कुर्सी देती है वह जनता के साथ डिक्टेटर सा व्यवहार करना शुरू कर देता है। इस बार जनता को सोच समझकर वोट देने की जरूरत है। दस साल में मोदी सरकार ने कोई रोजगार नहीं दिया जनता को केंद्र को मोदी सरकार ने जबकि दस साल के आपने कार्यकाल में हर सरकारी संपति का निजीकरण किया गया है। निजीकरण का मतलब है निजीकरण करो और चुनावों के लिए चंदा इक्ठा करो। पहले अंग्रेजों ने भारत देश को लुटा फिर कांग्रेस ने देश को ने अब बी जे पी लुटा रही है। यह हमारे देश भारत का दुर्भाग्य है कि कोई भी नेता देश के लिए राजनीति, जनता के लिए राजनीति नहीं कर रहा है। खाली कुर्सी के लिए राजनीति हो रही है। जो मोदी सता में आने के लिए कहता था कि हर भारतवासी एक खाते में हम लोगो 15,15 लाख रुपए डालेंगे अब कह है वो 15 लाख निजीकरण तथा चंदे के नाम पर देश में लूट मची हुई है। आज देश के बारे में कोई भी नेता नहीं सोच रहा है। सबको अपनी कुर्सी की पड़ी है। आजतक देश भारत का पहला प्रधान मंत्री है जिसने अपने दस साल के कार्यकाल में कोई लाइव प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं की है। क्योंकि उसकी पोल खुल जानी है जनता के बीच में यही कारण है कि वह प्रेस कॉन्फ्रेंस में नहीं आते है। मोदी सरकार से पहले प्रधान मंत्री रहे है वह सब लोग लाइव प्रेस कांफ्रेंस करते थे और प्रेस कॉन्फ्रेंस में जनता के लिए हितों के लिए क्या किया रहा है और सरकार क्या कर रही है। जबकि हमारे संविधान में लिखा गया है कि जिस दिन हमारे देश भारत की पहली राष्ट्रपति आदिवासी से बनेगी उस दिन से आरक्षण समाप्त हो जाएगा, लेकिन कोई भी राजनेता इस बात को लोक सभा तथा राज्य सभा में नहीं बोल पाया है। क्योंकि मोदी सरकार आरक्षण समाप्त नहीं करना चाहती है। यही तो हमारे देश तथा जनता का दुर्भाग्य है।
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