तिल्दा नेवरा शहर में अवैध लाल ईंटो का मूल्य बेलगाम प्रशासन ने साधी चुप्पी

भट्ठा संचालक के आड़ में सरकारी जमीन पर कब्जा
तिल्दा नेवरा (रायपुर ) ब्यूरो चीफ शेखर यदु
रायपुर।तिल्दा नेवरा शहर में बड़े पैमाने पर अवैध तरीके से लाल ईंट का निर्माण कार्य तेजी से किया जा रहा है। लाल ईटों की कीमत आज आसमान को छू रही है जितने भी लाल ईटा भट्टे वाले लोग हैं वह बेलगाम होकर ईटों की रेट को बढ़ा दिए हैं वर्तमान में 11 से 12 हजार रुपए ट्रिप का मूल्य चल रहा है जो अभी और बढ़ाने की उम्मीद है शहर में अभी प्रधानमंत्री आवास का कार्य चल रहा है जिसका फायदा उठाकर ईटा भट्ठा संचालन करने वाले लोग लोगों की मजबूरी का फायदा उठाते हुए मनमाना रेट लगाकर लाल ईटा बेच रहे हैं सैकड़ो एकड़ सरकारी जमीन पर कब्जा किए हुए हैं ईटा भट्ठा के आड़ में लेकिन प्रशासन मौन साधे हुए बैठा हुआ है जब से नए तहसीलदार का आगमन हुआ है तब से ईटा भट्ठा वालों के ऊपर कोई कार्रवाई नहीं की गई है जिससे प्रशासन और भट्ठा मालिकों के बीच के संबंधों पर प्रश्न वाचक चिन्ह लगना लाजमी है भट्ठों में ईंट पकाने के लिए पेड़ की कटाई भी की जा रही है। पेड़ों की अंधाधुंध कटाई से पर्यावरण पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। इसकी वजह से जैव विविधता की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। इससे न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि जल स्रोतों की बर्बादी भी हो रही है। लेकिन जिम्मेदार विभाग को इसकी कोई परवाह नहीं है। बता दें कि, तिल्दा ,सासाहोली, नेवरा एवं आस पास के गांव में बड़े पैमाने पर लाल ईंट भट्ठों का कारोबार लगातार बढ़ते जा रहा है। प्रशासन की अनदेखी के कारण इन ईंट भट्ठा संचालकों के हौसले बुलंद हैं और वे प्रतिबंधित लाल ईंटों का उत्पादन खुलेआम कर रहे हैं।
.…………
करोड़ों का बिजनेस बिना जीएसटी बिल के
…………………
अवैध रूप से ईंट भट्ठों का कारोबार चल रहा है। इसके बावजूद विभागीय अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे हैं। प्रत्येक दो हजार ईटों को दस हजार रूपये में बेची जा रही है। हर साल करोड़ों का बिजनेस होता है। वह भी बिना जीएसटी बिल के जिसके चलते केंद्र और राज्य सरकार को भारी क्षति हो रही है। ईंट संचालकों द्वारा बड़े पैमाने पर ईंट का निर्माण करने के लिए शासकीय और निजी जमीन का खनन किया जा रहा है। इससे पर्यावरण तो प्रभावित हो रहा है।
…………………..
क्षेत्र में गिर रहा लगातार जल स्तर
………………
गर्मी के मौसम में पीने के पानी की बड़ी समस्या होती है। तालाबों और सरकारी नल-जल के बोर का जलस्तर जवाब देने लग जाता है। ऐसी स्थिति में ईंट भट्ठा संचालक बोर और तालाबों से पानी लेकर लाखों की तादात में ईंट का निर्माण कर रहे हैं, जिसके प्रति विभाग के अधिकारी कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। एक सर्वे में सामने आया कि ईटा भट्ठा में उपयोग होने वाले कोयले से जमीन के तापमान में लगातार वृद्धि हो रही है 50000 हजार की क्षमता वाला ईटा भट्ठाअपने चारों ओर 1500 मीटर के दायरे को प्रभावित करता है जबकि 100000 क्षमता वाले ईटा भट्ठा अपने चारों ओर 3 किलोमीटर के दायरे को प्रभावित करता है शहर में ऐसे सैकड़ो अवैध ईटा भट्ठा संचालित हो रहा है जिस शहर की तापमान दिन-ब-दिन बढ़ते जा रहा है लेकिन खनिज विभाग इस तथ्य से अनजान है वहीं ईंट भट्ठा मजदूरों का अब तक ठेकेदार के द्वारा कोई पंजीयन नहीं कराया गया है, जबकि मजदूरों का पंजीयन कराना अनिवार्य होता है। ठेकेदार सारे नियम कायदे कानून को ताक पर रखकर मजदूरों से ईंट भट्ठा में ईंट का निर्माण करा रहा है।
……………
सैकड़ो एकड़ सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा
…………….
तिल्दा नेवरा क्षेत्र के अंतर्गत ईटा भट्ठा के आड़ में सैकड़ो एकड़ की सरकारी जमीन पर कुछ रसूखदार लोग कब्जा जमा कर बैठे हुए हैं यह जानकारी एक सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त की गई है शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा पर भी प्रशासन आज तक कोई कार्यवाही नहीं कर पाई है

Subscribe to my channel
Comments are closed.