धूमधाम से निकाली गई महाराणा प्रताप की भव्य शौर्य यात्रा

जिला संवाददाता शिवाकर तिवारी की रिपोर्ट
शहडोल/ब्यौहारी। वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप जी की 489 वीं जयंती के शुभ अवसर पर ब्यौहारी नगर में भव्य शौर्य यात्रा पूर्व अध्यक्ष सहकारी बैंक वीरेश सिंह रिंकू की अध्यक्षता में निकाली गई। इस शौर्य यात्रा में शहडोल, अनुपपुर, उमरिया, सीधी, रीवा के क्षत्रिय समाज के लोगों के साथ ब्यौहारी के समस्त क्षत्रिय समाज, श्री राजपूत करणी सेना के पदाधिकारी एवं रॉयल राजपूत संगठन पदाधिकारी शामिल हुए।क्षत्रिय समाज के द्वारा धूमधाम, हर्षोल्लास के साथ क्षत्रिय कुलभूषण, वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप जी की 489वीं जयंती के शुभ अवसर पर 9 जून रविवार कों शाम 4 बजे से शौर्य यात्रा का आयोजन किया गया. शौर्य यात्रा का शुभारंभ टाटा मोटर्स रीवा रोड से किया गया। शौर्य यात्रा ब्यौहारी नगर के टाटा मोटर्स से प्रारंभ होकर टंकी तिराहा, चुंगी नाका, बनसुकली चौराहा, बस स्टैंड से होते हुए रेलवे तिराहा सिद्धिविनायक पैलेस में समाप्त हुई।
युवराज दिव्यराज रहे मुख्य अतिथि
सिद्धिविनायक पैलेस में शौर्य यात्रा समापन के पश्चात. मंचीय कार्यक्रम का आयोजन भी किया गया. जिसमें मुख्य अतिथि के तौर पर रीवा राजघाराने के युवराज दिव्यराज सिंह सिरमौर विधायक, विशिष्ट अतिथि के तौर पर चित्रकूट विधायक सुरेंद्र सिंह गहरवार, सोहागपुर गढ़ी से कुंवर यशवर्धन सिंह, ताला गढ़ी से कुंवर कपिध्वज सिंह, अभ्युदय सिंह मड़वास, बुढ़वा गढ़ी से कुंवर हर्ष सिंह, कुआं गढ़ी से सूर्य प्रताप सिंह, पतरेही गढ़ी से राजमणि सिंह, अरुण सिंह त्रिनेत्र पत्रिका संपादक, करणी सेना के प्रदेश उपाध्यक्ष गणेश प्रताप सिंह दादू, संभागीय अध्यक्ष देवी सिंह, रॉयल राजपूत के चक्रधर सिंह, जिला अध्यक्ष शिवम सिंह उपस्थित रहे।
विश्व का सबसे पुरातन धर्म सनातन धर्म : दिव्यराज
दिव्यराज सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा कि विश्व का सबसे पुरातन धर्म सनातन धर्म हैं. और इस पूरे विश्व में सनातन धर्म सिर्फ भारत राष्ट्र में बचा हैं। जिसका रक्षा सदैव क्षत्रिय समाज के द्वारा किया गया है. क्षत्रिय समाज का गौरवशाली इतिहास है. जिसे झूठलाया नहीं जा सकता. बाबर, अकबर और अंग्रेजो नें युद्ध के दौरान क्षत्रियों के सिर के पहाड़ बनाए हैं. लेकिन उसके बावजूद भी क्षत्रिय सर कटवाने में कभी भी पीछे नहीं हटे. वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप जी की जयंती में आमंत्रित करने के लिए उन्होंने वीरेश सिंह रिंकू एवं आयोजन समिति को धन्यवाद देते हुए कहा समाज के उत्थान के लिए ऐसे आयोजन हमेशा करवाते रहें।
क्षत्रिय को युद्ध के लिए हर समय तैयार रहना चाहिए : कपिध्वज
ताला गढ़ी के कुंवर कपिध्वज सिंह नें अपने बघेली उद्बोधन में कहा कि समय-समय पर समाज के लोगों के द्वारा ऐसे आयोजन किए जाते रहना चाहिए क्योंकि वर्तमान समय में क्षत्रिय बंधु बांधव अपनी विशिष्ट सेवा दे रहे हैं. चल यात्रा के दौरान सर्वहारा समाज द्वारा अलग-अलग स्थानों में जो सम्मान महाराणा प्रताप जी की शौर्य में दिया गया. उसका मैं सम्मान करता हुँ. हमें इनकी रक्षा के लिए हमेशा हर क्षेत्र में युद्ध के लिए तैयार रहना चाहिए।
हम सबको एक होने की जरूरत : रिंकू
विषम परिस्थिति होते हुए भी क्षत्रिय समाज हमेशा अगुवा रहने वाला समाज रहा हैं. हमारा इतिहास है जिसे सारा विश्व जानता है. हमें अपने पूर्वजों से सीखने की जरूरत है. हम सभी को मिलकर अपने समाज के प्रति समर्पित और मजबूत रहना है. देश और प्रदेश में समाज के कई संगठन कम कर रहे हैं. हमें आपसी द्वन्द मिटाकर समाज के लिए एकजुट होकर कार्य करना है। आपकी सामाजिकता और मानसिकता एक नहीं रहेगी तो हम सभी टुकड़े-टुकड़े में बट जाएंगे. हम सभी संकल्प लें कि हम एकजुट होकर समाज के लिए कार्य करेंगे।
श्री राजपूत करणी सेना के प्रदेश उपाध्यक्ष गणेश प्रताप सिंह दादू ने बताया कि क्षत्रिय कुलभूषण, वीर शिरोमणि योद्धा महाराणा प्रताप जी का जन्म 9 मई 1540 को राजस्थान में हुआ था. महाराणा प्रताप जी ने अपनी वीरता से मुगलों के घमंड को चूर किया और उनके हमलों से मेवाड़ के साथ-साथ भारत भूमि की रक्षा भी की थी।
प्रत्येक वर्ष देशभर में महाराणा प्रताप की जयंती धूमधाम और हर्षोल्लास से मनाई जाती है. महाराणा प्रताप जी की 489वीं जयंती ब्यौहारी और अनुपपुर में धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाई गई हैं। महाराणा प्रताप मेवाड़ के शुरवीर योद्धा के साथ ही शौर्य, पराक्रम और साहस के प्रतीक माने जाते हैं। उन्होंने श्री राजपूत करणी सेना सभी पदाधिकारी के साथ साथ समस्त क्षत्रिय समाज के लोगों कों साधुवाद के साथ धन्यवाद भी प्रेषित किया है.
क्षत्रिय कुलभूषण, वीर शिरोमणि, शुरवीर योद्धा महाराणा प्रताप जयंती के अवसर पर इस शौर्य यात्रा में शामिल होकर अपना जो अपना सहयोग प्रदान किया हैं वो ऐतिहासिक है।
इस दौरान शहडोल, अनूपपुर, उमरिया, रीवा, सीधी और सतना से सैकड़ो की संख्या में क्षत्रिय बंधु वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की शौर्य यात्रा में शामिल हुए।

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