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आरटीई के तहत प्राइवेट विद्यालयों में सैकड़ो सीट खाली, हजारों बच्चों का भविष्य लगा दाव पर

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मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव से पत्रकार विकास परिषद प्रदेश संगठन सचिव जुनैद खान ने की मांग

आरटीई के दूसरा चरण का नए प्रवेश आवेदन करने बच्चे अभिभावक कर रहे इंतजार

बेबाक शक्ति मासिक समाचार पत्र
स्थानीय संपादक अखिलेश कुमार शर्मा मोबाइल नंबर 7999140850

शहडोल। पत्रकार विकास परिषद प्रदेश संगठन सचिव जुनैद खान ने प्रदेश के मुखिया डॉक्टर मोहन यादव से की मांग प्रदेश संगठन सचिव जुनैद खान ने अपने ट्विटर हैंडल पर ट्वीट कर प्रदेश के मुखिया डॉक्टर मोहन यादव से मांग करते हुए लिखा कि जिला सहित प्रदेश के गरीब बच्चे RTE के तहत होने वाले प्रवेश की द्वितीय चरण अभी तक कोई भी डेट नहीं आई है। जिन विद्यालयों में सीट खाली हैं, या गरीब बच्चे जो छुट गए हैं, उनके भविष्य को देखते हुए आरटीई के दूसरा चरण का प्रवेश आवेदन करने की तिथि शीघ्र से शीघ्र घोषित करने का कष्ट करें। मध्य प्रदेश के मुखिया डां. मोहन यादव जी से निवेदन करता हूं की जल्द से जल्द दूसरा चरण प्रवेश प्रक्रिया चालू करें और पोर्टल पर आवेदन करवाएं जिससे प्राइवेट स्कूलों में बच्चों का प्रवेश आरटीई के तहत हो सके। पत्रकार विकास परिषद संगठन मध्य प्रदेश संगठन सचिव जुनैद खान ने बताया कि शिक्षा विभाग ने एक आदेश पुर्व में जारी किया था जिसमें आरटीई योजना के अंतर्गत दूसरे चरण के आवेदन 2 अप्रैल 2024 से लेकर 4 अप्रैल 2024 तक लिये जाएंगे। इसमें जिन बच्चों ने आरटीई 2024 के लिए पहले से आवेदन किया था उन्हें स्कूल चॉइस फिर से भरने का अवसर दिया जा रहा हैं।आरटीई 2024 के दूसरे चरण के लिए केवल वही विद्यार्थी आवेदन कर सकते हैं जिनका आवेदन पहले से हो रखा हैं। दूसरे चरण में केवल विद्यालय सूची में बदलाव किया जा सकता हैं। इसमें नये आवेदन नहीं लिये जाएंगे। आज शहडोल सहित प्रदेश में हजारों बच्चे एवं उनके अभिभावक इस इंतजार में बैठे हैं कि आरटीई के तहत दूसरे चरण का आवेदन की तिथि आ सकती है वही शहडोल जिला सहित प्रदेश के कई प्राइवेट विद्यालयों में सैकड़ो सीट अभी भी खाली है।

शिक्षा का अधिकार

संविधान (छियासीवां संशोधन) अधिनियम, 2002 ने भारत के संविधान में अंत: स्‍थापित अनुच्‍छेद 21-क, ऐसे ढंग से जैसाकि राज्‍य कानून द्वारा निर्धारित करता है, मौलिक अधिकार के रूप में छह से चौदह वर्ष के आयु समूह में सभी बच्‍चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का प्रावधान करता है। नि:शुल्‍क और अनिवार्य बाल शिक्षा (आरटीई) अधिनियम, 2009 में बच्‍चों का अधिकार, जो अनुच्‍छेद 21क के तहत परिणामी विधान का प्रतिनिधित्‍व करता है, का अर्थ है कि औपचारिक स्‍कूल, जो कतिपय अनिवार्य मानदण्‍डों और मानकों को पूरा करता है, में संतोषजनक और एकसमान गुणवत्‍ता वाली पूर्णकालिक प्रांरभिक शिक्षा के लिए प्रत्‍येक बच्‍चे का अधिकार है।

अनुच्‍छेद 21-क और आरटीई अधिनियम 1 अप्रैल, 2010 को लागू हुआ। आरटीई अधिनियम के शीर्षक में ”नि:शुल्‍क और अनिवार्य” शब्‍द सम्मिलित हैं। ‘नि:शुल्‍क शिक्षा’ का तात्‍पर्य यह है कि किसी बच्‍चे जिसको उसके माता-पिता द्वारा स्‍कूल में दाखिल किया गया है, को छोड़कर कोई बच्‍चा, जो उचित सरकार द्वारा समर्थित नहीं है, किसी किस्‍म की फीस या प्रभार या व्‍यय जो प्रारंभिक शिक्षा जारी रखने और पूरा करने से उसको रोके अदा करने के लिए उत्‍तरदायी नहीं होगा। ‘अनिवार्य शिक्षा’ उचित सरकार और स्‍थानीय प्राधिकारियों पर 6-14 आयु समूह के सभी बच्‍चों को प्रवेश, उपस्थिति और प्रारंभिक शिक्षा को पूरा करने का प्रावधान करने और सुनिश्चित करने की बाध्‍यता रखती है। इससे भारत अधिकार आधारित ढांचे के लिए आगे बढ़ा है जो आरटीई अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार संविधान के अनुच्‍छेद 21-क में यथा प्रतिष्‍ठापित बच्‍चे के इस मौलिक अधिकार को क्रियान्वित करने के लिए केन्‍द्र और राज्‍य सरकारों पर कानूनी बाध्‍यता रखता है।

आरटीई अधिनियम निम्‍नलिखित का प्रावधान करता है :

1.किसी पड़ौस के स्‍कूल में प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने तक नि:शुल्‍क और अनिवार्य शिक्षा के लिए बच्‍चों का अधिकार।
2.यह स्‍पष्‍ट करता है कि ‘अनिवार्य शिक्षा’ का तात्‍पर्य छह से चौदह आयु समूह के प्रत्‍येक बच्‍चे को नि:शुल्‍क प्रारंभिक शिक्षा प्रदान करने और अनिवार्य प्रवेश, उपस्थिति और प्रारंभिक शिक्षा को पूरा करने को सुनिश्चित करने के लिए उचित सरकार की बाध्‍यता से है। ‘नि:शुल्‍क’ का तात्‍पर्य यह है कि कोई भी बच्‍चा प्रारंभिक शिक्षा को जारी रखने और पूरा करने से रोकने वाली फीस या प्रभारों या व्‍ययों को अदा करने का उत्‍तरदायी नहीं होगा।
3.यह गैर-प्रवेश दिए गए बच्‍चे के लिए उचित आयु कक्षा में प्रवेश किए जाने का प्रावधान करता है।
यह नि:शुल्‍क और अनिवार्य शिक्षा प्रदान करने में उचित सकारों, स्‍थानीय प्राधिकारी और अभिभावकों कर्त्‍तव्‍यों और दायित्‍वों और केन्‍द्र तथा राज्‍य सरकारों के बीच वित्‍तीय और अन्‍य जिम्‍मेदारियों को विनिर्दिष्‍ट करता है।
4.यह, अन्‍यों के साथ-साथ, छात्र-शिक्षक अनुपात (पीटीआर), भवन और अवसंरचना, स्‍कूल के कार्य दिवस, शिक्षक के कार्य के घंटों से संबंधित मानदण्‍डों और मानकों को निर्धारित करता है।
5.यह राज्‍य या जिले अथवा ब्‍लॉक के लिए केवल औसत की बजाए प्रत्‍येक स्‍कूल के लिए रखे जाने वाले छात्र और शिक्षक के विनिर्दिष्‍ट अनुपात को सुनिश्चित करके अध्‍यापकों की तैनाती के लिए प्रावधान करता है, इस प्रकार यह अध्‍यापकों की तैनाती में किसी शहरी-ग्रामीण संतुलन को सुनिश्चित करता है। यह दसवर्षीय जनगणना, स्‍थानीय प्राधिकरण, राज्‍य विधान सभा और संसद के लिए चुनाव और आपदा राहत को छोड़कर गैर-शैक्षिक कार्य के लिए अध्‍यापकों की तैनाती का भी निषेध करता है।
6.यह उपयुक्‍त रूप से प्रशिक्षित अध्‍यापकों की नियुक्ति के लिए प्रावधान करता है अर्थात अपेक्षित प्रवेश और शैक्षिक योग्‍यताओं के साथ अध्‍यापक।
यह (क) शारीरिक दंड और मानसिक उत्‍पीड़न; (ख) बच्‍चों के प्रवेश के लिए अनुवीक्षण प्रक्रियाएं; (ग) प्रति व्‍यक्ति शुल्‍क; (घ) अध्‍यापकों द्वारा निजी ट्यूशन और (ड.) बिना मान्‍यता के स्‍कूलों को चलाना निषिद्ध करता है।
7.यह संविधान में प्रतिष्‍ठापित मूल्‍यों के अनुरूप पाठ्यक्रम के विकास के लिए प्रावधान करता है और जो बच्‍चे के समग्र विकास, बच्‍चे के ज्ञान, संभाव्‍यता और प्रतिभा निखारने तथा बच्‍चे की मित्रवत प्रणाली एवं बच्‍चा केन्द्रित ज्ञान की प्रणाली के माध्‍यम से बच्‍चे को डर, चोट और चिंता से मुक्‍त बनाने को सुनिश्चित करेगा।

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