पुस्तक विक्रेता की मनमानी व कार्यवाई के नाम पर केवल अधिकारियों का दिखावा

आशीष सिंह की रिपोर्टिंग
अंबाह विकासखण्ड में निजी स्कूलों और नगर में पुस्तक विक्रेता की मनमानी
अंबाह में जग्गा चौराह पर स्थित बालाजी बुक सेंटर किसके आशिर्वाद से है बेखौफ,80% से अधिक निजी स्कूलों से सांठगांठ कर निजी प्रकाशन की पुस्तक का विक्रय का खेल
एक अभिभावक द्वारा अपने बच्चों की (लिटिल चैंप्स स्कूल) की किताबे बालाजी बुक सेंटर से 4185 रूपए खरीदी गई और पेमेंट फ़ोन पे से किया गया जब दुकानदार से बिल मांगा तो बिल देने से मना कर दिया पुस्तक विक्रेता स्कूल संचालकों को मोटा कमीशन देकर अभिभावकों की जेबों पर डाका डालने से बाज नहीं आ रहे हैं।
कस्बे में पुस्तक विक्रेता निजी स्कूलों से सांठगांठ करके अपने मनमाने ढंग से पुस्तको का विक्रय कर रहे है अधिक मुनाफे के चक्कर में अभिभावक को न बिल दिया जाता है और न कस्बे में उस प्रकाशन की पुस्तक अन्य किसी दुकान पर उपलब्ध होती है जिसके चलते पुस्तक विक्रेता अभिभावक का शोषण करते है। अंबाह विकासखंड में अधिकतर किसान वर्ग के लोग रहते है जिनकी आवक केवल खेती से होती है आज किसान की क्या स्थिति है ये छुपी नहीं है । लेकिन उच्च अधिकारियों को क्या फर्क पड़ता है किसान मरे या उसका शोषण हो लेकिन उच्च अधिकारियों को अभिभावक के द्वारा बार बार शिकायत करने पर भी कोई प्रभावी कार्यवाही नहीं होती । जिससे तंग आकर बहुत से अभिभावक शिकायत भी नहीं करते अभिभावक कहते है की हम तो नहीं पढ़ सकते लेकिन कैसे भी हमारा बच्चा पढ़ जाए।
बहुत बड़ी बात तो ये है । एसडीएम जैसे उच्च अधिकारी द्वारा शिकायत के आधार पर दुकानों को सील किया जाता है। लेकिन उसी शाम दुकान को खोलने का आदेश भी एसडीएम शाहब के द्वारा ही दिया जाता हैं। लेकिन इस कार्यवाई पर अनेकों सवाल खड़े होते है ।
अगर दुकान सील की गई तो फिर खुली किस आधार पर!?
अगर खुली तो प्रभावी कार्यवाही क्यों नहीं!?
अगर दुकान दोपहर को सील होती है और शाम को दूकान खोलने के आदेश उसकी अधिकारी के होते है तो ऐसी क्या कार्यवाई हुई एक बहुत बड़ा सवाल खड़ा होता है!?
सरकार के प्रतिबंधों के बावजूद प्राइवेट स्कूलों में निजी प्रकाशकों की पुस्तकों का चलन बंद क्यों नहीं हो रहा!?
क्या शिक्षा विभाग के अधिकारियों शासन के नियमों का पालन कराने में असक्षम होते नजर आ रहे है।
इनका कहना हैं।
सर आप के द्वारा बालाजी बुक सेंटर सील किया गया था!?
पता नहीं मुझे एसडीएम साहब का फोन आया था
(आर.एस. सिकरवार बीआरसी अंबाह)
इनका कहना हैं।
हमने प्रकरण बनना कर जिले में भेज दिया उसका जो भी निराकरण होगा वो शिक्षा विभाग जिला से होगा।
(अरविंद माहौर एसडीएम अंबाह)
इनका कहना हैं।
मामला किस दुकान से संबंधित है हम दिखवाते हैं
(डॉ.इच्छित गढ़पाले जिला सीईओ मुरैना )
इनका कहना है
फ़ोन नहीं उठाया
(ए.के.पाठक.जिला शिक्षा अधिकारी)

Subscribe to my channel
Comments are closed.