अंबाह सिबिल अस्पताल भवन निर्माण में किया जा रहा प्रतिबंधित चंबल रेत का उपयोग

मुरैना, अंबाह सिबिल अस्पताल का निर्माण कार्य किया जा रहा है तेईस करोड़ रूपए कीलागत बन रहा है जिसमे चंबल नदी से रेत के उत्खनन और परिवहन दोनों पर ही वन विभाग भले ही प्रतिबंध लगा चुका है, लेकिन यहां इस पर लगाम नहीं जा पा रही है। आलम यह है कि यहां सरकारी निर्माणों तक में इसी प्रतिबंधित रेत का उपयोग हो रहा है। जहां खुले आम दर्जनों ट्राली इस प्रतिबंधित रेत की डाल दी जातीं है। ऐसा ही मामला अंबाह में बनाई जा रही नवीन सिबिल अस्पताल भवन का है, जहां ठेकेदार लगातार इस चंबल रेत का उपयोग कर रहा है। इसके बावजूद यहां इस पर रोक लगाने तक का प्रयास नहीं किया गया है। जबकि ठेका में स्पष्ट तौर पर सिंध रेत या अन्य किसी रेत का उल्लेख किया जाता है।
उल्लेखनीय है कि कस्बे में इस समय नवीन सिबिल अस्पताल भवन का निर्माण कार्य कराया जा रहा है, कई दिनों से यहां निर्माण कार्य चल रहा है, लेकिन अनियमितता यह है कि यहां इस निर्माण में प्रतिबंधित चंबल रेत का प्रयोग किया जा रहा है। जबकि चंबल से रेत का उत्खनन तक नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद निर्माण स्थल पर दर्जनों ट्राली चंबल रेत की रखकर लगातार उपयोग हो रहा है। खासबात यह है कि सभी अधिकारी यहीं रहते है। इसके बावजूद इस प्रतिबंधित रेत के उपयोग पर कार्रवाई तो दूर इसे रोकने का काम भी नहीं किया गया। जबकि यहां हर दिन रेत से भरी ट्राली अनलोड होती है। खासबात यह है कि जब भी सरकारी भवन निर्माण के ठेका दिए जाते है, तब एस्टीमेट में सिंध नदी या किसी अन्य रेत का ही उपयोग करना उल्लेख किया जाता है। लेकिन यहां यह सिर्फ कागजों तक ही सीमित रहता है निर्माण में चंबल रेत का ही उपयोग ठेकेदार करते है। जिसको अधिकारियों का भी मौन समर्थन रहता है।
अंबाह खनिज विभाग अधिकारी के ढीले रवैया कि वजह से इसलिए होता है चंबल का रेत का उपयोगः— सरकारी निर्माणों में ठेकेदारों द्वारा चंबल रेत का उपयोग करने की वजह है इसकी सहज उपलब्धता। दरअसल कस्बे में ही दर्जनों की संख्या में ट्रैक्टर-ट्रॉली आते है। जिससे यह रेत आसानी से मिल जाता है। इसके अलावा स्थानीय स्तर पर रेत उपलब्ध होने से इसकी कीमत भी कम रहती है। वहीं इसे बिना रायल्टी के उत्खनन कर लाया जाता है, जिससे यह बेहद कम दाम में मिल जाता है। जबकि सिंध नदी का रेत महंगा पड़ता है। इसे जिले से बाहर से मंगाना पड़ता है, वहीं इसकी रायल्टी भी चुकानी होती है। इसलिए चंबल रेत का उपयोग ही ठेकेदार करते हैं।
शिकायतों के बाद भी नहीं होती कार्रवाईः— चंबल रेत का उपयोग लगभग हर सरकारी निर्माण में ही किया जा रहा है,
*खनिज विभाग अधिकारी एसडीओपी भूरा गायकवाड का कहना है अभी मे श्योपुर ड्यूटी पर है अपने किसी कर्मचारी को बोल कर दिखवाते है*

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