जा सुरदहा के होरी मा (कहावत)

सतना:जिला मुख्यालय से लगभग 40 किलोमीटर नागोद से तकरीबन 15 किलोमीटर की दूरी पर बसा है सुरदहा कला यहां राजाओं की रियासत थी उनके वंशज कुंवर मनीष प्रताप सिंह राव साहब सुरदहा बताते हैं कि यहां की कहावत कि “जा सुरदहा की होरी मा” किस तरह से प्रसिद्ध हुई ,होलिका दहन बडे़ सयाने बताते हैं सुरदहा की होलिका बहुत विशाल बनाई जाती थी जिसकी लपटें लगभग 300 से 500 फिट तक ऊंची उठती थी जिसे 3/4 किलोमीटर दूर से आसानी से देखा जा सकता था इसलिए प्रसिद्ध है सुरदहा की होलिका दहन बुजुर्गों की एक कहानी के अनुसार गाँव में एक समधी आए हुए थे जो घर के बाहर चारपाई(खटिया) रख के सो रहे थे होली के हुर्दगों ने उन्हें खटिया सहित होलिका दहन में ले जा कर रख दिया समधी जी को बाहर निकाल लिया गया लेकिन खटिया और बिस्तर जल गए!
तभी से सुरदहा कै होरी प्रसिद्ध है और हमेशा रहेगी!

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