शहडोल सिविल न्यायालय ने दिया स्थगन आदेश मामला खसरा नम्बर 72 के अतिक्रमण व बावली का

शहडोल। शहडोल नगर के वार्ड क्रमांक 32 खसरा नंबर 72 के अंश भाग की जमीन पर अवैध कब्जे वह बावली को लेकर स्थानीय जन किरण स्ट्रीट नवदुर्गा उत्सव समिति परिवार के बैनर तलें लगातार 66 दिन से अनशन पर हैं मगर इसी अनशन के मध्य ही सिविल न्यायालय द्वारा अस्थाई निषेधाज्ञा जारी की है और कहा है कि आवेदन पत्र के निराकरण तक उभय पक्ष मौके पर यथा स्थिति बनाए रखेंगे सिविल न्यायालय के इस निर्णय के बाद देखना यह है कि आंदोलनकारी न्यायालय के इस निर्णय के बाद क्या अनशन जारी रखते हैं या सिविल न्यायालय के निर्णय की प्रतीक्षा तक आन्दोलन स्थगित करते है.?
जानने ओर समझनें योग्य बात
आश्चर्य की बात है कि शासन की ओर से अधिवक्ता शिवाकांत त्रिपाठी उपस्थित रहे मगर प्राप्त जानकारी के नियमों अनुसार तहसीलदार को शासन की तरफ से पैरवी करने वाले अधिवक्ता को नियुक्त करने से पूर्व अपने वरिष्ठ अधिकारी से लिखित अनुमति ली जाती है। मगर प्राप्त सूत्रों के हवाले से यह बात सामने आई है कि सोहागपुर के उक्त समय के प्रभारी तहसीलदार ने बिना किसी वरिष्ठ अधिकारी की लिखित अनुमति के बिना ही उक्त विषय की पैरवी के लिए अधिवक्ता नियुक्त कर दिया आखिर इतनी लापरवाही ओर जल्दबाजी क्यों.? वैसे जब इस विषय को खंगाला गया तो जानकारी प्राप्त हुई की प्रभारी तहसीलदार ने अपने वरिष्ठ अधिकारी से मौखिक अनुमति प्राप्त की थी। अब ये मौखिक अनुमति का क्या प्रावधान है यह बात तो अधिकारी ओर अधिनस्थ कर्मचारी ही जाने। आगे देखना है कि न्यायालय इस 72 न खसरे के विवाद में क्या फैसला सुनाते हैं? क्या न्यायालय के फैसले को दोनों पक्ष स्वीकार करते हैं या यहां भी एक अदालत के बाद दूसरी अदालत व हाईकोर्ट सुप्रीम कोर्ट या फिर तारीख पे तारीख और तारीख पे तारीख मिलती रहेगी ओर सिलसिला यूं ही चलता रहेगा?

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